नज़र का इशारा
नज़र का इशारा Author Gopalsingh Mo,6398347628 एक इशारा एक नज़र|| बना लिया है दिल ने घर|| याद तेरी अब आ गई|| दिल को भी तड़फ़ा गई|| पड़ा हुआ था हिज्र में|| गया समै इस फ़िक्र में|| इश्क तशब्बुर छा रहा|| गीत कोई अब गा रहा|| बैठी शिमट शबाब में|| लगती हूर हिजाब में|| इश्क बक़ार हिक़ायत में|| होइ ज़िहाद शिक़ायत में॥ अब तो एक फ़कीर हूँ|| इश्क़ ख़ुमार नज़ीरहूँ|| सहा बहुत अपमान है|| फिर भी दिल ऐहसान है|| देखे तुझको होइ बशर|| पूरी करनी कर क़शर|| प्यार पाना बाकी सब कुछ पा लिया पाना प्यार बाकी है|| तशल्ली के लिए तेरा इज़हार बाकी है|| सजा नुमाइश मत कर ज़िंदगी में यार|| तू ही तो मेरे दिल का दिलदार शाकी है|| बन जायेगा अफ़साना दिल ख़ौफ़ कर|| इंसाफ़ को अल्लाह का दरवार बाकी है|| पा लिया मोरब्बत को जवानी के दौर में|| लुभाने को दिल अभी फ़नकार बाकी है|| शाज़ धड़कनों का बजता ख़ुमार के लिए|| मेहफ़िल में तेरी अभी झनकार बाकी है|| निकलते देखा दायरों से माशूम को मैंने|| महल में आने को तेरी दरकार बाकी है|| जी भर गया दुनियाँ की करतूत से मेरा|| तशब्बुर में आने को किरदार बाकी ...