तन्हाई की तड़फ़
तन्हाई की तड़फ़ Author Gopalsingh Mo,6398347628 1, तन्हाई में तड़फ़ कर बैठे हैं|| किसी के दिल में उतर कर बैठे हैं|| वफ़ा का अंजाम मिल ही गया हमको|| लिहाज़ा ज़िन्दगी में बिख़र कर बैठे हैं|| 2, छेड़ कर तरन्नुम दिल का कोई ख़ुद को खो दिया करते थे|| डूब कर याद में आपकी कभी हँसते कभी रो दिया करते थे|| तन्हाई में राह को तेरी दरबदर झाँकते रहे हम|| आव की इश्तियाक़ नहीं थी शरबसर चेहरे को अश्कों से धो दिया करते थे|| 3, प्यार की चिंगारी नेस्तनाबूद हो गई|| डूबी हुई किश्ती ज़माने में वज़ूद हो गई|| कर दिया है मुनव्वर यादों को हमने|| प्यार की इन्तिहाँ भी मख़्सूद हो गई|| 4, ज़िहाद करते रहे हम यादों से आपकी अंजाम हमको मिला नहीं|| फ़ूल टूटकर आ तो गया डाली से सूख़ गया लेकिन जीवन में ख़िला नहीं|| मोहताज़ हो गये माज़िरत में हम हमेशाँ के लिए|| ग़ैर की होकर फ़िरती हो बहारों में इसलिए हमें आपसे कोई ग़िला नहीं|| 5, नेस्तनाबूद ज़िन्दगी को सुकून नहीं मिला है|| ख़िलना था फ़ूल को यहाँ कहीं और ख़िला है|| अपने आपको हमने तुम्हारे कदमों की धूल समझा|...