SHYAHPOSH-PART - 1


Shyah posh -part-1

                                                   This is a true story of room country......                                      

  (ईश्वर को

(आत्म समर्पणँ)

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करुँ बंदग़ी ऐ ख़ुदा करो इनायत मोइ!

शजदे में सिर झुक रहा लुटा दिया सब तोइ!


दोहा, अपनी तरफ से =

इश्क़ दासताँ रूम  की सबके दिल को लुभाता हूँ!

पाक़ मोहब्बत श्याह पोश मैं जनता तक पहुँचाता हूँ!


दोहा 

मुल्क़ रूम का तख़्तनसी महमूद बादशाह था जिसके गुरू ने उसको जादुई सुरमा दिया,जिसे आँख में लगाकर ,अदृश्य हो सकता था।इन्साफ़ की वास्तविकता बनी !

तख़्तनसी महमूद था,गुरू देव लुक़मान।

जादू सुरमा दे दिया बनी न्याय पहचान।।


दोहा 

निज वतन हिरात से आकर रूम वतन में

बसना गबरू माता-पिता सहित ?

 करन चला व्यापार को संग पिता और मात ||

मुल्क़ रूम में आ बसा जिसका वतन हिरात।।


दोहा 

जैबुन्निसा के साथ गबरू का निकाह हो जाना =

तिरिया थी जै बुन्निसा देखन में अति हूर।

चरितवान गुणवान थी योवन में भरपूर।।

दुख़्तर के नाम

जमाल उर्फ़ माहेमुनीर

1=बजीर की दुख़्त जमाल रात में

महल पर क़ुरान पढ़ना? 

शाह बजीर जमाल दुख़्तरे फ़ितरत की अच्छी|

बानो दिले निहायत शाक़िर शरियत की सच्ची|

लिया अपनाय शराफ़त को|

माहे मुनीर महल पर पढ़ती क़ुरान आयत को|

क़रिश्मा क़ुदरत दिखलावै

उसी वक्त क़ुरआन हरफ़ तक़सीर होइ जावै।।


2 =ग़ुज़रना गबरू उसी वक्त 

महल के रास्ते फ़रमाना जमाल से?

गली से गबरू जब गुजरा।

सुनकर हरफ़ ग़लत को तबहीं उसी जगह रुकता।

दियौ है बयान फ़रमाई।

गलत न पढ़ो क़ुरान सही हम दीयें बतलाई।।

लगी है ठेस मेरे दिल पर।

आ जाऊँ नज़दीक इनायत करो अगर मुझ पर!


3 =बयान करना जमाल   गबरू से?

यार मत महलन में आना।

जान हादशा होइ यहाँ से तुरत चले जाना।।

ख़बर ग़र वालिद सुन पावै । 

मुझको दे मरवाइ दार पर तुझको चढ़वावै ।।

प्रेम के फ़न्द कोई आता।

शख़्त मौत की सज़ा यहाँ से वापस  नहीं जाता।।


4 =गबरू जमाल से सच्चाई जाहिर करना ?

नहीं ग़म मरने का मोई।

होनी होकर रहे करे चाहे लाख जतन कोई।।

तुम्हारे क़रीब आयेंगे।

दिले मोहब्बत पाक़ तुम्हें  हम कुरांँ पढ़ायेंगे।।

तलब दिलजान तुम्हारी है।

मज़हब जान निशार यही फ़रियाद हमारी है!


5 =जमाल  गबरू से फ़रमाना ?

 महल में आना है तुमको।

मिले रोज दीदार धीर दिल तभी बँधे हमको।।

महल की खिड़की से आना

पहरा है चहुँओर  अजनवी  पकड़े मत जाना।।

मिली तशक़ीन देख तुमको 

देओ पता फ़रमाइ आपना राहग़ीर हमको ।।


6 =गबरू जमाल को निज परिचय देना?

पिदर हैं नजफ़ अली  मेरे।

गबरू है निज नाम वतन में दाखिल हैं तेरे।।

जिगर में  बात एक अटकी !

आऊँ कैसे पास महल की ऊँची है खिड़की¡

करो दिल जान कदर दानी। 

देना डाल कमन्द तुम्हारी होइ मेहर वानी।।


7 =जमाल  गबरू को निज परिचय देना?

यार सुन परिचय अब मेरा।

नाम जमाल बजीर पिदर है हसन अली मेरा।।

नज़र से जाम छलकता है!

करने को इज़हार दिले अरमान मचलता है!

नैंन से नीर बहाऊँगी।

बिना तुम्हारे यार तड़फ़ कर  मैं मरजाऊँगी।।


8=जमाल महल से कमन्द डालना  गबरू,

  महल पर चढ़ना  क़ुरान समझाना?

सब्र कर दुख़्त क़मद  डारी।

चढ़ता गबरू महल पहुँच नज़दीक तुरत प्यारी।।

अदब दिल रब का फ़रमाया ||

सही तरह कुरआन सिपारा उसको समझाया । 

मुझे अब निज घर जाना है ।

कुराँ पढ़ावन तुम्हें महल कल वापस आना है ।।


9 =जमाल फ़रमाना गबरू से जुदा होने पर?

तोड़कर जाओ मत दिल को।

फ़ुरकत हमें ग़वारा दिलवर नहीं एक पल को।

बिछुड़ कर जाते हो दिलवर।

मुखड़ा कल दिखलाइ अजनवी आ करके इस घर ।

इनायत इतनी तुम रखना||

दे देना दिल जगह नज़र मेहरूम नहीं करना!


10=दिल में बेताबी गबरू  रात में जाने की तैयारी करना?

सुहाता खान पान ना हीं।

कुराँ पढ़ावन दुख्त गूंँज अरमान यार मा हीं।

गया दिन बीत समय जैसे।

आई रात उमंग जगी दिल मिलने की तैसे।।

अभी नज़दीक मुझे जाना।

सही -सही क़ुरआन सिपारा उसको समझाना  ।।


11 = वालिद नजफ अली निज फ़रजन्द गबरू से फ़रमाना?

छोड़कर निज घर मत जाओ।

वक्त बड़ा दुश्वार पता क्या, कहीं पकड़ जाओ।।

बहुत अब झुक आई रजनी ।

बाहर मत रख कदम तेरे बिन,तन्हा हो सजनी।।

रहम तक़रीर तनिक खाओ 

आ सकती बन जान पुत्र मत बाहर अब जाओ । 


12 =गबरू बात बदल कर फ़रमाना वालिद से?

मुझे ढिग कमरुद्दी जाना ।

हालत है ग़मगीन मदद कर वापस है आना ।।

दोसती  दग़ा नहीं दूँगा  ।

प्यारा निज दिल यार अभी मैं मिलने जाऊँगा  ।।

यही है महज़ अरज़ तुम से 

अब देना आदेश ग़नीमत निभे पिदर हम से।।


13=वालिदा गुलबदन रोकर निज फरजन्द गबरू से फ़रमाना?

मानियो पुत्र कहन मेरी।

महलन तज मत जाइ करै,कुतवाल पकड़ तेरी।।

जरा तो रहम जिगर खाओ।

तड़फ-तड़फ कर मात मरै ,फरजंद अगर जाओ।।

मात पर विपता मत डारी।

सुन मेरी फ़रियाद लाल हूँ तुम पर बलिहारी ।।


14 =गबरू वालिदा गुलबदन से फ़रमाना?

मुझे क्या समझाती माता।

सुन बीमारी यार ,मुझे अब रहा नहीं जाता।।

चाहता जी अब जाऊँ मैं।

देकर उसको दवा तुरत ही वापस आऊँ मैं।।

सबर नहीं आइ मेरे दिल में 

कमरुद्दी निज यार पड़ा है जीवन मुश्किल में । 


15=साहिबा जै बुन्निसा निज सौहर गबरू से फ़रमाना?

मिलन की रात हमारी है!

करो ऐस आराम बदन कीमिटै खुमारी है!

परेशाँ किए डालता है।

अँगड़ाई दिल बीच तरंगें मदन मारता है।

दूसरी कौन बनी प्यारी।

निज तिरिया कर त्याग ,हुए हो जिस पर बलिहारी ।।


16=गबरू निज साहिबा जैबुन्निसा से जाने की हट करना?

साहिबा रोक मती मुझको।

है दिल का अरमान पढ़ाऊँ कुराँ अभी उसको।।

दस्त निज कमद साथ लीयौ!

दुख्‍तर माहे मुनीर महल की तरफ सफर कीयौ!

गयौ है महल तले आई!

दिल में साहस बाँध क़मद तब दीयौ लटकाई!


17=बादशाह दिल में अरमान करना शासन के लिए?

शाह निज दिले विचारा है।

वतन रूम हालात निहारें किया ग़वारा है।

भेष कुतवाल बनाया है।

चलौ करन तफ़्तीश नज़र नहीं कोई आया है।

वहाँ से आगे जब धायौ ।

माहे मुनीर महल तल कोई दृश्य नज़र आयौ।।


18=गबरू  कमन्द फेंकना महल तल पकड़ जाना?

कमद को फैंकत पकड़ लिया!

हाथ हथकड़ी डाल बदन भी सारा जकड़ लिया¡

दिले क्‍या डर नाहीं लगता!

कमद डालकर बाम हिमाक़त चढ़ने की करता!

चोर तू मैंने अब जाना!

जाइ शाह नज़दीक दार पर तुझको चढ़वाना!


19=गबरू  खुदा को पुकार कर

कोतवाल से फ़रमाना

जकड़ जंजीर दरद होता ||

होगा क्या अब ख़ुदा मेरा बेहाल हाल होता । 

स्वर्णं की छाप लीजियो रे।

आज रात की रात सिपाही रिहा कीजियो रे।

जिगर में जरा रहम कीयो ||

हो जाऊंँ कल पेश कचेहरी छोड़ मुझे दीयो । 


20 =कोतवाल गबरू को धमकी देना?

दार का ख़ार फजर होगा।

कहीं से अब तू दिला ,ज़मानत रिहा तुरत होगा।।

जमानत कोई गर करले¡

दूंगा छोड़ रात भर तुझको सही बचन सुनले!

नहीं ये तेरे वश होगा।

बादशाह नज़दीक तुझे अब पेश करन होगा।

21=गबरू निज पिदर के पास जाना

कोतवाल को लेकर ?

महल निज सीध लगाई है!

पढ़ता पिदर नमाज पुत्र फ़रियाद सुनाई है !

मुझे कुतवाल पकड़ लीया !

डाल हथकड़ी दस्त बदन भी सारा कश लीया । 

पड़ा हूँ पिदर शरण तेरी!

दिला ज़मानत कोतवाल से यही कहन मेरी!


22=पिदर नजफअली  कटु बचन फ़रमाना

गबरू से ?

मुसीबत पाइ  हुआ आना।

दई नसीहत जाओ मत,फ़रजंद नहीं माना।।

गौर नहीं किया तनिक दिल में।

पकड़ा जाऊं कहीं होइगा जीवन मुश्किल में।।

जमानत नाहीं कर सकता।

करनी का फल मिलै यही मैं तुझसे कह सकता। 

 

23=गबरू ,कोतवाल सहित निज दोस्त के पास जाना?

लिए कुतवाल  संग धायौ।

जहाँ महल था,कमरुद्दी का वहीं लिए आयौ।।

जरा निज दिल में गम खाई।

करो इनायत यार जान पर मेरी बन आई।

यार निज मुखड़ा मत मोड़ो।

करो रिहायत मोइ ,दोसती दिल से मत तोड़ो।।


24 = साहिबा  (सोते कमरुद्दीन को जगाना?

नींद में ग़ाफ़िल सोइ  रहे ।

गबरु तुम्हरे यार तड़फ़ कर द्वारे रोइ रहे|

साथ कुतवाल द्वार पर है।

प्राण बचाओ सजन मुसीबत पड़ी यार पर है।

यार की ख़ातिर  जग जाओ।

दग़ा दोसती  सौहर मेरे ना हीं दिखलाओ।

25=कमरुद्दीन नींद से जागना और गबरू की रिहाई कर लेना?

नींद से कमरुद्दी जगता ।

सुन तिरिया अल्फ़ाज़ ,लिए शमसीर तभी चलता।।

छोड़ दो यार हमारे को||

छेड़ो गर तकरार काट दूँ शीस तुम्हारे को!

जमानत तुरत कराई है 

लेकर गबरू यार महल निज सीध लगाई है ।। 


 26 = कोतवाल कमरुद्दीन फ़रमाना?

मेहज है कहन यही मेरी !

करना हाज़िर इसे फ़जर को होइ नहीं देरी !

रात की मेहज़ अवारी है ।

लेने इसे  हिरासत पड़ता पल पल भारी है । 

मिलै कल मुज़रिम ग़र नाहीं !

बदले इसके तौक़ होइगी तेरे गल माहीं


27 =कमरुद्दीन गबरू से फ़रमाना?

यार अब महलन में रहना!

किसी बात की दिल में यारा फ़िक़र नहीं करना!

पलँग आराम जाइ कीयो।

भवज करेगी ख़िदमत, संकोच नहीं कीयो।।

दिले निज ना हीं ग़म खावै।

छेडूँगा तक़रार सिपेहसालार फ़ज़र आवै।।


28= गबरू अरमान जमाल के लिए कमरुद्दीन से फ़रमाना ?

करो अरमान दिले  माहीं ।

फ़ज़र मरेंगे दार सुहावै खान पान नाहीं।

रहम अब एक और खाओ।

माहेमुनीर महल तक मुझको यार छोड़ आओ!

पढ़ाना अंतिम आयत को।

एक रात है । महज़ ज़िन्दग़ी करो इनायत को !


29 =जमाल इंतजार करना ,गबरू  के लिये?

बाम से राह देखती है।

आया दिलवर नहीं नज़र चहुँओर फेंकती है।

आश दीदार भड़कती है।

क़ुरान पारे पढ़न दुख़्त बेहाल तड़फती है।

हुआ है,इंतज़ार मुश्क़िल।

सो गई गहरी नींद पलँग,पर पाई नहीं मंज़िल।।


30 क़मन्द लेकर पहुँचना कमरुद्दीन गबरू के लिए महल पर डालना?

सफ़र का किया सामना है।

गबरू कमरुद्दीन महल तल हुआ आमना है।।

तले से महल क़मद डारौ।

चढ़ जाओ निज यार कराना अंतिम सीपारौ।।

नाम नहीं मेरा बतलाना। 

दिल का हाल तुम्हारा जो भी जाकर फ़रमाना।।


31=बादशाह निज चश्म  सुरमा लगा लेना,ग़ायब होकर क़मन्द पर चढ़ना?

तभी अरमान मिटै  दिल का।

कहा माज़रा होइ हाल में देखूँगा इसका।।

चश्म निज डाला सुरमा है।

हो करके अदृश्य बाम तल गया शहंशा है।।

क़मद पर शाह तभी चढ़ते !

गबरू सहित जमाल मकाम प्रवेश तभी करते । 


32=गबरू, जमाल की ओर आँशू  भरी आँखों से देखना?

सामने खड़ा तभी दिलवर।

सोती निरख जमाल लगी है,आहट सी दिल पर ।।

सदाक़त मजहब से मुझको।

होइ फ़ना ईमान जगाऊँ कैसे मैं तुझको।।

अश्क़ की बूँद जिगर पड़ती।

उड़ गई नींद जमाल बिलख़ता गबरू को लखती।।


33 =जमाल गबरू से निज हाल फ़रमाना?

ज़ियादा देर लगाइ लई ।

करत प्रतीक्षा रही नींद की झपकी आइ गई  !

तड़फ़ बेहाल ग़मे खाकर।

कहाँ थे अब तक  यार सब्र दिल मिला तुम्हें  पाकर।।

चश्म नम छाइ पशेमानी!

ग़मे हाल बतलाइ बनी है कौन परेशानी!


34 = गबरू जमाल से निज हालात फ़रमाना?

मिला दीदार तुम्हारा है।

जल्द निकाल क़ुरान पढ़ाऊँ अंत सिपारा है।

नहीं कल यार संग होगा।

जाऊंँगा मैं ,अदम दार का खा़र तख़्त होगा।।

पढ़ाने आता मैं तुझको।

क़ैद किया कुतवाल,बोल दी सज़ा दार मुझको।।

अभी जारी है,part,(2)


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