यादों की शायरी
1.मेरा रफ़ीक मुझसे दूर है!
अपने हुस्न का उसे गुरूर है!
भूल गया है ग़ुज़रे लम्हात को!
किसी ग़ैर इख़्तियार मशरूर है!
2.गलियों में यूँ हीं फ़िरता गया!
ज़िहादें ज़माने से करता गया!
ख़तावार हम ने तो ख़ुद को चुना!
रुष्वा ज़माना यूँ करता गया!
3.यादों को तेरी सजाता गया!
तन्हाई में गीत गाता गया!
पंक्षी भी दिल का जो रोता कभी!
सागर ग़मे मुस्कुराता गया!
4.रुख़ तो मोहब्बत का दिखाया नहीं!
वादा जो किया था निभाया नहीं!
ज़ुर्मे वफ़ाओं को सहते रहे हम!
तुझको दिल से तो हमने भुलाया नहीं!
5.सुहाने दिन भी गुजरते गए!
दिन रात हम भी बिख़रते गये!
समझा नसीबा जो अपना मगर!
यादों में उसकी पिघलते गये!
6ख़यालों की दुनियाँ में जीते हैं हम!
वफ़ाओं के अश्क़ो को पीते हैं हम!
ख़यालों को अपना मुकद्दर समझ!
ख़याले मुनव्वर सँजीते हैं हम!
7.मोहब्बत के ग़म छाते गए!
तुम याद बहुत आते गए!
तरसकर ही बितादी उम्र सारी!
नग़मे यूँ फ़ुरक़त के गाते गए!
8.प्यार में रुष्वाई मिलती है!
दर्द-ए-ग़म तन्हाई मिलती है!
नहीं मिलता क़रार दिल को कभी!
वफ़ा के बजाय बेवफ़ाई मिलती है!
9.ख़ुद से मैं क़ाहिल हो गई हूँ!
तेरे दिल में दाख़िल हो गई हूँ!
हाथ माँगने आजा एक बार तू मेरा!
तेरी मोहब्बत में शामिल हो गई हूँ!
10.हरपल मैंने तेरी निजामत की है!
तुझको यार पाने की चाहत की है!
तुझ पे मेरा शबाब मुश्ताक हो सनम!
माँगने की तुझको पहली मुलाकात की है!
11.रो मत दिल तू बड़ा बाबरा है!
करले दिल फ़कीर ख़ुदा को तेरा
आसरा है!
ग़नीमत होगी तेरे लिए बेहतर यही!
समझ किसी के दिल का हर एक
माज़रा है!
12.तुझसे प्यार करना चाहता हूँ!
बातें हजार करना चाहता हूँ!
मोहब्बत को इबादत मानकर मैं
तेरा दिल इख़्तियार करना चाहता हूँ!
13.ज़िन्दग़ी से नेस्तनाबूद हूँ!
यादों की एक बारूद हूँ!
इन्तज़ार है क़यामत का मुझे!
शम्शान में पड़ा ताबूद हूँ!
14.खिड़की से झाँकता है कोई!
रात दिन उसे ताक़ता है कोई!
अक़्श दिखता था उसकी आँखों में!
यादों को पुरानी बख़ारता है कोई!
15.किसी का ग़म लेकर बैठे हैं!
किसी को दिल देकर बैठे हैं!
तख़्मीना डूब ही गया अब तो!
इसलिये ही तो बे घर बैठे हैं!
16.ग़म को सहकर मशरूर हूँ मैं!
इश्क़ के बुख़ार में मग़रूर हूँ मैं!
खड़ी है मौत नज़दीक अब मेरे!
यार मुख़्तलिफ़ है तू मजबूर हूँ मैं!
17.इश्क़ में शदीद हो गया हूँ!
चाँद के लिए ईद हो गया हूँ!
करदो ऐहतराम मेरा फ़रिश्तो!
ख़ुदा के लिए जीद हो गया हूँ!
18.इश्क़ में हयामत मत करो!
किसी पे लानत मत करो!
ख़ुद से ग़ुनेग़ार हो जाओगे!
ऐसी कभी शरारत मत करो!
19.इश्क़ में बरवादियाँ हैं!
ज़र्रे ज़र्रे में दुश्वारियाँ हैं!
टूट जाते हैं सिर से पाँव भी!
होती मयस्सर तन्हाइयाँ हैं!
20.बेताबी बढ़ती चली गई!
नींद आँखों से उड़ती चली गई!
क़यामत का दौर है मेरे लिए तो!
जवानी मेरी ढलती चली गई!
21.ज़माने का ज़िहाद सहा नहीं जाता!
तेरे बिन अब यार रहा नहीं जाता!
तफ़रीक में तेरी बेताब हो गया हूँ मैं!
किसी से दिल का राज़ कहा नहीं जाता!
22.दुनियाँ से ख़ुस्नुमाँ मेरा शाक़ी है!
उसका अभी दीदार पाना बाक़ी है!
इन्तज़ार करेंगे क़यामत तक ऐसे ही!
प्यार पाने को अभी इन्तिहाँन बाक़ी है!
23.अपने बुज़ुर्गों की रीत में जाता हूँ!
लिहाज़ा मैं पुरानी प्रीत में जाता हूँ!
शुक़ून मिलता उन बातों को यादकर!
फ़ेर बदल कर दर्द भरे गीत मैं गाता हूँ!
24.भरपूर जवानी नहीं है!
मेरी कोई कहानी नहीं है!
ग़ुज़री है ज़िन्दग़ी वीरान!
रब की मेहरवानी नहीं है!
25.आज तेरे घर कोई नज़राना लाया है!
पंख लगाके इश्क़ के कोई परवाना आया है!
मेरी तरफ देखले ज़रा शुक़ून दिल को मिलेगा!
वादियों से चुराकर कोई अफ़साना लाया है!
26.चिड़िया पेड़ पर चहकने लगी!
मेरी नीयत किसी पर बहकने लगी!
ग़लियों में आवाज देकर पुकारता हूँ उसे!
मिलने की आतिश दिल में भड़कने लगी!
27.लौटकर मेरे हमसफ़र आजा!
चाहे तू बनकर क़हर आजा!
दीदार की तश्नग़ी लगी है मुझे!
लिहाज़ा आँखों के दरबदर आजा!
28.जान देकर निभायेंगे मोहब्बत को हम!
तोड़ देंगे ज़माने से तोहमत को हम!
कहीं का रक़ीबों ने छोड़ा नहीं हमको!
कर देंगे इब्तिदा दिलों में मोरब्बत को हम!
29.तुझे अपना दिल वासिल कर रहा हूँ!
अपने बुत का ख़ुद नाश कर रहा हूँ!
तेरे हुस्न की क़ैद में पड़ा हूँ जब से मैं!
इश्क़ क्या है इसकी पहचान कर रहा हूँ!
30.तू मेरी धड़कन का सितार है!
हवा की रवानी का गिटार है!
यादों के सहारे जी रहा हूँ मैं!
तमद्दुम में आने का मियार है!
31.फ़ूल ग़ुलशन में खिलते हैं!
हम दुनियाँ से दूर होकर मिलते हैं!
ले आई क़शिश खींच के साहिल पे!
जिसके दर्द से ज़मीं आसमान हिलते हैं!
32.यादों का दरियाव हूँ मैं!
एक अन सुनी फ़रियाद हूँ मैं
मुन्सितर हो गए हौसले सभी!
इश्क़ का परिन्दा ज़िहाद हूँ मैं!
33.यादों का शैलाव उमड़ने लगा है!
मेरे दिल में कोई उतरने लगा है!
देखा था कभी उसको एक बार!
गली से हमारी वो ग़ुज़रने लगा है!
34.शम्मा से परवाने उजड़ने लगे हैं!
पत्थर दिल भी पिघलने लगे हैं!
हो गई क़यामत है उन पर रब की!
मिलते हुए दोस्त बिछड़ने लगे हैं!
35.हल्का सा ख़ुमार रहता है!
ख़्वाब में कोई कुछ कहता है!
मानता हूँ हक़ीक़त उसको मैं!
जो मेहज़ मेरे दिल में रहता है!
36.मैंने तुझे अपने क़ाविल कर लिया है!
अपनी निग़ाहों में शामिल कर लिया है!
आतिश का दरियाव है इस पहेली में!
यादों की शैर में दाख़िल कर लिया है!
37.यादों के चराग़ जलते ही रहेंगे!
हम तुम एक होकर मिलते ही रहेंगे!
गुज़र जायेंगे हदों से हम एक दिन!
जलने वाले चाहे जलते ही रहेंगे!
38.तू मेरी दरक़ार में रहता है!
डूबी हुई नाव की पतवार में रहता है!
दिल का तसब्बुर वीरान है अब तो मेरा!
मेहरूम हो ज़माने की सरक़ार में रहता है!
39.तुझे देखने की फ़ितरत है मेरी!
मेहज़ तू ही तो मोहब्बत है मेरी!
माँगता हूँ दुआ तड़फ़ती निग़ाहों से!
अपनाने की तुझको हसरत है मेरी!
40.इश्क़ की हवश बुरी होती है!
रब की एवज में छुरी होती है!
घुट घुट के जीते हैं वे लोग!
जिनकी तक़दीर बुरी होती है!

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