परियों की रानी

परियों की रानी

Writer

Gopal Singh

Mo,6398347628

ख़्वाहिश मिलन जिगर में छाई!

रब का अदब दिया फ़रमाई!


गहरा ज़ख़्म दिले वीरानी!

कहां गई परियों की रानी!


डूब मोहब्बत दिल ग़हराई!

फिर भी हाथ लगी रुष्वाई!


रूठ मोहब्बत गई हमारी!

नहीं मिलन है जिगर क़रारी!


तुम्हें पुकारूं यार जिगर से!

करो रिहायत मुझे फ़िक़र से!


दिले क़िनायत छुपी हुई है!

शांस आख़री रुकी हुई है!


जपे नाम हर शांस हमारी!

दिखला दे दीदार पियारी!


जन्नत सफ़र तभी कर पाऊं!

तुझको देख जिगर हरषाऊं!


तेरी बिरह प्राण छुट जाए!

बैठा ख़ुदा फ़लक़ मुस्क़ाए!


इश्क़ इज़ार शबाव झलकता!

हिज़रत में दिन रात तड़पता!


समझाया दिल नहीं समझता!

जैसे शब मेहताब निकलता!


रहे जगत तहसीन फ़साना

 इश्क़ मोहब्बत ये नज़राना!


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