यादों की शायरी
यादों की शैर Writer gopalsingh Mo,6398347628 1.मेरा रफ़ीक मुझसे दूर है! अपने हुस्न का उसे गुरूर है! भूल गया है ग़ुज़रे लम्हात को! किसी ग़ैर इख़्तियार मशरूर है! 2.गलियों में यूँ हीं फ़िरता गया! ज़िहादें ज़माने से करता गया! ख़तावार हम ने तो ख़ुद को चुना! रुष्वा ज़माना यूँ करता गया! 3.यादों को तेरी सजाता गया! तन्हाई में गीत गाता गया! पंक्षी भी दिल का जो रोता कभी! सागर ग़मे मुस्कुराता गया! 4.रुख़ तो मोहब्बत का दिखाया नहीं! वादा जो किया था निभाया नहीं! ज़ुर्मे वफ़ाओं को सहते रहे हम! तुझको दिल से तो हमने भुलाया नहीं! 5.सुहाने दिन भी गुजरते गए! दिन रात हम भी बिख़रते गये! समझा नसीबा जो अपना मगर! यादों में उसकी पिघलते गये! 6ख़यालों की दुनियाँ में जीते हैं हम! वफ़ाओं के अश्क़ो को पीते हैं हम! ख़यालों को अपना मुकद्दर समझ! ख़याले मुनव्वर सँजीते हैं हम! 7.मोहब्बत के ग़म छाते गए! तुम याद बहुत आते गए! तरसकर ही बितादी उम्र सारी! नग़मे यूँ फ़ुरक़त के गाते गए! 8.प्यार में रुष्वाई मिलती है! दर्द-ए-ग़म तन्हाई मिलती है! नहीं मिलता क़रार दिल को क...