SHYAHPOSH-PART - 2
Shyah posh-part-2 ----------------------------------------------------- 35 = जमाल गबरू से फ़रमाना? चढ़ौ जब दार तख़्त दिलवर। आऊँगी चढ़ अस्प यार, मैं श्याह पोश बनकर।। दस्त में ज़हर जाम होगा। दुसरे में शमसीर तमाशा सरे आम होगा।। जवानी जोश सिमट करके! ऐस करेंगे आज रात भर गले लिपट करके ! 36 = गबरू जमाल से फ़रमाना? लिखा तक़दीर वही होना। दिल पर कर इख़्तियार इश्क़ के जोश मती खोना।। ख़ुदा ईमान हमारा है! नहीं पाक़ दिल इश्क़ जान ये लफ़्ज़ तुम्हारा है। दार दीदार फ़ज़र प्यारी। दीयो कुराँ सुनाइ , मिटै अरमान फ़िक़र सारी।। 37 = कमंद से दोनों उतरकर शाह निज महल जाना , कमरुद्दीन गबरू से फ़रमाना निज महल में आकर ? क़मद से गबरू जब उतरा। तख़्तनसी महमूद संग में पकड़ क़मद उतरा।। यार के यार संग चलता। महलन में निज आइ वचन तब कमरुद्दी कहता।। दिले अरमान यही आवै। छुप जाओ कहीं जाइ सिपेहसालार फ़ज़र आवै।। 38 = बा...