दिल से याद
आई दिल से याद (2)
निहारें शाँझ सकारे|
भटकते मारे,मारे|
1,तुझसे मेरा इश्क़
जिगर से करता था|
छोड़ जहाँ करतूत
याद में मरता था|
हर दम तेरा ख़्याल (2)
बहें अश्कों के धारे|
भटकते मारे, मारे|
2, फ़िज़ा शिस्कियाँ कैद
तरन्नुम गाता था|
चेहरा था दिल बीच
याद वो आता था|
रह गए हैं मन मार (2)
बला ये सिर पे डारे|
भटकते मारे, मारे|
3,आतिश ऐसी बिरह
निगाहें सहती हैं|
रहे सुखी तू सदाँ
दुआएँ कहती हैं|
होइ ज़िन्दग़ी ख़्वार (2)
बिना अब यार तुम्हारे|
भटकते मारे,मारे|
4,भर,भर हिलकी आइ
याद में मर जाऊँ|
ख़ातिर तेरे जहाँ
नाम को कर जाऊँ|
होइ अमर भी प्यार (2)
ख़ुदा जन्नत के द्वारे|
भटकते मारे,मारे|
आजाओ महबूब (2)
सताए याद तुम्हारी|
घड़ी भर नहीं क़रारी|
1,जीवन होइ मुहाल
दिले नाँ शाद है|
सूझै कुछ भी नहीं
सभी बरबाद है|
दिले अधूरा प्यार (2)
ज़ैहन में यही विचारी|
घड़ी भर नहीं क़रारी|
2,देखन चेहरा चाँद
राह में जाते थे|
फ़जरे शाम निहार
नज़र नहीं आते थे|
नैया थी मजधार (2)
किनारा नहीं अगारी|
घड़ी भर नहीं क़रारी|
3,सदमा दिल को लगा
तेरे तब जाने से|
रही नदामत सदाँ
तेरे नहीं आने से|
नहीं दिले इख़्तियार (2)
नज़रिया वहीं पसारी|
घड़ी भर नहीं क़रारी|
4,इश्क वफ़ा ये दैन
क़ुदरती साथ जगी|
इतना सब कुछ किए
निराशा हाथ लगी|
निकला तू बदकार (2)
दरिन्दा कभी अनारी|
घड़ी भर नहीं क़रारी|
मेरे दिल पे हमेशा तेरा
नाम है|(2)
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|(2)
1,तेरे चेहरे उल्फ़त मुझे
हो गई|(2)
मेरी निदिया नँ जाने
कहाँ खो गई|(2)
दिख़ता तुझी में मुझे
राम है|
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|
2,जिनड़ी ख़यालों में
कटती रहे|(2)
दिल की दुआ तुझको
लगती रहे|(2)
ये ही मोहब्बत का
पैग़ाम है|
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|
3,तुझसे तो नफ़रत
सदाँ हो गई|(2)
मेहफ़िल नुमाइश
जबाँ हो गई|(2)
गुज़री जो बातें
ऐहतराम है|
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|
4,मुनब्बर भी यादों को
हमने किया|(2)
लहदे वफ़ा का शकूने
किया|(2)
चरचा जहाँ में सरे
आम है|
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|
5,तुझसे तो हमको ग़िला
ही नहीं|(2)
कहके मुकरता मिला
ही नहीं|(2)
मैं पीता रहा हूँ ग़मे
जाम है|
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|
6,दामन छुड़ा करके न्यारा
हुआ|(2)
तेरा मुकद्दर तो प्यारा
हुआ|(2)
तेरे ख़ातिर ये दुनियाँ में
बदनाम है|
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|
7,मेरी मैयत पे करना ज़रा तू
सफ़र|(2)
बरशा है मुझ पे ख़ुदा का
क़हर (2)
पी लेना ग़म का हँसी
जाम है|
जलती रहे लौ फ़जर
शाम है|
किया फ़ल्सफा यार|(2)
हुई है दिल को शेरी|
लगी है प्रीत घनेरी|
1,बना मैं तावेदार तेरे
उन वादों का|
ज़हन बन गया दरपन भी
फ़रि यादों का|
रहा नँ मुझसे जाइ(2)
राह में जाकर टेरी|
हुई है दिल को शेरी|
2, हुस्न तसब्बुर दिल पे
मेरे छा गया|
जैसे कोई ज़िन्दग़ी में
आ गया|
रह,रह के याद सताइ(2)
नज़रिया मुझसे फ़ेरी|
हुई है दिल को शेरी|
3, दिल के मेरे मीत
कहाँ तू छोड़ गया|
देकर बिरह जुदाई
नाता तोड़ गया|
रहा कामदेव तरसाइ(2)
करूँ गलियों की फ़ेरी|
हुई है दिल को शेरी|
4,दिले फ़रिश्ता एक
तू ही रिज़वान है|
यादों का तू एक हँसी
मेहमान है|
दीपक लौ जल जाइ(2)
कैफ़ियत ऐसी तेरी|
हुई है दिल को शेरी|
मेरी तेरी ये मोहब्बत
दुनियाँ में छा रही है|
मौसम की ये फ़िज़ा भी
अब सुर में गा रही है|
1,दीदार तेरा दिलवर
किशमत में भी नहीं है|
तेरा नाम हर दुआ में
कण,कण में भी कहीं है|
दिल है ये ग़म का मारा (2)
तेरी याद आ रही है|
मौसम की ये फ़िज़ा भी
अब सुर में गा रही है|
2,यादों का तेरी मातम
तब राह मैं निहारूँ|
मजधार के किनारे
हाए तुझको मैं पुकारूँ|
मेरी शोक व्यस्त रूहे (2)
तन क़हर ढा रही है
मौसम की ये फ़िज़ा भी
अब गीत गा रही है|
3,चरचा ये तेरा दिलवर
दुनियाँ में हो रहा है|
मेरा है प्यार सच्चा
हर कोई रो रहा है|
मिलने को तुझसे मेरे(2)
दिल प्रीत छा रही है|
मौसम की ये फ़िज़ा भी
अब सुर में गा रही है|
4,डूबा रहा हूँ दिलवर
मज़धार के मैं घेरा|
अब प्राण जा रहे हैं
ले,ले के नाम तेरा|
मेरे इश्क की जहाँ में (2)
सौग़ात आ रही है|
मौसम की ये फ़िज़ा भी
अब सुर में गा रही है|
रुख़्शत हुए मेरा दिल
ले गये|(2)
हमको जुदाई का ग़म
दे गये|
1,उल्फ़त जहाँ में भी
तुमसे हुई|(2)
जीवन के दौरे मुनासिब
हुई|(2)
कैसा ये ग़म का सिला
दे गये|
हमको जुदाई का ग़म
दे गये|
2,मजबूर था मैं
ज़ियादा मगर|(2)
कर भी नहीं पा रहा
था शबर|(2)
तन्हाई का ये हशर
दे गये|
हमको जुदाई का ग़म
गये|
3,बतलादो इतना
कहाँ हो सनम |(2)
तड़फूँ मैं कब तक
नहीं दम में दम(2)
आने का वादा तो
करके गये|
हमको जुदाई का ग़म
दे गये|
4,हुश्नो शबाबे
रूलाता रहा(2)
तन्हाई के गीत
गाता रहा|(2)
ग़म था जुदाई का
मरते गये|
हमको जुदाई का ग़म
दे गये|
5,इतना बतादो कि
कब आओगे|(2)
ख़ुशियाँ मोहब्बत की
कब लाओगे|(2)
हमको अकेला क्यों
करके गये|
हमको जुदाई का ग़म
दे गये|
6, यादों को तुमने
भुला ही दिया|(2)
मेरी मोहब्बत रूला ही
दिया|(2)
दिल से क्यूँ ऐसे
उतर के गये|
हमको जुदाई का ग़म
दे गये|
7, हिज़रे शरीक़े थी
मेरी दुआ|(2)
मेहरूम दुनियाँ थी
तू ही ख़ुदा|(2)
जीवन में आँसू
क्यों भरके गये|
हमको जुदाई का ग़म
दे गये|
8,दिल की ये ख़्वाहिश
नँ पूरी हुई|(2)
सपनों की दुनियाँ अधूरी
हुई|
दिन रात अरमान
करते गये|
हमको जुदाई का ग़म
दे गये!
नजर का जाम पिला दिया तुमने!
मुरझाया फूल भी खिला दिया तुमने!
सोचा नहीं था अक्सर भी कभी ख्वाब में!
मोहब्बत में भी ऐसा गिला दिया तुमने!
बे वफाई को आपकी समझा है हमने कयामत!2
दिया है लकब तकदीर ने बेहतर दिल से भुला दिया तुमने!
ग़मे दिल की गुंजार अभी तक धीमी पड़ी सबसे!2
हँसने के बजाय एजाज़ जीवन भर हमें रूला दिया तुमने!
सलाखें ग़मों की टूटी नहीं अभी दिल के दायरे में!2
किया है अदब फिर भी जैसे मोहब्बत में ठुकरा दिया तुमने!
पी गया मै खाना मुकद्दर समझके आपको जमालुम!2
ऐसा लगता है शुरुरे मोहब्बत का आसमान हिला दिया तुमने!
सितारों की दुनियाँ में रहकर सितारे अच्छे नहीं लगते!2
बे खुदी में मोहब्बत के बजाय नफरत से मिला दया तुमने!
खलिस यही मेहज हमको और खलिस बाकी नहीं!2
सहके खुद नेमत बफाई की ग़मों से हमें मिला दिया तुमने!
कैसी उल्फत कैसी नफ़रत झूठ दुनियाँ की सखावत!2
हिजर में जोगी हूँ आपके दर से बदर भटका दिया तुमने!
दुनियाँ के दस्तूर से दिल का दस्तूर कीमती होता है!2
नँ समझकर कयादत को मेरी बदनाम भी करा दिया तुमने!
वस्ले लिए तमन्ना कब से तड़फ रहा हूँ!
करदे मुराद पूरी दिल से बहक रहा हूँ!
तूफ़ान का नहीं ग़म हम हो गये तुम्हारे!
जो भी तुम्हारी हशरत वो है लिए हमारे!
कलियाँ खिलैं हमेशा हरदम ये कह रहा हूँ!
करदे मुराद पूरी दिल से बहक रहा हूँ!
तेरी मेरी ये मोहब्बत कायम सदाँ रहेगी!
मर जायेंगे अगर भी रुहे यही कहेगी!
मिलती रहे यूँ नेमत सदमा मैं सह रहा हूँ!
करदे मुराद पूरी दिल से बहक रहा हूँ!
अब याद ही तुम्हारी मेरे लिए है काफी!
जो भी ख़ता हुई हो दे देना मुझको माँफी!
ग़म को गवारा करके गलियों में फिर रहा हूँ!
करदे मुराद पूरी दिल से बहक रहा हूँ!
तेरे नाम का ये चरचा दुनियाँ में हो रहा है!
कारण जरा बतादे गफ़लत में सो रहा है!
पीकर मैं घूँट ग़म का गर्दिश में रह रहा हूँ!
करदे मुराद पूरी दिल से बहक रहा हूँँ!
दिल का ख़्वाब अधूरा है!
हर अरमान अधूरा है!
जी नहीं सकेंगे आपके बिना हम!
मरने को अभी समय अधूरा है!
हर अरमान अधूरा है!
निहायत बेताबी एक सबक़ बन गयी!
आने को हयात में ग़ुलफ़ाम अधूरा है!
हर अरमान अधूरा है!
रंग आया नहीं दोस्ती में तेरा दिलवर!
इन्तिहान के लिए सरवराह अधूरा है!
हर अरमान अधूरा है!
तक़दीर नँ जाने कब करवट बदल जाए!
इक़रार वफ़ा के लिए नग़मात अधूरा है!
हर अरमान अधूरा है!

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