ग़म-ए-आशिक़ी
ग़म-ए-आशिक़ी Writer Gopalsingh Mo,6398347628 ख़ूबसूरती दुख़्त हसीना लटके लट रुख़ आइ पसीना! जामे हुस्न सितम कर डाले मै ख़ाने ग़म ज़िगर हवाले! होता इश्क़ मुलाक़ातों में नहीं सब्र है दिन रातों में! रो रो कर मैं रात गुज़ारूं तुझको हरदम यार पुक़ारूं! तरस रही हैं बाहें मेरी दर्द भरी दिल आहें तेरी! हैं बेताब निगाहें मेरी बहें अश्क़ गम राहें तेरी! नहीं मोहब्बत जाम क़रारी आये कब ग़ुल्फ़ाम हमारी! तड़फ़े दिल दीदार पियासा आऊँगी मैं दिया दिलासा! ग़मे सज़ा .तश्लीम निशानी इश्क़ मोहब्बत नांफ़रमानी! तक़ता राह तुम्हारी हर दम आओगी कब मेरी हम दम! तजके कहाँ गई तू सजनी जैसे दिवस हुई हो रजनी! दिल बेज़ार ख़याल घनेरा क़ैद हुस्न की नहीं बसेरा! भर आई हैं मेरी अखियाँ करें रिस्क़ सब तेरी सखियाँ! हैं वीरान गाँव की गलियाँ दिखे नहीं इनमें रँग रलियाँ! रेशम जुल्फ़ घटा लहराए तुझको देख चाँद शरमाए! नूरे नज़र हिजाब शरारा अक़्शर कर मेहताब ग़ुहारा! रात सुहानी दिखे चाँदनी कोई हसीना लखे नाज़नी! चेहरा ख़ूब जिग़र भरमारए तुझे मयस्सर दिल फ़रमाए! तुझको देख मेरा दिल खोया पाकर के ग़...