जुदा ज़िन्दगी से


जुदा ज़िन्दगी से

Author

Gopal Singh

Mo,6398347628

माँगा तुझे बंदग़ी में॥

आया नहीं ज़िंदग़ी में||

1. घड़ियाँ भी अब गुजर चुकीं!

खुशियाँ घर में बिख़र चुकीं!

पी गया दिल मै ख़ाना!

बन गया है अफ़साना!

नहीं लगाई तौहमत भी!

की है तुझे मोहब्बत ही!

मिला अज़ाब ज़िंदग़ी में!

माँगा तुझे बंदग़ी में!

2. किया सफ़र था गलियों का!

देख खेल रँग रलियों का!

मुझे नँ अच्छा लगता था!

कोई नँ सच्चा दिखता था!

फ़िर भी चाहा प्यार से!

किया सब्र ज़िनहार से!

करके जिगर मंदग़ी में!

माँगा तुझे बंदग़ी में!

3. मान लिया  था तुझे ख़ुदा!

फ़िर भी दिल से हुआ जुदा!

बिछड़ गया तू उम्र भर!

पत्थर अपने रख दिल पर!

निकला तू तो बे दरदी!

दिखलाई है ख़ुद गरजी!

ऐसे पड़े फ़ंदग़ी में!

माँगा तुझे बंदग़ी में!

4.तेरी ख़ातिर ऐ सनम!

दिल ही दिल में खा कसम!

साथ निभाएँ जीवन भर!

तेरे सँग में रह ग़ुज़र!

कभी न होंगे हम जुदा!

हसरत पूरण करे ख़ुदा!

इश्क़ वफ़ा ढंग दी में!

माँगा तुझे बंदग़ी में!

5.अपना जीवन जी चुके!

आँखों आँशू पी चुके!

घड़ी क़यामत आ गई!

सिरे क़ज़ा लेहरा गई!

करले शाक़ी ख़्याल तू!

जिये हजारों साल तू!

मुश्क़ी हरफ़ रंग दी में!

माँगा तुझे बंदग़ी में!


करूँ ख़ुदा से बंदग़ी!
जब तक है ये ज़िंदग़ी!

मुझको ग़र वो मिल जाए!
तबियत भी ख़ुश हो जाए!

तू ही मरहम दर्द-ए-ग़म!
आँख मेरी हो जाए नम!

करत ज़िहाद जगत से हूँ!
वाक़िफ़ मिली भगत से हूँ!

तड़फ़त रही जवानी है!
वो परियों की रानी है!

ग़ूजत गीत हवाओं में!
झूमत अक़्श फ़िज़ाओं में!

लखकर ओर ज़माने की!
करले क़दर फ़साने की!

मिली आँख इक बार में!
हुआ मुख़्तिला प्यार में!

तू ख़ुश है तो मैं ख़ुश हूँ!
तेरे रुख़ में मैं रुख़ हूँ!

सोलह साल उमर बारी!
मेरे घर की उजियारी!

लश्क़र लेकर यादों का!
मुझे फ़क्र फ़रियादों का!

क़िश्मत साथ नहीं देती!
मुख़ड़ा दुख़्त फ़ेर लेती!

किसी तौर से मर जाएँ!
नाम ज़हाँ में कर जाएँ!

लोग फ़साना गायेंगे!
याद बहुत हम आयेंगे!

अश्क़ आँख भर लायेंगे!
इश्क़ कभी अपनायेंगे!


दिन की एवज रात है!
मेरे सँग में घात है!

नहीं मेरा हज़रात है!
एक ज़रूरी बात है!

मेहँदी है मेहबूब की!
जीनत ख़ुद पे ख़ूब की!

प्यासा हूँ दीदार का!
देखन रुख़ मीनार का!

तौबा ख़ल्क़त कर बैठे!
दिल से तुझ पर मर बैठे!

दिले अज़ूबा दुख़्तरे!
रुतवा ख़ल्क़त में फिरे!

तेरी ओर निहारता!
ग़म के आँशू डारता!

कहने को कुछ भी नहीं!
बेक़श हूँ मैं तू नहीं!

ख़ुद से हूँ मैं ला पता!
तश्लीमे अब नाँ अता!

इश्क़ तेरे मज़रूह हूँ!
नहीं ख़वर तन रूह हूँ!


इश्क़ जामे मोहब्बत ग़वारा नहीं!3
आपने मुझको हम दम सँवारा नहीं!2

आपकी ओर देखा सनम प्यार से!3
नाम ले करके तुमने पुकारा नहीं!2

आप मेहरूम होकर के चल ही दिए!3
फेर हम से निग़ाहें निहारा नहीं!2

साथिया साथ देना जिगर थाम के!3
ग़ैर से मेरा होगा ग़ुज़ारा नहीं!2

खोल दे इश्क़ जंजीर मेरी सनम!3
मौत तेरे लिए है ख़ुदारा नहीं!2

जी रहा हूँ जुदाई में मरते हुए!3
इश्क़ तुमसे हुआ था दुवारा नहीं!2

तेरी यादों को दिल में समेटे रहे!3
आपका शुक्रिया है हमारा नहीं!2

रूठकर आज हमसे चला ही गया!3
ज़िन्दग़ी धूल जैसी सहारा नहीं!2

शेय दुनियाँ ज़ियादा लख़ीं है मग़र!3
है कहीं तेरे जैसा नज़ारा नहीं!2

नाम ले करके तेरा खड़े धार में!3
डूबती है सफ़ीना क़िनारा नहीं!2


बहले दिल दीदार से तौबा मोइ हयात!
 हालाते तूफ़ाँ दफ़ा राहत होइ निजात!

चेहरे पर है शादग़ी छलके होठों जाम!
बँधे प्रेम की डोर में यादें सुबहो शाम!

बेशक़ मैं मेहरूम हूँ मागूँ रब से ख़ैर!
 नहीं होय ईज़ा तुझे वश्ले  सँगे ग़ैर!

आँशू ग़म आँख़ों भरे मीत मुझे है याद!
राहें भी बेताब हैं होइ शजर नहीं शाद!

 मै ख़ाना ग़म पी गया मशरूफ़े दिलशाद!
भुला दिया तक़रार को मख़्लूके इरशाद!

दिल में तेरा नाम है गाऊँ  ग़म के गीत!
फ़िज़ा बहारों गूँज़ता शीरी सुर संगीत!

करके इत्मीनान मैं माना तुझको ईश!
नहीं मुझे मालूम था होगा यार ख़वीश!

आहिस्ता अपना लिया तेरा ही इक नाम!
ग़ैर अगर अपनाऊँ जो जीना मुझे हराम!

 रही नहीं आलम दले कोई शेय ग़ुमान!
तेरा ही इक आसरा गूँज़े नाम ज़ुवान!

दस्तियाब दिल हो गया रही घटा ग़म छाइ!
पलभर नहीं शुक़ून है होइ जिग़र में हाइ!

इश्क़ पहेली में हुआ ग़म के सागर डूब!
लव्ज़ेहाद हायात में बिछड़ गया मेहबूब!

घात लगाइ जहान है बैठा मान शिक़स्त!
लिखे ख़ून से ख़त उसे होइ हयात विरक्त!

यादों से दिल शाद हो मिलै नँ शाहे ख़ुबा!
अफ़साना बुनियाद है तुमको चाहे ख़ुदा!

ख़्वाबों की ताबीर है तू मेरी हमराज़!
कर तेरा दीदार मैं बाजे है दिल साज़!

वायस लव्ज़ेहाद में चले होय नाशाद!
आँशू ग़म के दे चले करै ज़माना याद!

अश्क़ों की तक़दीर है वफ़ा मोहब्बत शान!
क़ुदरत ने पैदा किया मक़्सद नहीं जहान!

मशरूफ़े दिल सोच में आई रह रह याद!
अश्क़ों की बरशात में छुपी यार फ़रियाद!

अगर जान जो जाइगी मेहबूबे ख़ातिर!
तुरवत काम तमाम हो आएगी आतिर!

मिलै दूसरा जन्म ग़र मिलै वही मेहबूब!
शादी संग रचा सकूँ मशरूरे दिल ख़ूब!

रूह ज़मीर बुलन्द है इश्क़े मेरा क़लाम!
तारीफ़े क़ुरआन कर है अल्लाह सलाम!

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