गबरू उर्फ़ जमाल
मात शारदे बन्दना, चरणों शीस नवाइ!
रखियो लाज गरीब की, नज़र जीद फ़रमाइ!
मुझे दुआएँ दीजियो, दानिस्ता फ़रज़न्द!
भक्ति डगर पे आ गया, बिसराके हर फ़न्द!
तेरा दिल में वाश है, संकट मोचन मात!
पापी हूँ मैं जन्म का, पतीत पावन आप!
करो जीद मातेश्वरी, नय्या लहर समाइ!
नहीं दूसरा और है, तेरी आश लगाइ!
अष्ट भुजंगी शेर पे, हाथों में हथियार!
दुश्मन पल में मारके, बन्दे दिये उबार!
इष्ट मात जगदम्बिका, मुझ पे कर उपकार!
अब तेरा मैं हो चुका, बजे जिगर झनकार!
अरजी सुनले भक्त की, सिंघ वाहिनी मात!
दिखला दे दीदार अब, व्याकुल है ये तात!
मातेश्वरी जुवान पे, मिलता दिल सन्तोश!
सच्चा तेरा भक्त हूँ, क्षमा कीजियो दोश!
जब से हुआ मुरीद मैं, मन में जलती ज्योति!
जग बैरी लगने लगा, ख़ुशी घनेरी होति!
माता के दीदार बिन, दिल को नहीं क़रार!
बेताबी दिन रैन की, आवै नहीं बहार!
झोली भरदे भक्त की, नय्या है मजधार!
जगत नेस्तनाबूद है, अब तेरी दरक़ार!
माता मेरी मदद कीजियो,कविता मेरी सफल कीजियो!
आज इनायत मुझ पे कर दो,दामन सूना नेमत भर दो!
आ कर दर पे दास खड़ा है,मन मन्दिर वीरान पड़ा है!
जीवन झन्झट आता जाता,तुम बिन नहीं सहारा माता!
भीख़ दरस की मात दीजिये,मुझ पे इतना रहम कीजिये!
मीसम दरस मुझे दिखलादे,दिल की हशरत पूर्णं करादे!
जीवन सफल तभी हो मेरा,आ कर करो जिगर में डेरा!
जगत फ़साद मुक़म्मल हारा,तुमहीं माता बनो सहारा!
दुष्मन अब संसार बसेरा,पहलू चरणँ नुमाइश डेरा!
माता हिजर क़रार नहीं है,मेरे जिगर बहार नहीं है!
माता लक्छणँ जिगर समाते,ग़ुरवत है फ़रहान हयाते!
संकट सब आते हैं जाते,पल भर में सबहीं टल जाते!
आ जाओ मत करो अबारी,मात मुहाफ़िज बनो हमारी!
ग़लती होइ माज़िरत कीजे,मुझको निज सेवक चुन लीजे!
जय जय जय जय मात भवानी,तेरा मैं गुणगान बखानी!
करो मुख़्तलिफ़ कष्ट हमारे,तुमको माता दाश पुकारे!
मात इनायत जिस पे होगी,भाग्य बुलन्द हमेश निरोगी!
सुखी बदस्तू रहे ज़िन्दग़ी,अगर मात की करे बन्दग़ी!
रहमो क़रम इनायत हूँ मैं,दिल में छुपी क़िनायत हूँ मैं!
मज़लूमों का मददग़ार हूँ,कविताओं का कलमक़ार हूँ!
1
गबरू निज वतन हिरात से आकर
मुल्क़ रूम में दाख़िल!
गबरू वतन हिरात बसेरा,आया छोड़ वहाँ से डेरा!
मादर पिदर बुन्निशा नारी,रहें फ़राहम बड़े सुखारी!
मुल्क़ रूम व्यापार चलाया,करें मशक़्क़त धन अपनाया!
एक गली से गबरू धाया,ग़लत क़ुरान हरफ़ सुन पाया!
2
गबरू जमाल से फ़रमाइश!
राह ख़ुदा मत बनो अजानी,जान बूझ मत करो गिलानी!
कौन क़ुरान ग़लत को पढ़ता,सच्चाई से कौन विमुखता!
नहीं मुनासिब पढ़न तुम्हारा,मेरे दिल आघात क़रारा!
पढ़ना ग़लत क़ुरान ज़फ़ा है,मज़हब ख़ातिर नहीं वफ़ा है!
3
जमाल गबरू से फ़रमाइश!
नहीं इनायत पिदर करेंगे,सुनकर ख़वर क़ैद कर लेंगे!
दार तख़्त पर चढ़वा देंगे,सँग में मुझको मरवा देंगे!
बला मोहब्बत बहुत बुरी है,मधुर बोल हैं ज़हर छुरी है!
है तू कोई हवश पियासा, राह नाप ले मान दिलासा!
4
गबरू जमाल से फ़रमाइश!
नहीं ग़मे अब मुझे मरन का,मेहज़ ग़मे है ग़लत पढ़न का!
जान जाय जो मजहब ख़ातिर,यही कहन है मेरी शाक़िर!
अगर इनायत होइ तुम्हारी,सही पढ़न सिख लाऊँ प्यारी!
एक सीख दिलजान मानलो,महल तले निज कमद डालदो!
5
जमाल गबरू से फ़रमाइश!
सुन अल्फाज मुहब्बत बरसी, अपने दिल में जमाल हरसी!
लेकर हाथ कमन्द डालती, गबरू का दिल प्यार पालती!
चढ़ा कमद पर तुरत परिन्दा, समझाई तब कुरान बन्दा!
प्यारी अब मैं महलन जाऊँ, कल मैं आय तुम्हें समझाऊँ!
6
माता पिता बुन्निशा गबरू से फ़रमाइश!
करत कलेश पिता और माता,आधी रात कहाँ तू जाता!
अब तुझको आँखों तल पाया,इतनी रात कहाँ से आया!
नारि बुन्निशा लड़ै सजन से,सूनी है निज रात मिलन से!
सजनी कौन दूसरी साजन, बतलादो निज मन के भावन!
7
गबरू बुन्निशा से फ़रमाइश!
ऐसे बोल बोल मत प्यारी,बिन दीदार जिगर बेज़ारी!
जाऊँ अब में कुराँ पढ़ाने,आऊँ लौट वसल फरमाने!
बिन दीदार नँ मिलै क़रारी,पल पल अब पड़ता है भारी!
उसी वक्त कर क़मद उठाया,माहेमुनीर महल तल आया!
8
शाह रियासत की तफ़्तीश!
शाह जिगर अरमान गूँजता,शैर रियासत करन घूँमता!
काला कम्बल बदन उढ़ाया,कोतवाल का भेष बनाया!
चढ़ता गबरू झपट लिया है,बदन डोर से जकड़ लिया है!
शाह महल तुझको ले जाऊँ,फ़जर होत ही दार दिलाऊँ!
9
गबरू पिदर के पास जाना!
सीध पिदर नज़दीक लगाई, करुणँ बचन फ़रियाद सुनाई!
मुझे माज़िरत पिदर गहा दो,कोतवाल से ज़रा बचा दो!
करो रहम निज वालिद मुझ पे,पड़ी मुसीबत मेरे सिर पे!
निज फ़रजन्द रहम अब खाओ,पाहन दिल को नहीं बनाओ!
10
इनक़ार की ग़ुहार पिदर!
नहीं तुझे परवाह व्यापती,आवारा पन नज़र झाँकती!
बे मतलब गलियों में फ़िरता,कोतवाल से ख़ौफ़ नँ लगता!
मुझे नहीं अब पिदर कहोगे,किया कर्म अन्जाम सहोगे!
नहीं बनूँगा मददगग़ार मैं,मानूँ तुझको ग़ुनेहग़ार मैं!
11
यार के पास जाना!
सीध यार नज़दीक लगाई, जाकर द्वार बयाँ फ़रमाई!
करदो निज अब यार सहाई, कोतवाल से लियो छुड़ाई!
पड़ी मुसीबत मुझ पे यारा, मेरे तुम बन जाओ सहारा!
निकला बैरी पिदर हमारा,किया संग आघात क़रारा!
12
यार गबरू की रिहायत!
आया ले शमशीर हाथ में,लख गबरू क़ुतवाल साथ में!
अभी वख़्श दो यार हमारा,करदूँ काम तमाम तुम्हारा!
प्यारा मुझको जान जिगर से,पाक़ी है ईमान नज़र से!
तबहीं दे तहरीर छुड़ाया,महलन अपने क़दम बढ़ाया!
13
कमरूद्दीन गबरू से फ़रमाइश!
कर आराम पलँग पर यारा,खाना बेहतर खाइ हमारा!
भवज करेगी ख़िदमत तेरी,छोड़ फिक्र अब मत कर देरी!
देर नहीं अब कर तू पल की,देखूँ घड़ी होइ मुश्क़िल की!
मत कर अब तू दिल को फ़ीका,बनता ढाल फ़साद रफ़ीका!
14
गबरू कमरूद्दीन से फ़रमाइश!
खाना नहीं तनिक अब भावै,अरमाँ दुख़्त ज़ैहन में आवै!
आयत महज़ एक है बाक़ी, जाकर मुझे पढ़ाना शाक़ी!
यही इनायत अब फ़रमा दो,मुझको दुख़्त महल पहुँचा दो!
एक रात है यही ज़िन्दग़ी, होइ फ़जर तब मिलै फ़न्दग़ी!
15
जमाल इन्तज़ार गबरू का!
आतिश मेरे जिगर व्यापती,उझक उझक कर राह ताक़ती!
वक्त ग़ुज़र गबरू नहीं आया,सदमा ये क़ुदरत दिखलाया!
कर दी है अब नाँ फ़रमानी,नैंनन से निज बरसत पानी!
आई झपकी नींद पियारी,ख़वर नहीं बे ख़वर दुख़ारी!
16
गबरू कमरूद्दीन जमाल महल तल पहुँचना
संग ग़ायब हो,बादशाह का!
दस्त यार तब क़मद उठाया,गबरू ले निज सँग में धाया!
महल दुख़्त के लेकर आया,फ़ैंक कमन्द तभी लटकाया!
अन्जन नैंन लगाकर धाया,शाह पास गबरू के आया!
गबरू चढ़त क़मद पर जबहीं,ग़ायब शाह चढ़ा है तबहीं!
17
गबरू जमाल से फ़रमाइश!
गबरू तभी सामने आया,होइ अचंभित दिल घवराया!
गहरी नींद जमाल पियारी,गबरू है दिल बहुत दुखारी!
झलके आँशू जिगर गिरत हैं,तभी जमालो नैंन खुलत हैं!
देखत यार गई मुस्काई, दिल में अपने शुक़र मनाई!
18
जमाल गबरू से फ़रमाइश!
इन्तज़ार भी बहुत कराया,हमको यूूँ बातन बहकाया!
आऊँगा में क़ुराँ पढ़ावन,देर करी नहीं होइ रज़ामन!
यादें कर कर रोई गई मैं,आई झपकी सोइ गई मैं!
यारा क्यों तू अश्क़ बहावै,देख देख कर रोना आवै!
19
गबरू जमाल से फ़रमाइश!
अब तक का है साथ हमारा,मिलै फ़जर नहीं यार तुम्हारा!
तुरत निकाल पढ़ाऊँ पारा,नय्या निज पड़ गई मज़धारा!
मेरे दिल में ख़ौफ़ उमड़ता,काम तमाम दार के तख़ता!
क़ुदरत ने ये ख़ेल दिखाया,तख़्त दार मुझको चढ़वाया!
20
जमाल गबरू से फ़रमाइश!
आज रात अरमान मिटाओ, इश्क़े मज़ा हमें दिखलाओ!
होइ फ़जर तब तुम्हें बचाना,आऊँगी बनकर मरदाना!
प्याला विष का होइ साथ में,ख़न्जर मेरे होइ हाथ में!
अन होनी में होन नँ दूँगी,तुमसे पहले प्राणँ तजूँगी!
21
गबरू महल से उतरना संग बादशाह का!
उतर महल से गबरू आया,बादशाह तब सँग में धाया!
यार यार से गले मिलत हैं,गबरू कमरुद्दीन चलत हैं!
महलन में भोजन फ़रमावै,दार हादशा दिल में आवै!
कर अरमाँ दिलदार घनेरा,तख़्त दार जब होइ सवेरा!
22
शाह गबरू के लिए मोहब्बत!
बादशाह निज महलन आया,दिल तूफ़ान विकट है छाया!
इसी बात का दिल में डर हो,सच्चा गबरू मरण फ़ज़र हो!
बादशाह कुतवाल बुलाया,दिल का वचन तभी फ़रमाया!
महलन उसके तुम अब जाओ, गबरू कमरू लेकर आओ!
23
सिपाही शाह का हुक़्म दस्तियाब!
हुक़्म शाह तालीम करूँगा,मुज़रिम पकड़ पेश कर दूँगा!
फ़रमाया आदेश जिगर में,चला सिपाही तभी सफ़र में!
कोतवाल फ़रमान सुनाया,गबरू कमरू शाह बुलाया!
इरशादे महमूद शाह का,किया सफ़र है इसी राह का!
24
कमरूद्दीन सिपाही से फ़रमाइश!
लो मत गबरू नाम सिपाही,करूँ पेश दरवार गवाही!
मुज़रिम है नज़दीक तुम्हारे,नाज़िल संग अज़ाब हमारे!
चलता हूँ मैं साथ तुम्हारे,छोड़ो अब तुम यार हमारे!
प्राण तजूँ मैं बदन जान है,निभे ग़नीमत यार शान है!
25
नूर महल गबरू से फ़रमाइश!
गबरू पास ज़रा अब आओ,जोश जवानी नशा मिटाओ!
भेज दिया है ख़ामिद अपना,मेरे दिल का तू ही सपना!
बीच भँवर जोवन गुन्जारै,काम देव रह रह कर मारै!
पूरी हशरत मेरी कर दो,नीर इश्क तन मन में भर दो!
26
गबरू नूर महल से फ़रमाइश!
मज़हब को मत भवज डिगाओ,कामदेव को वश में लाओ!
ज़हन्नूम तहजीब नँ लाओ,मेरी भवज सम्हल अब जाओ!
बहर हाल मत हमें गिराओ, मेरी कहन मान तुम जाओ!
कहाँ गया कमरूद्दी यारा,मुझको दिलोजान से प्यारा!
27
नूर महल गबरू से फ़रमाइश!
इन्तिहाँन में पास हुए तुम, मेरे देवर ख़ास हुए तुम!
सुनकर बात ख़ुशी है हमको, माहेमुनीर मिलेगी तुमको!
तनिक नहीं दिखलाइ दया है,कमरू ले कुतवाल गया है!
पकड़ उन्हें लो दिवर हमारे,यार मुहाफ़िज सँग तुम्हारे!
28
गबरू का जाना!
तबहीं गबरू वहाँ से धायौ,उन दोनों के करीब आयौ!
पकड़ा शव मैं हीं वो शातिर,यार छोड़ दो मेरी ख़ातिर!
इसकी एवज दार चढूँ मैं कमरू चढ़न नहीं अब दूँ मैं!
ले चल मुझको संग सिपाही,आज दार पर होइ तवाही!
29
सिपाही गबरू कमरूद्दीन को ले जाना शाह के पास!
ले मुज़रिम दरवार पहुँचता,बादशाह को सलाम करता!
जो तुमने मुझको फ़रमाया,मुज़रिम पकड़ साथ में लाया!
इनमें पाक़ रिफ़ाक़त भी है,दिल में छुपी सदाक़त भी है!
तख़्त दार या करो रिहायत,मर मिटने की इसमें ताक़त!
30
शाह आदेश दार का!
बैठ सिंहासन बादशाह है,उसके दिल इन्साफ चाह है!
दिले मोरब्बत आई है जब, ग़मे घटा सी छाई है तब!
बादशाह फ़रमान सुनाया,गबरू तख़्त तुरत बुलवाया!
ख़ौफ़ असीर जिगर में भर दो,कत्लेयाम दार पे कर दो!
31
जल्लाद गबरू से फ़रमाइश!
बुरा किया है बुरा मिलेगा,तेरे बीच नँ कोई हिलेगा!
गिरा गिरा के तुझको,मारूँ,ख़न्जर से में छाती फारूँ!
मुझे किसी का बहम नहीं है,मेरे दिल में रहम नहीं है!
आज नहीं मैं इसको छोडू,हड्डी पसली इसकी तोडू!
32
माता पिता पुत्र दार की ख़वर सुनना!
वालिदेन तब सुनी ख़वरिया,छावै दिल में ग़मे बदरिया!
सब ग़मग़ीन भये परिवारी,नरि बुन्निशा बहुत दुखारी!
दिल बेताब कन्थ बिन नारी,रोवत जात पीट पेशानी!
पहँचे तब दरवार शाह के,मातम पूरण तरह पाय के!
33
जमाल दार पर जाना!
फैंक दिया पोशाक जनाना,सिर पे सेहरा तन मरदाना!
प्याला ज़हर संग में लेकर, दिल में गबरू ग़म को देकर!
एक दस्त शमसीर उठाई, चढ़ी अस्प निज सीध लगाई!
हाँसिल मन्ज़िल होइ यार पे,पहँच गई दिलदार दार पे!
34
माता पिता पुत्र के लिए विलाप!
आज हाथ से पुत्र तजूँ मैं,माता बिलखत रोई मरूँ मैं!
इकलौता फ़रजन्द हमारा,तेरे बिन नहीं कोई सहारा!
लखकर बेटा वालिद रोवै,मेरे लाल मुझे मत खोवै!
ख़ता माज़िरत कीयो मेरी,हालत उस दिन दुख में तेरी!
35
गबरू माता पिता से फ़रमाइश!
रीत जहाँ की मात यही है,जाना सबको मान सही है!
लेता जन्म जगत में प्रानी,इक दिन होइ बदन की हानी!
दुखी नँ वालिद होइ हमारे,फ़रियादें निज सँग तुम्हारे!
मतलब जीवन आना जाना,काहे फ़िर इतना घवराना!
36
बन्निशा गबरू से फ़रमाइश!
काम देव जब जंग करेगा,फ़ुरक़त में नहीं अंग सहेगा!
साजन कैसे रात कटेगी,सजनी तुम बिन रोइ मरेगी!
ग़म के बादल सिर पे छाए, तक़दीरे मातम दिखलाए!
खिलत हयात नँ रंग हमारे,सजन मरूँगी संग तुम्हारे!
37
गबरू बुन्निशा से फ़रमाइश!
हर प्राणी जीवन में होगा,आना जाना सँग में होगा!
रख लेना तू भेष फ़क़ीरी,यही उचित है नारि अमीरी!
मेहन्दी हाथन नहीं रचाना,विधवा होकर नाम कमाना!
सुर्ख़ी होठ कभी मत करना,सिन्दूरी निज माँग नँ भरना!
38
कमरूद्दीन शाह से फ़रमाइश!
पाक दिले गबरू का जानो,अपनी ठान शाह मत ठानो!
ताज़िर का है पिसर पियारा,मोइ जगत बहुत पियारा!
पाक़ जिगर ईमान ख़ुदारा,अरहम है दिलदार हमारा!
मान नसीहत मेरी,लीजे,आज रहम इतना कर दीजे!
39
शाह कमरूद्दीन से फ़रमाइश!
बादशाह को सीख नँ भाई,कमरूद्दी फ़टकार लगाई!
प्राण तुझे निज नहीं पियारे,सीख ग़वारा करो पियारे!
है तू एक अजीबो हज़रत,क्यूँ है एवज मरने हशरत!
इसका दोष यही अब पावै,तू काहे को प्राण गमावै!
40
गबरू सभी से फ़रमाइश!
दुनियाँ में हर कोई आता,मौत संग में अपने लाता!
करत विनय मैं बार-बार हूँ,होने वाला जार-जार हूँ!
उलझन है ये दुनियाँ दारी,कोई राजा कोई भिखारी!
कोई नँ मेरा तलबग़ार है,सबको मेरा नमस्कार है!
41
जमाल गबरू से फ़रमाइश!
आया था वो क़ुराँ पढ़ाने,मतलब सहित मुझे समझाने!
अगर मेरे गुलफ़ाम दार हो,ज़हर पिऊँ शमसीर बार हो!
तुम्हीं चमकते एक सितारा,देखा है ये अजब नज़ारा!
जी नँ सकूँगी तुम बिन यारा,शम्स चरागे प्राणन प्यारा!
42
बज़ीर मोरब्बत दुख़्तर के लिए!
दुख़्तर मेरी जो फ़रमाया,नाम मेरा बदनाम कराया!
जीऊँ कैसे दुनियाँ दारी,आज समाज करादी ख़्वारी!
शानो-शौकत चाहे सब दे,ऐसी पर औलाद नँ रब दे!
ग़म के सागर डूब गया हूँ,तन्हाई अब झूम गया हूँ!
43
बादशाह बज़ीर से फ़रमाइश!
दुख़्त जमाल तेरी ये बच्ची,अरहम दिल मूरत है सच्ची!
देखी छिपकर पाक़ मोहब्बत, अपने दिल में करो मोरब्बत!
ताज़िर नजफ़अली का बच्चा,दिलोजान से है ये सच्चा!
दिल का सारा भरम छोड़ दो,इनका तुम सम्बन्ध जोड़ दो!
44
बज़ीर दिल मशरूर!
हसनअली तफ़रीक़ सुनी है,होवै दिल में खुशी गुनी है!
दुख़्तर ने निज नाम कमाया,सिर मेरा ऊपर उठ आया!
जो भी माँग वही कर दूँगा,कदमों तेरे सब रख दूँगा!
किया काम मन मेरे भाया,ऊपर उठत गमों से साया!
45
बज़ीर गबरू जमाल का निकाह कर देना!
हसनअली क़ाज़ी बुलवाया,गबरू दुख़्त निक़ाह कराया!
धूम धाम फ़रहान क़हर में,मिलन होइ अल्लाह लहर में!
बेग़म दुख़्त जमाल पियारी,एवज शव की हो उजियारी!
इन्तिहाँन तक़दीर लिया है,गबरू नाम जमाल किया है!
46
बादशाह गबरू को निज पद तश्लीम!
कर तश्लीम शाह निज पद को,ठुकराया है शासन हद को!
दिल का भरम उतार दिया है,धन दौलत को त्याग दिया है!
सेहरा शिर गबरू पहनाया,एवज में सुलतान बनाया!
अदब दिले रब का फ़रमाया,भेष फ़क़ीरी तब अपनाया!
47
जमाल पिदर बज़ीर से फ़रमाइश!
मेरी हशरत एक पिदर है,करना उसकी आप क़दर है!
दुनियाँ में अब नाम कमा लो,तन अपना दरवेश बना लो!
अपने पद को पिदर फ़ना दो,कमरूद्दीन बज़ीर बना दो!
बीच मोहब्बत मदद ग़ार है,गबरू का ये तलब ग़ार है!
48
बज़ीर कमरूद्दीन को निज पद तश्लीम!
दिल फ़रहान घनेरी सबके,हालाते नेमत है तब से!
सारा ग़म दिल से हैं खोते,तश्क़ीने तब बज़ीर होते!
सेहरा शीस तभी पहनाया,कमरूद्दीन बजीर बनाया!
शाह बज़ीर फ़क़ीरी पाई, तसीरे रब लगन लगाई!
The End
गबरू उर्फ़ जमाल मोहब्बत, सबके दिल में करे मोरब्बत!
इश्क़ हिक़ायत अजब नज़ारा,ताज़िर गबरू मिले सहारा!
ख़ुदा इनायत मदद ग़ार है,कविता मेरी याद ग़ार है!
हज़रत इतनी रिफ़ा कीजियो,कलम रुकी है दुआ दीजियो!

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