राम तिलावत
राम तिलावत Writer Gopalsingh Mo,6398347628 समझूॅं मैं हर जाति समाना नहीं जिग़र का लुटे ख़जाना! पावन फिज़ा जगत लहराई पूरण गुरु तक़नीक सुहाई! वही जुलाहे जाति क़बीरा लिखा नाम क़ुरआन ख़बीरा! मानव ज्ञान समझ नहीं पाए दाश कबीर जगत फ़रमाए! जाति वाद तक़रार मिटाए मानवता की राह दिखाए! नाम अता उपदेश कराए जम के फ़न्द सभी छुड़वाए! छड़ी हाथ ले ग़ज़ल उभरती सूरत मेरे जिगर उतरती! भक्ति हीन मूरख मैं रोगी आज मोहब्बत तुमसे होगी! राम तिलावत दिल से दिल में हो दीदार मुझे इक पल में! पूरण ख़लिश दिले मिट जाए सजनी रूह तुम्हें अपनाए! ज़िल्लत जगत ग़वारा मुझको मेरा सत साहिब है तुमको! तीन लोक में जिनकी चाहत राम नाम की करें ज़ियारत! सतगुरु अगर सीख नर पावै जन्म हमेश मरण मिट जावै! जगत छोड़ हरि शरण गही है दिले भक्ति की धार बही है! अमर पुरुष महबूब हमारा नहीं जिग़र को ग़ैर ग़वारा! ज्योति निरंजन ग़र भरमावै सत्य क़बीर नाम फ़रमावै! जगत फ़साद सभी मिट जावै नेमत तू जीवन भर पावै! सुख के सागर दास कबीरा पल भर में मिट जाए पीरा! जिन पे हूॅं आषक्त जिगर से नहीं ख़ौफ...