तन्हाई की तड़फ़


 तन्हाई की तड़फ़




1, तन्हाई में तड़फ़ कर बैठे हैं||
किसी के दिल में उतर कर बैठे हैं||
वफ़ा का अंजाम मिल ही गया हमको||
लिहाज़ा ज़िन्दगी में बिख़र कर बैठे हैं||   

2, छेड़ कर तरन्नुम दिल का कोई
 ख़ुद को खो दिया करते थे||
डूब कर याद में आपकी
कभी हँसते कभी रो दिया करते थे||
तन्हाई में राह को तेरी दरबदर झाँकते रहे हम||
आव की इश्तियाक़ नहीं थी शरबसर
चेहरे को अश्कों से धो दिया करते थे|| 

3, प्यार की चिंगारी नेस्तनाबूद हो गई||
डूबी हुई किश्ती ज़माने में वज़ूद हो गई||
कर दिया है मुनव्वर यादों को हमने||
प्यार की इन्तिहाँ भी मख़्सूद हो गई||

4, ज़िहाद करते रहे हम यादों से आपकी
अंजाम हमको मिला नहीं||
फ़ूल टूटकर आ तो गया डाली से
सूख़ गया लेकिन जीवन में ख़िला नहीं||
मोहताज़ हो गये माज़िरत में हम हमेशाँ के लिए||
ग़ैर की होकर फ़िरती हो बहारों में 
इसलिए हमें आपसे कोई ग़िला नहीं||

5, नेस्तनाबूद ज़िन्दगी को सुकून नहीं मिला है||
ख़िलना था फ़ूल को यहाँ कहीं और ख़िला है||
अपने आपको हमने तुम्हारे कदमों की धूल समझा||
ग़वारा नहीं किया मुझको इसी बात का आपसे ग़िला है||

6, दामन को बचाने के लिये हमने
 फ़कीरी का भेष धारण किया||
जूझते रहे ज़माने से अकेले
डटकर समस्याओं का निवारण किया||
इश्बात कर दिया तेरी मोहब्बत को जानेमन ज़वेदा||
सह कर ज़हमतें इश्क़ में तश्क़रों की
तेरे चेहरे का दिल में उतारण किया||

7, दानिस्ता किसी की याद में मरहूम हो ही गये||
रो रो कर रातों को कभी जागते तो कभी सो ही गये||
इन्तजार की इस घड़ी में करार नहीं था दिल को||
अक्सर कभी उभरते तो कभी खो ही गये||


8,हमसे बिछड़ने की जानेमन ऐसी हिमाक़त मत करो||
जी नहीं सकेंगे आपके बिना ऐसी क़यामत मत करो||
तुम किसी की हो जाओ मुफ़्तशर ग़वारा नहीं मुझे||
अपने पराये होते हैं ग़र्दिश में ऐसी रिफ़ाक़त मत करो||


9,मत कर ग़ुरूर महँगा पड़ेगा तुझे ज़िन्दग़ी में||
मोहब्बत की तफ़्तीश करले आकर बन्दग़ी में||
मशरूर होगा ख़ुदा देखकर फ़लक़ से तुझको||
पड़ना मत कभी जानेमन ज़माने की फ़न्दग़ी में||


10,बेचैनी पुरानी यादों की होती है नँ कम||
आती है याद उनकी आँखें हो जाती हैं नम||
दुनियाँ से बे ग़ाना हो गया हूँ तेरे लिए शाक़ी||
चाहूँगा जी भरके तुझे जब तक है दिल में दम||


जो भी करै मोहब्बत है!
कदमों उसके सोहरत है!

मिली ख़ुदा से मोहलत है!
करै ज़माना तोहमत है!

इज़्ज़त बचे दरिन्दों से!
ऐहतेयात परिन्दों से!

क़ुदरत का ये ख़ेल है!
दो दिल का ये मेल है!

यादें दिलवर आती हैं!
चश्मे ग़म भर जाती हैं!

शेय साथ में लाता था!
तेरे हाथ गहाता था!

करै ग़वारा प्यार से!
ख़ुशी होइ दिलदार से!

इश्क़ तेरे बीमार हूँ!
खड़ा हुआ मीनार हूँ!

ताज महल वीरान हूँ!
टूटे दिल की शान हूँ!

हिज्रे उसके भुला दिया!
ख़ुद को हमने रुला दिया!

मिली इश्क़ में तन्हाई!
दुनियाँ में हो रुषवाई!

देखत तुझको राहों में!
आजा मेरी बाहों में!

जी भर करलूँ प्यार मैं!
तुझ पर जान निसार मैं!

तौफ़ीक़े दिल हार कर!
बैठे ख़ुद को मार कर!

डूबे रहे ख़यालों में!
बेज़र हो इन हालों में!

मुझको रब से है दुआ!
माँगी मुझको मिले ख़ुबा!

झूमर सिरे हिजाज़ है!
तू ही दिले इजाज़ है!

गेशूँ तेरे लेहरायें!
हुस्न रुहानी फ़ेहरायें!

नँथनी नाँक दमकती है!
बिदिया शम्स चमकती है!

 साड़ी पहने चमकीली!
लगती है तू शरमीली!

मेहँदी हाथ रचाई है!
तेरी आज सगाई है! 

डोली कोई ले गया!
यादें मुझको दे  गया!

फ़ितरत तेरी है सच्ची!
लगती दिल को है अच्छी!


तेरा नाम लेकर हम जी रहे हैं
घुट घुट के आँशू ग़म पी रहे हैं!

तेरी शिकायत नहीं है बुराई 
समझा है इसको हमने भलाई 
ज़मीरे मोहब्बत हम छी रहे हैं
घुट घुट के आँसू हम पी रहे हैं!

मेरी बे क़रारी अबतक नँ कम है
टूटा हुआ दिल ग़मे आँख नम है
तुझ पर इनायत कर ही रहे हैं
घुट घुट के आँशू हम पी रहे हैं!

दो चार आहें मेरे घर क़फ़न हैं
बाहें इन्हीं में मेरी सर परस हैं
ख़ुद से ज़िहादें कर ही रहे हैं
घुट घुट के आँशू हम पी रहे हैं!

मेरी वफ़ाओं का अरमान है ये
रब का फ़लक़ से फ़रमान है ये
यादों में बरहम मर ही रहे हैं
घुट घुट के आँशू हम पी रहे हैं!


तेरी यादों में जीवन को हमने जिया!
मुश्क़िल में अब तो मुलाक़ात हैं!
बे क़रारी ज़वेदा क़रारी नहीं!
उल्झनों के जिगर पे ख़यालात हैं! 
तेरी यादों में जीवन को हमने जिया!

तेरे गालों पे लट यूँ लटकती रही!
बूँद आँखों से मेरी टपकती रही!
तुझको देखा ख़यालों में ग़ुम सुम हुआ!
मेरे वीरान ज़्यादा ही दिन रात हैं!
तेरी यादों में जीवन को हमने जिया!

तेरे चेहरे को दिल में बसाये रहे!
तेरी यादों को हर पल सजाये रहे!
तुझको पाने का दिल में यही राज़ था!
अब ना बूद दिल के सवालात हैं!
तेरी यादों में जीवन को हमने जिया!

तेरे हाथों में मेहँन्दी जो रचने लगी!
मेरी सूरत तो दिल से उतरने लगी!
मुझको तो दिल से भुला ही दिया!
अब हारे हुए मेरे हालात हैं!
तेरी यादों में जीवन को हमने जिया!

रुषवाह दुनियाँ में बिकते गये!
 तेरी यादों में ख़त हम लिखते गये!
ग़म अशक़ों की धारा है मरहूम सी!
क़ातिल मुख़ातिब जज़्बात हैं !
तेरी यादों में जीवन को हमने जिया

 
आता हुआ दिल प्यार दिलवर याद में रखना
ग़म राज़ दिल से दिल्लग़ी फ़रियाद में रखना!

तस्वीर तेरे नाम की दिल में जो उतारी है
कब आयेगी अब ज़िन्दग़ी मैंने तू पुकारी है
कर ले ग़नीमत आशियाँ बरबाद में रखना
ग़म राज़ दिल से दिल्लग़ी फ़रियाद में रखना!

बिख़री  हैं ज़ुल्फ़ रुख़ पे दिलक़श है नज़ारा
अब लहरों में उतर इनकी दिखता है क़िनारा
मुझ से मोहब्बत जानमन बुनियाद में रखना
ग़म राज़ दिल से दिल्लग़ी फ़रियाद में रखना!

दो दिन की मुलाक़ात है दो दिन का बहाना
लग जा  गले से तू प्रिये दुश्मन है  ज़माना
मेरी मोहब्बत पाक़ है दिल शाद में रखना
ग़म राज़ दिल से दिल्लग़ी फ़रियाद में रखना!

अरहम है दिल हज़रात मेरे पास अब आना
फ़रहान के इस हाल में ससुराल मत जाना
इश्क़े सलामत शिल्सिला मरियाद में रखना
ग़म राज़ दिल से दिल्लग़ी फ़रियाद में रखना!


मेरी उल्फ़त तुझे अब ग़वारा नहीं!
डूबती है सफ़ीना क़िनारा नहीं!
मेरे मेहबूब आकर बचालो हमें!
आपका सब है लेकिन हमारा नहीं!
डूबती है शफ़ीना क़िनारा नहीं!

मेरे जोवन हिलोरें जलाली सनम!
मैंने मिलने की तुझसे ये खाई कसम!
मेरे दामन को छूटे तू आकर ज़रा!
चाँद तारों में तुझसे नज़ारा नहीं!
डूबती है शफ़ीना क़िनारा नहीं!

तेरी चाहत में नीयत बिकती मेरी!
बिन तेरे मोहब्बत तड़फती मेरी!
मुझ पर तेरा इख़्तियारे सनम!
दिल सूना है आलम गुज़रा नहीं!
डूबती है शफ़ीना क़िनारा नहीं!

मैं तेरी हो गई उम्र भर के लिए!
वक़्स फ़रहान दी है दो पल के लिए!
अब तेरा साथ मुझसे नहीं छूटता!
रो पडूंगी जो तुमने पुकारा नहीं!
डूबती है शफ़ीना क़िनारा नहीं!

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