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Showing posts from October, 2024

नज़र का इशारा

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नज़र का इशारा Author Gopalsingh Mo,6398347628  एक इशारा एक नज़र||  बना लिया है दिल ने घर|| याद तेरी अब आ गई|| दिल को भी तड़फ़ा गई|| पड़ा हुआ था हिज्र में|| गया समै इस फ़िक्र में|| इश्क तशब्बुर छा रहा|| गीत कोई अब गा रहा|| बैठी शिमट शबाब में|| लगती हूर हिजाब में|| इश्क बक़ार हिक़ायत में|| होइ ज़िहाद शिक़ायत में॥ अब तो एक फ़कीर हूँ|| इश्क़ ख़ुमार नज़ीरहूँ|| सहा बहुत अपमान है|| फिर भी दिल ऐहसान है|| देखे तुझको होइ बशर|| पूरी करनी कर क़शर|| प्यार पाना बाकी सब कुछ पा लिया पाना प्यार बाकी है|| तशल्ली के लिए तेरा इज़हार बाकी है|| सजा नुमाइश मत कर ज़िंदगी में यार|| तू ही तो मेरे दिल का दिलदार शाकी है|| बन जायेगा अफ़साना दिल ख़ौफ़ कर|| इंसाफ़ को अल्लाह का दरवार बाकी है||  पा लिया मोरब्बत को जवानी के दौर में|| लुभाने को दिल अभी फ़नकार बाकी है|| शाज़ धड़कनों का बजता ख़ुमार के लिए|| मेहफ़िल में  तेरी अभी झनकार बाकी है|| निकलते देखा दायरों से माशूम को मैंने||  महल में आने को तेरी दरकार बाकी है|| जी भर गया दुनियाँ की करतूत से मेरा|| तशब्बुर में आने को   किरदार बाकी ...

जुदा ज़िन्दगी से

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जुदा ज़िन्दगी से Author Gopal Singh Mo,6398347628 माँगा तुझे बंदग़ी में॥ आया नहीं ज़िंदग़ी में|| 1.   घड़ियाँ भी अब गुजर चुकीं! खुशियाँ घर में बिख़र चुकीं! पी गया दिल मै ख़ाना! बन गया है अफ़साना! नहीं लगाई तौहमत भी! की है तुझे मोहब्बत ही! मिला अज़ाब ज़िंदग़ी में! माँगा तुझे बंदग़ी में! 2.   किया सफ़र था गलियों का! देख खेल रँग रलियों का! मुझे नँ अच्छा लगता था! कोई नँ सच्चा दिखता था! फ़िर भी चाहा प्यार से! किया सब्र ज़िनहार से! करके जिगर मंदग़ी में! माँगा तुझे बंदग़ी में! 3.   मान लिया  था तुझे ख़ुदा! फ़िर भी दिल से हुआ जुदा! बिछड़ गया तू उम्र भर! पत्थर अपने रख दिल पर! निकला तू तो बे दरदी! दिखलाई है ख़ुद गरजी! ऐसे पड़े फ़ंदग़ी में! माँगा तुझे बंदग़ी में! 4. तेरी ख़ातिर ऐ सनम! दिल ही दिल में खा कसम! साथ निभाएँ जीवन भर! तेरे सँग में रह ग़ुज़र! कभी न होंगे हम जुदा! हसरत पूरण करे ख़ुदा! इश्क़ वफ़ा ढंग दी में! माँगा तुझे बंदग़ी में! 5. अपना जीवन जी चुके! आँखों आँशू पी चुके! घड़ी क़यामत आ गई! सिरे क़ज़ा लेहरा गई! करले शाक़ी ख़्याल तू! जिये हजारों साल तू! मुश्क़ी हरफ़ रंग दी ...

शरण कबीर की

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शरण कबीर की Author Gopal Singh Mo,6398347628 राम कबीरा ख़ालिक है! सबके दिल का मालिक है! अगर शरणँ में आओगे! नेमत पूरणँ पाओगे! क्षण क्षण जीवन बीत रहा! काल शाँस को जीत रहा! उपाय मुक्ति जलदी करले! स्वाशों का सुमिरन करले! आना जाना लगा रहे! जीवन में ये सदाँ रहे! जीवन को मत धूल कर! सच्चा राम कुबूल कर! लक्ष्मी घर के द्वार हो! दौलत भी असरार हो! सदमा घर से छार हो! सुखी तेरा परिवार हो! अपना रुतवा आप कर! जीवन में मत पाप कर! रब की दिल तासीर हो! कदमों में जाग़ीर हो! मोक्ष तुझे मिल जायेगा! सदाँ अमर हो जायेगा! अब तक नीदें सो रहा! अपना आपा खो रहा! जग से मती रिझाई कर! पूरणँ राम कमाई कर! मदिरा सेवन नाँ करो! माँसा भक्षण नाँ करो! जिवह जीव को नाँ करो! गमन रकाशा नाँ करो! सभी पाप के लक्षण हैैं! ज्योति निरंजन भक्षण हैं! शास्त्र नुकूल भक्ति को कर! पूरणँ प्राप्त मुक्ति को कर! दुनियाँ रह कर नाम कर! ख़ुद को मत बदनाम कर! सबक़ भक्ति से सीख रे! दौलत पर मत रीझ रे! बिरला जग में होइ ले! भक्ति बोझ को ढोइ ले! लावै मत दिल सुस्ती रे! मिल जायेगी मुक्ती रे! सच्चे दिल अरमान कर! सब पर तू ऐहसान कर! सुखी तेरा परिवार हो! सत्य लोक ...