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Showing posts from August, 2025

ग़म-ए-आशिक़ी

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ग़म-ए-आशिक़ी Writer Gopalsingh Mo,6398347628 ख़ूबसूरती दुख़्त हसीना लटके लट रुख़ आइ पसीना! जामे हुस्न सितम कर डाले मै ख़ाने ग़म ज़िगर हवाले! होता इश्क़ मुलाक़ातों में नहीं सब्र है दिन रातों में! रो रो कर मैं रात गुज़ारूं तुझको हरदम यार पुक़ारूं! तरस रही हैं बाहें मेरी दर्द भरी दिल आहें तेरी! हैं बेताब निगाहें मेरी बहें अश्क़ गम राहें तेरी!  नहीं मोहब्बत जाम क़रारी आये कब ग़ुल्फ़ाम हमारी! तड़फ़े दिल दीदार पियासा आऊँगी मैं दिया दिलासा! ग़मे सज़ा .तश्लीम निशानी इश्क़ मोहब्बत नांफ़रमानी! तक़ता राह तुम्हारी हर दम आओगी कब मेरी हम दम!  तजके कहाँ गई तू सजनी जैसे दिवस हुई हो रजनी! दिल बेज़ार ख़याल घनेरा क़ैद हुस्न की नहीं बसेरा! भर आई हैं मेरी अखियाँ करें रिस्क़ सब तेरी सखियाँ! हैं वीरान गाँव की गलियाँ दिखे नहीं इनमें रँग रलियाँ! रेशम जुल्फ़ घटा लहराए तुझको देख चाँद शरमाए! नूरे नज़र हिजाब शरारा अक़्शर कर मेहताब ग़ुहारा! रात सुहानी दिखे चाँदनी कोई हसीना लखे नाज़नी! चेहरा ख़ूब जिग़र भरमारए तुझे मयस्सर दिल फ़रमाए! तुझको देख मेरा दिल खोया पाकर के ग़...

गबरू उर्फ़ जमाल

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गबरू उर्फ़ जमाल Writer Gopalsingh Mo,6398347628 बंदना मात शारदे बन्दना, चरणों शीस नवाइ! रखियो लाज गरीब की, नज़र जीद फ़रमाइ! मुझे दुआएँ दीजियो, दानिस्ता फ़रज़न्‍द! भक्ति डगर पे आ गया, बिसराके हर फ़न्द! तेरा दिल में वाश है, संकट मोचन मात! पापी हूँ मैं जन्म का, पतीत पावन आप! करो जीद मातेश्वरी, नय्या लहर समाइ! नहीं दूसरा और है, तेरी आश लगाइ! अष्ट भुजंगी शेर पे, हाथों में हथियार! दुश्मन पल में मारके, बन्दे दिये उबार! इष्ट मात जगदम्बिका, मुझ पे कर उपकार! अब तेरा मैं हो चुका, बजे जिगर झनकार! अरजी सुनले भक्त की, सिंघ वाहिनी मात! दिखला दे दीदार अब, व्याकुल है ये तात! मातेश्वरी जुवान पे, मिलता दिल सन्तोश! सच्चा तेरा भक्त हूँ, क्षमा कीजियो  दोश! जब से हुआ मुरीद मैं, मन में जलती ज्योति! जग बैरी लगने लगा, ख़ुशी घनेरी होति! माता के दीदार बिन, दिल को नहीं क़रार! बेताबी दिन रैन की, आवै नहीं बहार! झोली भरदे भक्त की, नय्या है मजधार!  जगत नेस्तनाबूद है, अब तेरी दरक़ार! माता से दीदार की ग़ुहार माता मेरी मदद कीजियो,कविता मेरी सफल कीजियो! आज इनायत मुझ पे कर दो,दामन सूना  नेमत भर दो! आ कर दर पे...

यादों की बारात

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यादों की बारात Writer Gopalsingh Mo,6398347628 यादों की बारात  निकली है मेरे द्वार से बजने लगी शहनाई दिल में किसी के इज़हार से|| यादों की बारात निकली है मेरे द्वार से|| तोड़ दिया था दिल उसने झूठे वादे से हमारा || नहीं दिखता था उस दिन कोई धार में सहारा || अफ़साना  बन गया बेहतर उसका ज़माने में ||  मुलाक़ात हुई उससे एक दिन किसी तराने में|| शबाब बहार पर था सिर से पाँव तक निख़ार से|| यादों की बारात निकली है मेरे द्वार से|| देखकर नूरे नज़र दिल को खो दिया हमने || याद में बहाकर अश्क चेहरे को धो दिया हमने|| आते थे आपसे मिलने दिल की बात कहते थे || नँ जाने कहाँ गये वो दिन हम तुम साथ रहते थे || रह गयीं यादें बिख़र कर किसी के ऐतवार से||  यादों की बारात निकली है मेरे द्वार से||  सोचा था फ़ूल खिलेंगे ज़िन्दगी में आपके आने से|| बहाते रहे अश्क रात दिन हम दिल के ख़जाने से|| अफ़साना बन गया यादों का तेरी रहनुँमाई में|| फ़ुरक़त ग़वारा कर नहीं सके हम बेवफ़ाई में|| शिक़स्त हो गई है हमारी आपके इन्तज़ार से|| यादों की बारात निकली है मेरे द्वार से|| माँगते रहे ख़ुदा से आपको हम फ़रियाद में...