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Showing posts from February, 2026

SHYAHPOSH-PART - 2

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Shyah posh-part-2 ----------------------------------------------------- 35 = जमाल गबरू से फ़रमाना? चढ़ौ जब दार तख़्त दिलवर। आऊँगी चढ़ अस्प यार, मैं श्याह पोश बनकर।। दस्त में ज़हर जाम होगा। दुसरे में शमसीर तमाशा  सरे आम होगा।। जवानी जोश सिमट करके! ऐस करेंगे आज रात भर  गले लिपट करके   ! 36 = गबरू जमाल से फ़रमाना? लिखा तक़दीर वही होना। दिल पर कर इख़्तियार इश्क़ के  जोश मती खोना।। ख़ुदा ईमान हमारा है! नहीं पाक़ दिल इश्क़ जान ये  लफ़्ज़ तुम्हारा है। दार दीदार फ़ज़र प्यारी। दीयो कुराँ सुनाइ , मिटै अरमान फ़िक़र सारी।। 37 = कमंद से दोनों उतरकर शाह  निज महल जाना , कमरुद्दीन गबरू से फ़रमाना  निज महल में आकर ? क़मद से गबरू जब उतरा। तख़्तनसी महमूद संग में पकड़  क़मद उतरा।। यार के यार संग चलता। महलन में निज आइ वचन तब कमरुद्दी कहता।। दिले अरमान यही आवै। छुप जाओ कहीं जाइ सिपेहसालार फ़ज़र आवै।।                             38 = बा...

दिल से याद

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दिल से याद Author   Gopalsingh   Mo,6398347628

गुरू भगवान

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गुरू भगवान Writer Gopalsingh Mo,6398347628 नीरू पुत्र कबीर जुलाहे महिमा ख़ूब हबीब लुभाए!  क्षर अक्षर अन्धेर हटाए कविता गाकर ज्ञान सुनाए! राह मुक्ति जन नहीं समझते पाप पुन्य हैं वहीं उलझते! डेरा ज्योति निरंजन जायें भव सागर में वापस आयें! पूर्ण  गुरू भगवान समाना करें अमर सतलोक पठाना! है बीमारी जन्म मरण की करो बन्दना गुरू चरण की! बन जाएँगे गुरू सहारा सुख सम्मति का दिखे नज़ारा! होंइ गुरू नहीं राम मिलेंगे भूत पिशाच ग्रास कर लेंगे! क्षर अक्षर का भरम तोड़ले गुरू प्रेम तू सहज जोड़ले! गुरु से उत्तम नहीं जगत में तालमेल कर पूर्ण भगत में! पूर्ण फ़ना तू मन को करके  होइ प्रवेश नैंन को भरके! गुरु मक़्तव नहीं होइ निवासी रहे भटकता तू चौरासी! हरियाने में सत हरि आए तत्व ज्ञान परि पूर्ण कराए! क्षर से जो यजमान निडरते अमरपुरी स्थान पहुँचते! हो  आमीन मेरे गुरुवर को करें दाग़दा ब्रह्मादिक  को! भक्ति महल दीदार नियारा क्षर अन्धेर हटे उजियारा! सबके सदमों को हर लेते पलभर में नेमत कर देते! जिनका जगत नहीं रखवारा उनका है गुरुदेव सहारा! पूजा है बेक़ार निरन्जन नहीं दुखों का है ये भन्जन! रूहों ...

तन्हाई के आँशू (tears of loneliness)

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तन्हाई के आंशू! Writer Gopalsingh Mo,6398347628 1. तन्हाई के आँशू  पी कर रह गए || रुष्वाई में हम जी कर रह गए|| उतर चुका था दिल में कोई कब से|| लिहाज़ा अक्शर सादग़ी कर रह गए|| 2.   ठोकरें खाकर ज़माने की हाथ मल कर बैठे हैं, तुम्हारी तरफ़ से हमेशाँ सिर क़त कर बैठे हैं|| अब दोनों का इन्साफ़ अल्लाह के हाथ में है, महज़ इसी बात को दिल से कह कर बैठे हैं|| 3.   हिज़र की घडी़ थी, अश्कों की झड़ी थी|| चला गया दूर कोई मुझसे, ज़िन्दग़ी सूनी पड़ी थी|| 4.   तू नँ सही तेरी याद ही सही, ज़िन्दगी मेरी बर बाद ही सही|| उम्र भर ख़ैरियत रहे यूँ हीं यार, तेरे लिए मेरी फ़रियाद ही सही|| 5.   चलता रह तू राह पर मंज़िल मिलेगी एक दिन, ग़ुम राह मत होना ज़िंदगी कदम चूमेगी एक दिन|| करले दीदार मोहब्बत का दिल ख़ोल कर यार, अल्लाह के दरवार में ज़न्नत मिलेगी एक दिन|| 6.   दिल के तशब्बुर में आ गया कोई, बातें कर चार मन को भा गया कोई|| तफ़रीक अपनी दे गया तड़फने को, ऐसा साथ में सुलूक कर गया कोई|| 7.   तेरी दोस्ती रंँग नहीं लाई दिलवर, जबसे तू गया घटा ग़म की छाई दिलवर|| पी गया आँसू हुस्न की क़ैद ...

प्यासी रूह

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प्यासी रूह Writer Gopal singh Mo,6398347628 राम कबीरा साजन मेरा चरणँ कमल महं  पावन डेरा!  फ़ना कीजिए जग की ममता जिसमें ये मन पापी रमता! चलकर सत्यलोक से आए पूरणँ इल्म जगत ले आए! लालन पालन जाति जुलाहे राम नाम की लगन लुभाये! रामा नँन्द गुरू अपनाए कबिरा उनके शिष्य कहाए!  पंचतत्व में पिंजर दाख़िल होइ कबीरा दिल में क़ाहिल! दास कबीर विरासत पकरी चौंसठ लाख शिष्य की गठरी! करता ज्ञान दिलों पे दस्तक़ पावन दिल सबके हैं मस्तक़!  भटके सजनी रूह पियासी बुझे प्यास नाँ लख चौरासी! होइ मिलन पूरणँ तब मेरा सजनी लेइ सजन सँग फ़ेरा! बिन पिय दिल में बरहम छाई मेरे जिगर क़रार नँ आई! तड़फ़ बग़ैर सजन के सजनी बेज़र इश्क़ ढले दिन रजनी! मुज़रा मरसिम राह घनेरी अब दिल मेरे रही नँ शेरी! उड़ गई निंदिया नैंन हमारी बेताबी दिन रैन तुम्हारी! क़ायनात में परेशान हूँ करन मोहब्बत पशेमान हूँ! बुझे प्यास तब राम मिलेंगे फ़ूल बहार तमाम ख़िलेंगे! याद पिआ की मुझे सताती लिख करके ख़त उसे पठाती! उजलत भेज बुलावा मोही तड़फ़े मछली जल बिन सोही! दुल्हन बन कर जाऊँगी मैं साजन प्रेम निभाऊँगी मैं! होइ अल्विदा जब ये डोली सखियो गीत...

प्यार निभाया

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  प्यार निभाया Writer Gopalsingh Mo,6398347628 1.दीदा दिलेरी निभाते गये! अपना किसी को बनाते गये दुनियाँ की रश्मों को तोड़ा तभी उस पे ही सब कुछ लुटाते गये दीदा दिलेरी निभाते गये! 2.घर में नहीं था सब्रे क़रार होठों ख़मोशी नँ दिल में बहार नाता ग़मों से ही जोड़े रखा हँस कर के आँसू बहाते गये दीदा दिलेरी निभाते गये! 3.ग़ुज़री हमेशाँ है रो रो उमर उस पर नहीं है कोई असर दिन रात दिल भी मचलते रहा यादों के अरमाँ सताते गये दीदा दिलेरी निभाते गये! 4.दिल शाद चेहरा सन्दल बदन, ख़िल ही गया था दिल का चमन, तश्ख़ीर हाँसिल कर नाँ सके, तश्वीह से आज़माते गये, दीदा दिलेरी निभाते गये, 5.मौसम बहारों के आते गये, उल्फ़त के जामे उड़ाते गये, परवाह बिल्कुल रही नाँ दिले, इश्क़े वफ़ा यूँ लुटाते गये, दीदा दिलेरी निभाते गये, मोहब्बत बढ़ना लड़ती है आँख आँख से लड़ती चली गई! मेरी मोहब्बत दिन व दिन बढ़ती चली गई! तक़्फ़ीफ है ग़म आलम दिल के शुक़ून का! कोई हशीन मुझ पर मरती चली गई! पाया है इश्क़ तेरा दीदार से सनम! तेरा रहूँ मैं शाक़िर मुझको तेरी कसम! तेरी मोहब्बत मैंने नीदें ख़राब कीं! तेरी ये ज़ुल्फ़ हैराँ करती चली गई! कोई ...