गुरू भगवान Writer Gopalsingh Mo,6398347628 नीरू पुत्र कबीर जुलाहे महिमा ख़ूब हबीब लुभाए! क्षर अक्षर अन्धेर हटाए कविता गाकर ज्ञान सुनाए! राह मुक्ति जन नहीं समझते पाप पुन्य हैं वहीं उलझते! डेरा ज्योति निरंजन जायें भव सागर में वापस आयें! पूर्ण गुरू भगवान समाना करें अमर सतलोक पठाना! है बीमारी जन्म मरण की करो बन्दना गुरू चरण की! बन जाएँगे गुरू सहारा सुख सम्मति का दिखे नज़ारा! होंइ गुरू नहीं राम मिलेंगे भूत पिशाच ग्रास कर लेंगे! क्षर अक्षर का भरम तोड़ले गुरू प्रेम तू सहज जोड़ले! गुरु से उत्तम नहीं जगत में तालमेल कर पूर्ण भगत में! पूर्ण फ़ना तू मन को करके होइ प्रवेश नैंन को भरके! गुरु मक़्तव नहीं होइ निवासी रहे भटकता तू चौरासी! हरियाने में सत हरि आए तत्व ज्ञान परि पूर्ण कराए! क्षर से जो यजमान निडरते अमरपुरी स्थान पहुँचते! हो आमीन मेरे गुरुवर को करें दाग़दा ब्रह्मादिक को! भक्ति महल दीदार नियारा क्षर अन्धेर हटे उजियारा! सबके सदमों को हर लेते पलभर में नेमत कर देते! जिनका जगत नहीं रखवारा उनका है गुरुदेव सहारा! पूजा है बेक़ार निरन्जन नहीं दुखों का है ये भन्जन! रूहों ...
Comments