नाता वफ़ाओं से
नाता वफ़ाओं से Writer Gopalsingh Mo,6398347628 मैं दूर हूंँ दुनियाँ की जफ़ाओं से नाता जोड़ता हूँ फ़िर वफ़ाओं से कहने को तो एक अंजान हूँ बेशक़ मन को लहराता हूँ अब हवाओं से? कोई खड़ा है चित्तरशाली पे कोई खड़ा है शजर की डाली पे दोनों तरफ़ से अच्छे हैं वे शख़्स मन को लगा लिया फ़िज़ाओं से? तेरा इश्क़ खींचकर लाता है मुझे तेरा मिलना दिल को भाता है मुझे हैरत होती है मुझे दर्दे ग़म तन्हाई में परेशान हूँ इन आलीशान ग़ुफ़ाओं से? दरो दीवार सब मेरे रक़ीब बन गये नाँ फ़रमान हयाते नसीब बन गये जब कोई नहीं दिखता है अपना मुझे सिर मारता हूँ सज़र की लताओं से? ग़ुमराह मत हो जानेमन मेरे लिए पैदा किया हूँ मख़्लूक़ ने तेरे लिए मिलेंगे क़यामत एक बार आकर कभी मशरूफ़ हूँ तेरी मेहकती शदाओं से? इश्क़ वालों का हाल बेहाल होता है पहले ख़ुशी बाद में मलाल होता है ग़लती कर बैठता है दिल बेवशी में रूहे शाद भी है शिद्दत की कलाओं से? दीपक बुझ गया हमेश के लिए खड़ी है क़यामत इस कलेश के लिए बे सहारा हो गया बदस्तू ज़माने में अब तश्क़ीन मिलती है रब की रजाओं से? तुझको चाहा था जीवन में अपने मेहज़ ते...