तन्हाई के आँशू (tears of loneliness)


तन्हाई के आंशू!

Writer

Gopalsingh

Mo,6398347628

1.तन्हाई के आँशू  पी कर रह गए ||

रुष्वाई में हम जी कर रह गए||

उतर चुका था दिल में कोई कब से||

लिहाज़ा अक्शर सादग़ी कर रह गए||

2. ठोकरें खाकर ज़माने की हाथ मल कर बैठे हैं,

तुम्हारी तरफ़ से हमेशाँ सिर क़त कर बैठे हैं||

अब दोनों का इन्साफ़ अल्लाह के हाथ में है,

महज़ इसी बात को दिल से कह कर बैठे हैं||

3. हिज़र की घडी़ थी,

अश्कों की झड़ी थी||

चला गया दूर कोई मुझसे,

ज़िन्दग़ी सूनी पड़ी थी||

4. तू नँ सही तेरी याद ही सही,

ज़िन्दगी मेरी बर बाद ही सही||

उम्र भर ख़ैरियत रहे यूँ हीं यार,

तेरे लिए मेरी फ़रियाद ही सही||

5. चलता रह तू राह पर मंज़िल मिलेगी एक दिन,

ग़ुम राह मत होना ज़िंदगी कदम चूमेगी एक दिन||

करले दीदार मोहब्बत का दिल ख़ोल कर यार,

अल्लाह के दरवार में ज़न्नत मिलेगी एक दिन||

6. दिल के तशब्बुर में आ गया कोई,

बातें कर चार मन को भा गया कोई||

तफ़रीक अपनी दे गया तड़फने को,

ऐसा साथ में सुलूक कर गया कोई||

7. तेरी दोस्ती रंँग नहीं लाई दिलवर,

जबसे तू गया घटा ग़म की छाई दिलवर||

पी गया आँसू हुस्न की क़ैद में फ़ँसकर,

मैंने दोस्ती साथ ख़ूब ही निभाई दिलवर||

8. जवाँ रहेगा प्यार हमारा,

तेरा ग़र मिल जाये सहारा||

आजा पास मेरे ऐ हम दम,

सदाँ रहे इख़्तियार तुम्हारा||

9. करता तुझसे प्यार मैं है दिल की अरजी,

अपना ले या ठुकरा दे है तेरी मरजी||

नहीं मोहब्बत गर है मुझसे फ़रमा दे ओ बे ख़बर,

वचन ग़वारा होइगा कर मत ऐ ख़ुद गरजी||

10. करवाता नहीं ऐहसान करता हूँ तुझ पर,

दिल के वजाय जान भी छिड़कता हूँ तुझ पर||

सितम सह कर भी दिल से  ऐसान फ़रामोश हूँ,

ठुकरा के ज़माने को भी मरता हूँ तुझ पर||

दुनियां से ग़ुम नाम

  दुनियां से ग़ुम नाम हूं

बेशक़ मैं बद नाम हूँ!


नहीं ख़ौफ़ इस बात का!

आवै वक़्त निज़ात का!


ग़म ने मुझको मारा है!

सिर पर चले दुधारा है!


जीता हूँ नाँ मरता हूँ!

नहीं मौत से डरता हूँ!


दिल तेरी दरक़ार में!

पड़ी नाव पतवार में!


यादों में दिल डूबा है!

कहाँ मेरी मेहबूबा है!


संगे मर मर रुख तेरा!

आया दिल तुझ पर मेरा!


किया नँ मुझ पे ग़ौर था!

सोचा दिल में और था!


पड़ी ग़ैर की बाहों में!

नाम तेरा इन आहों में!


फ़ूल शबनम करैं दुआ!

खुशियाँ घर में मिलैं ख़ुबा!

उल्फत की आंधी

उल्फ़त की आंधी  चलती रहे!

हमको ख़ुशी यूूँ मिलती रहे!


तोड़ा है मेरे दिल का भरम!

देकर दिलाशा चला है सनम!


इश्क़े वफ़ाओं में ली है कसम!

झूँठे इरादे  जुदा है सनम!


वस्ले इरादा जो दिल में रहा!

अवामे क़वायत हमने सहा!


शादी तेरी जब रुकने लगी!

किशमत मेरी यूँ  झुकने लगी!


 माँथे का झूमर चमकने लगा!

हाथ में कंगन दमकने लगा!


कानों में झुमके सजाए रही!

मेहँदी भी हाथों रचाए रही!


साड़ी जो पहनी शरीरे नरम!

सर्दी का मौसम जवानी गरम!


डोली में बैठी तू बनके दुल्हन!

तुझको दुआएँ आखें हैं नम!


जोवन हिलोरें भी उठने लगीं!

कलियाँ दामन में खिलने लगीं!


मेरा दिल तब बेहकने लगा!

 परिन्दा शजर पे चेहकने लगा!


तेरा घर जब मेहकने लगा!

मेरा दिल तब देहकने लगा!


क़ुर्वत में आने को जी चाहता!

गले से लिपटने को जी चाहता!


मोहब्बत शुक़ूने दामन तेरे!

चश्मे घटाएँ हैं पावन मेरे!


जामे जवानी पिला ही दिया!

हमको ग़मों से मिला ही दिया!


मेरी जवानी ढल ही गई!

दुनियाँ में उसकी कहानी गई!


अपनी हदों से गुज़र ही गये!

दिल में किसी के उतर ही गये!


देखा जो उसको सँवर ही गये!

उल्फ़त में उसकी मर ही गये!

नज़र का तीर

मिली नज़र इक बार है!

तीर जिगर के पार है!


भटकत हूँ मैं गलियों में!

 हलचल होती सखियों में!


फ़िर भी चुप मैं रहता था!

ग़म तोहीने सहता था!


मसरूफ़े दिल हो गया!

चाहत उसकी खो गया!


नहीं नींद है रातों में!

कटे वक्त जज़्बातों में!


उसके महल निहारता!

पल पल उसे सँवारता!


आजाओ अब ओ सनम!

चारों तरफ छा रहा ग़म!


हाथ हाथ से छूट गया!

जीवन डोरा टूट गया!


पत्थर जग ने मारा है!

फ़िर भी तुझे पुकारा है!


आजा दुनियाँ छोड़कर!

क़फ़न प्यार का ओढ़कर!


निकले दिल अरमान जब!

हो पूरणँ फ़रमान तब!


अन्तिम विनय मेरी सुनलो!

दुनियाँ छोड़ मुझे चुनलो!


जीवन फ़ूल ख़िला देना!

मोइ कभी नँ ग़िला देना!


खुशियाँ दामन भर दूँगा!

तू जो कहेगी कर दूँगा!


मेरा दिल आवाद कर!

मती मुझे बरवाद कर!


बादल ग़म के छाए हैं!

अश्क़ आँख में आए हैं!


हो मत तू मुझसे जुदा!

माना तुझको है ख़ुदा!

रुष्वाई की नशीहत

मेरी तरफ़ तू देखना छोड़ दे!

नज़र को मुझसे मिलाना छोड़ दे!


रुश्वा हो जायेगा तू जमाने में यार!

इसलिए इशारों में कुछ कहना छोड़ दे!


इश्क़ अन्जाम बुरा होता है हमेश के लिए!

अपनी हद में रह यार मेरी हद में रहना छोड़ दे!


बना है दुष्मन इश्क़ के लिए ज़माना भी!

अपनी राह पर चल मेरी राह पर चलना छोड़ दे!


हाथ नहीं आऊँगी तेरे ओ अजनवी मैं!

दामन ग़ैर का थाम मेरा दामन थामना छोड़ दे!


कसमें वादे इश्क़ सब झूँठे हैं जहान में!

ग़ैर का हाथ थाम मेरे हाथ को थामना छोड़ दे!


अब जानले कि नसीहत को मेरी सितम्ग़र!

हँसेगा ज़माना भी हर रोज़ तू मिलना छोड़ दे!


हर मोड़ पर है उल्फ़त की जलन दिल में!

इख्तियार करके दिल पे वजूद को मिटाना छोड़ दे!

मेहबूब की मेहन्दी

मेहबूब की मेहन्दी हाथ में रचने लगी!

ज़िन्दग़ी भी उसके नाम मैं करने लगी!

दिल में कोई क़िनायत है उसके लिए!

इरादत की घन्टी अपने आप बजने लगी!


 नहीं आयेगा जब तक प्यास नहीं बुझेगी!

रो रोकर प्यारी तेरी यूँ हीं सिर को धुनेगी!

गिरा दिया है ऊपर क़ुदरत ने सितम ऐसा!

शुक़ून के लिए रातों को तारे मैं गिनने लगी!


ख़याल में उसके आंख  भर आई है मेरी!

 रात दिन तन्हा जान पे बन आई है मेरी!

तसब्बुर सूना है सनम के बिन अब तो मेरा!

नेस्तनाबूद जिन्दगी हाल बेहाल मैं रहने लगी!


बिता दिये दिन शाक़ी तेरे इन्तज़ार में हमने!

धूल हो गये सब अरमान रहे हैं अधूरे सपने!

नाँ शाद है दिल उल्फ़त के हँशी जाम से अब!

 तेरा इज़हार नँ होगा इसी शबव से मैं डरने लगी!


फ़िराक़  में उसकी मसरूफ़ दिल अब तो!

मेरी ख़ुशी तेरे गम में शामिल है अब तो!

सह लूँगी मैं हर दर्द को रुष्वाई में हमदम!

ज़हर को खाकर याद में उसकी मैं मरने लगी!

हथेली पे तेरा नाम

मूरत मेरे हमदम की जिगर में रहने लगी!

आँशू की धारा आँखों से हर रोज बहने लगी!

नाम हथेली पर लिख करके तेरा मिटाते रहे!

मेरी निगाहों में तू बनके करार यूँ हीं बसने लगी!


छीन लिया है क़ुदरत ने अब मेरे नसीब को!

मारा है दुनियाँ वालों ने ख़ूब इस ग़रीब को!

इश्क़ के ज़िहाद में उम्र भी ढल गई है मेरी!

शुक़ून की एवज में नफ़रत की हवा चलने लगी!


दर बदर सबकी निगाहों में खटकने लगा मैं!

बेज़ार हो करके इधर-उधर भटकने लगा मैं!

तरस नहीं आया किसी को मेरी दीवानग़ी पर!

याद करके सनम दिल से छाती मेरी फटने लगी!


सह लिए सितम हमने सहने को बाकी नहीं रहा!

 भला कहे बुरा कहे कोई किसी से कुछ नहीं कहा!

इश्क़ का इन्तिहाँन बाकी है खुश नशीब तेरे लिए!

आखरी स्वाँस में रूह मेरी तेरा नाम जपने लगी!


अब तक मैं जीता रहा सनम तेरी ही आस में!

जा रहा हूँ छोड़के सब कुछ अल्लाह की आस में!

शरीक होके मेरी मैयत पे दिल से दुआ दे दे मुझे!

सातों जनम फिर मिले तू यही चाहत उभरने लगी!

क़यामत का दौर

दौर क़यामत छा गया!

दिल में कोई आ गया!

मौज परिन्दा मारता!

अक़्स तेरा गुन्जारता!

जो भी अब ख़त लिखे!

तन्हाई जीवन दिखे!

देखा हुस्न तेरा जब से!

राबी हुआ सनम तब से!

नज़रों में दिल खो गया!

तेरा जब से हो गया!

अपनाना दिल चाहता!

निस दिन तुझको ताकता!

दिले समाजा ओ सजनी!

चारों तरफ झुकी रजनी!

काजल नैंन घटा काली!

होठों ख़ूब लगी लाली!

हरी हरी चुरी कलाई में!

आय बहार सगाई में!

धूम धाम बारात हो!

मेरे दिल आघात हो!

देखत ही मैं रह गया!

सितम ज़िन्दगी सह गया!

ख़ामोशी भी पल पल है!

ग़मे ज़िन्दगी हर पल है!

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