Posts

Showing posts from September, 2025

यादों की शायरी

Image
यादों की शैर Writer gopalsingh Mo,6398347628 1.मेरा रफ़ीक मुझसे दूर है! अपने हुस्न का उसे गुरूर है!  भूल गया है ग़ुज़रे लम्हात को! किसी ग़ैर इख़्तियार मशरूर है! 2.गलियों में यूँ हीं फ़िरता गया! ज़िहादें ज़माने से करता गया! ख़तावार हम ने तो ख़ुद को चुना! रुष्वा ज़माना यूँ करता गया! 3.यादों को तेरी सजाता गया!  तन्हाई में गीत गाता गया! पंक्षी भी दिल का जो रोता कभी!  सागर ग़मे मुस्कुराता गया! 4.रुख़ तो मोहब्बत का दिखाया नहीं!   वादा जो किया था निभाया नहीं!  ज़ुर्मे वफ़ाओं को सहते रहे हम!   तुझको दिल से तो हमने भुलाया नहीं!    5.सुहाने दिन भी गुजरते गए!  दिन रात हम भी बिख़रते गये! समझा नसीबा जो अपना मगर! यादों में उसकी पिघलते गये! 6ख़यालों की दुनियाँ में जीते हैं हम! वफ़ाओं के अश्क़ो को पीते हैं हम! ख़यालों को अपना मुकद्दर समझ! ख़याले मुनव्वर सँजीते हैं हम! 7.मोहब्बत के ग़म छाते गए! तुम याद बहुत आते गए! तरसकर ही बितादी उम्र सारी! नग़मे यूँ फ़ुरक़त के गाते गए!  8.प्यार में रुष्वाई मिलती है! दर्द-ए-ग़म तन्हाई मिलती है! नहीं मिलता क़रार दिल को क...

बिसरी हुई यादें

Image
बिसरी हुई यादें Writer Gopal singh Mo,6398347628   बिसरी हुई यादें सताती हैं हमको||  राहें वो गलियाँ बुलाती हैं हमको|| कैसे नँ जाएँ  उन पुरानी यादों में|| शीतल फ़िज़ाएँ  झुलाती हैं हमको|| 1, वो मोहब्बत का कारवाँ अधूरा रह गया||  हशर आहें बनके डुबाती हैं हमको|| 2, रख करके दिल में  तुझे  जी रहा शातिर|| दुश्वार हैं शिष्कियाँ सुलाती हैं हमको|| 3, आईना ए दिल भी कब्रिस्तान बन गया|| फ़ितूरे नाँशाद यादें घुमाती हैं हमको|| 4, इश्क की शलाखें मुन्सितर हैं जिस्म से|| हिजर की आतिश में जलाती हैं हमको|| 5, दर्दे दिल की दवा भी कहीं  नहीं मिलती||  ऐहसास ये आहें कराती हैं हमको|| अधूरा साथ 1, रहा अधूरा साथ है|| हाथ नहीं अब हाथ है|| 2, और नहीं है कोई गिला|| चलता रहे यूँ सिल्सिला|| 3, तू ही तो निज बरक़त है|| चाहत दिल की हशरत है|| 4, तेरा सनम असीर हूँ|| दिल का महज़ फ़कीर हूँ|| 5, ग़ुज़रे दिन हैं मुश्किल से|| बीत रही तड़फ़न दिल से|| 6, गई कली मुरझाई है|| मिली इश्क रूशवाई है|| 7, बेशक जग बदनाम हूँ|| इश्क भरी पहचान हूँ|| 8, गया छूट अब हाथ है|| याद तेरी निज साथ है|| न...

कबीर महिमा

Image
कबीर महिमा Writer Gopalsingh Mo,Gopal Singh ●●●●1. रामपाल गुरु देव मनाऊँ!          ●●●●चरणों में झुक शीस नवाऊँ?                      2.     छोड़ जगत का भोग विलासा!                 हरि की शरणें  करो निवासा ?         3.      सार नाम सत् नाम जाप से !               मिले रिहायत सभी पाप से ?       4.  नींची जाति मुहाफ़िज मेरा !            जिसका है काशी मह  डेरा ?         5.     अब तक मानुष थे अज्ञानीं!                     महिमा हरि गुरु देव बखानीं ?          6.     मारग सबको मुक्ति दिखाया !              ऊँचा जग परचम लहराया ?        ...