नाता वफ़ाओं से


नाता वफ़ाओं से



मैं दूर हूंँ दुनियाँ की जफ़ाओं से
नाता जोड़ता हूँ फ़िर वफ़ाओं से
कहने को तो एक अंजान हूँ बेशक़
मन को लहराता हूँ अब हवाओं से?

कोई खड़ा है चित्तरशाली पे
कोई खड़ा है शजर की डाली पे
दोनों तरफ़ से अच्छे हैं वे शख़्स
 मन को लगा लिया फ़िज़ाओं से?

तेरा इश्क़ खींचकर लाता है मुझे
तेरा मिलना दिल को भाता है मुझे
हैरत होती है मुझे दर्दे ग़म तन्हाई में
परेशान हूँ इन आलीशान ग़ुफ़ाओं से?

दरो दीवार सब मेरे रक़ीब बन गये
नाँ फ़रमान हयाते नसीब बन गये
जब कोई नहीं दिखता है अपना मुझे
सिर मारता हूँ सज़र की लताओं से?

ग़ुमराह मत हो जानेमन मेरे लिए
पैदा किया हूँ मख़्लूक़ ने तेरे लिए
मिलेंगे क़यामत एक बार आकर कभी
मशरूफ़ हूँ तेरी मेहकती शदाओं से?

इश्क़ वालों का हाल बेहाल होता है
पहले ख़ुशी बाद में मलाल होता है
ग़लती कर बैठता है दिल बेवशी में 
रूहे शाद भी है शिद्दत की कलाओं से?

 दीपक बुझ गया हमेश के लिए
खड़ी है क़यामत इस कलेश के लिए
बे सहारा हो गया बदस्तू ज़माने में अब
तश्क़ीन मिलती है  रब की रजाओं से?

 तुझको चाहा था जीवन में अपने
मेहज़ तेरे लिए ही सजाये थे सपने
इत्मिनान नहीं है मुझे किसी का भी
मुक़्तलिफ़ हूँ ज़माने के ख़ुदाओं से?


मुकाबला करते हैं डटकर रक़ीबों से
रिफ़ाक़त करते हैं दिन भर हबीबों से
बना चुके मक़्तब तश्वीह का हम बहुत
काम नहीं चलता दर्वेश की शिफ़ाओं से?

तरमीम होना ख़ुद में एक तफ़्शील है 
दरिया के किनारे हंसों एक झील है
उदास मत हो मैं तेरे साथ हूँ शाक़िर
कामयाब होंगे हम रब की दुआओं से?

तेरी सूरत को दिल में बसा लिया हमने
दिल ही दिल में अपना बना लिया हमने
फ़शादियों से क़वायत करते रहेंगे डटकर
फ़रेब नहीं है मुझे कभी इश्क़ में क़ज़ाओं से?


नाता वफ़ाओं से जोड़े रहे!
मुख़ दुनियाँ से मोड़े रहे!

वादों में ग़म को निचोड़े रहे!
फ़िर भी जीवन में रोड़े रहे!

दिल का नहीं मेहबूबे रहा!
ग़म के सागर में डूबे रहा!

तश्वीह तेरी करता है दिल!
तुझ पर दिल से मरता है दिल!

आजा सनम तू बाहें मेरी!
कब से देखूँ मैं राहें तेरी!

तड़फ़े दिल है यादों में ग़म!
निकलेगा दम ये तेरे ही दम!

मुज़रा उल्फ़त हो जायेगा!
दिल भी बदस्तू सो जायेगा!

जीवन भी मेरा ढलने लगा!
यादों का मेला लगने लगा!

उल्फ़त चरागे बुझने लगे!
हारे मोहब्बत झुकने लगे!

दिल ने चाहा नँ तमहीद की!
तुझ पर उल्फ़त की जीद की!

रुषवा ज़माने में होने लगे!
ख़ातिर सनम की रोने लगे!

तीर नज़र का जब से चला!
सीखी मोहब्बत तब से कला!

समझा है शाक़ी अपना ख़ुदा!
ग़ैर से इश्क़े हुआ है जुदा!

ख़ाना पीना हुआ है हराम!
पी कर जब से उल्फ़त का जाम!


बहुत देर हो गई तू अब आया है!
बैठी हूँ  मैं बे चैन  राह में तू अब आया है!

जल रही थी आतिश दामन में मेरे कब से!
बिछड़ कर दिलवर हम से तू अब आया है!

जुदाई जीने नहीं देती तेरे बिन मुझको!
करके नुमाइश मेरी जहान में तू अब आया है!

बे क़रार थी तेरी सूरत को देखने हमदम!
 किसी ग़ैर से दिल को लगा कर तू अब आया है!

रहनुमाई में तेरा दिल पत्थर का हो गया!
वफ़ा को छुपाके बे वफ़ाई करने तू अब आया है!

जी नहीं रही हूँ मगर जिन्दगी है मेरी!
चिराग़ तो बुझ गये बदस्तू जलाने तू अब आया है!

सिर पे हाथ रखके बैठी हूँ मैं मुराद को लिए!
तोड़ कर वादा वादे को निभाने तू अब आया है!

बिता दूँगी यादों में तेरी ज़िन्दग़ी मैं रो कर!
जोड़ कर रिश्ता ग़ैर से जोड़ने तू अब आया है!

उम्र सारी गुज़र गई है मेरी इन्तज़ार में तेरे!
क़ज़ा नज़दीक़ सूरत को दिखाने तू अब आया है!


तू मेरी मोहब्बत है बादल ग़म छाए हैं!
दुनियाँ की दहशत में तुमने अपनाए हैं!

बागों में कोयल भी इक अरसे रोई है!
तुम कहाँ गये साजन दुनियाँ भी खोई है!
कुछ नहीं दस्तियाबे तुम हीं मन भाए हैं!
दुनियाँ की दहशत में तुमने अपनाए हैं!

तेरे चेहरे से जी भर मैं यूँ हीं खेलूँगी!
दुनियाँ के रंज अलम मैं हँसकर झेलूँगी!
निज धार सफ़ीना भी और मातम साए हैं!
दुनियाँ की दहशत में तुमने अपनाए हैं!

अब नहीं मुनासिब हो तेरा साथ छूट जाये!
नहीं जीऊँगी दिलवर तेरा हाथ छूट जाये!
 हिज़रत में मर जाऊँ नज़दीक नँ आए हैं!
दुनियाँ की दहशत में तुमने अपनाए हैं!

घर उजड़ गया मेरा नहीं दिखे किनारा है!
मत रूठके अब जाना बस तू ही सहारा है!
ये बस्ती रक़ीबों की हर हाल सताए हैं!
दुनियाँ की दहशत में तुमने अपनाए हैं!

दिल भूल नहीं सकता ऐ तुमको दिलजानीं!
 दुल्हन बन आई हूँ अब करो मेहरवानीं!
दुष्वार होइ जीवन दिल अश्क़ बहाए हैं!
दुनियाँ की दहशत में तुमने अपनाए हैं!


सारी दुनियाँ से नफ़रत हुई!
मुझे तुझसे मोहब्बत हुई!

तेरा वादा मुझे याद है!
मेरे दिल की तू फ़रियाद है!
अब वस्ले मशक़्क़त हुई!
मुझे तुझसे मोहब्बत हुई!

हम चाहत में अब तक जिए!
ग़म आँशू भी हँसकर पिए!
दिल सब्रे बरक़्क़त हुई!
मुझे तुझसे मोहब्बत हुई!

 दिल तुझको चाहे सनम!
आजा नज़दीक करदे रहम!
जग बेशक़ मज़म्मत हुई!
मुझे तुझसे मोहब्बत हुई!

तेरी यादों में दिल डूबता!
कणँ कणँ में तुझे ढूँड़ता!
तू मिली नाँ हरक़्क़त हुई!
मुझे तुझसे मोहब्बत हुई!


रुख़ पे लट उलझी लटकाए!
 मुझको नैंन शरवती भाए!

सुन्दर चेहरा दिल में बसता!
क़ायनात में तू ही दिखता!

ख़ूब सूरती नज़र झुकी है!
दिल में मेरे उतर चुकी है!

उसे भूलने रब नहीं कहता!
सच्चा प्यार जिगर में रहता!

उसका बदन नसीला दिखता!
यादग़ार में कविता लिखता!

दिल में हमने जान लिया है!
उसको ही रब मान लिया है!

लाकर उसको शेय ग़हाते!
अपने दिल को यूँ बहलाते!

कहाँ गई तू छोड़ अकेला!
जीवन मैंने दुख में झेला!

तेरा ख़्वाब नज़र में आया!
बैठी तुझको घर में पाया!

 मेरा साथ नँ कभी छोड़ना!
 दिल को मेरे नहीं तोड़ना!

उल्फ़त का दस्तूर नियारा!
आज इश्क़ भरपूर हमारा!

नहीं तोड़ना मुझसे यारी!
तेरे बिन मर जाऊँ प्यारी!

साथ तेरा अब छूट नँ पाये!
बेशक़ सितम ज़माना ढाये!

सच्चा प्यार उम्र भर होवै!
जिसको नहीं ज़िन्दगी रोवै!

ख़्वाबों खोया रहता हूँ मैं!
दुनियाँ ग़र्दिश सहता हूँ मैं!

गली गली में उसे पुकारूँ!
महलन उसके रोज़ निहारूँ!

देखत की है भोली भाली!
मेरी उस बिन झोली खाली!

शादी दौर आ गया क़ुरवत!
मेरी जैसे निकले तुरवत!

टपके आँशू तुझको लख़के!
आया पास भिखारी बनके!

भरी माँग सिन्दूर साजना!
सजनी है फ़रहान भावना!

मिले तसल्ली अपने दुख से!
घूँघट ज़रा हटा दे रुख़ से!

 दिलवर बिन मैं नहीं जी पाऊँ!
उसकी याद ज़हर पी जाऊँ!


नज़र झुका के जानमन बैठी क्यूँ मन मार
मैं तेरा हमराज़ हूँ मेरी ओर निहार!

बिन तेरे ओ साथिया जीवन बहुत उदास 
मंज़िल मुझको मिल गई जिसकी मुझे तलास!

लाखों में तू हूर है तेरा ही मख़्मूर 
बन्दिश नहीं जहान की इश्क़ मेरा भरपूर!

आँखें अपनी खोल के मेरी ओर निहार 
मैं तेरे अब पास हूँ दिल की बात बख़ार!

लख़ तेरे हालात को आता मुझे ख़याल 
कुछ तो मुँह से बोलदे किसका तुझे मलाल!

नहीं धीर दिल में बँधे लख़कर तेरा हाल
बैठी क्यों ग़ुम नाम सी कर अरमान हलाल!

बिख़री ज़ुल्फें ओ सनम बैठी लट लटकाइ
क्या है दिल की इक़्तिजा मुझको दे बतलाइ!

अश्क़ टपकते आँख से इनको मत टपकाइ
करले मुझ पे ऐतवार दिल को मत तड़फ़ाइ!

हर पल तेरा साथ दूँ मेरी तू हमराज़
सभी दूर हैं फ़ासले चुन मुझको सरताज़!

दुनियाँ में मुझको नहीं किसी ग़ैर परवाह 
हम तुम दोंनों एक हो कर लेंगे निरवाह!

चलता हूँ अब आशियाँ रखियो ऐहतेयात 
दिल मत देना ग़ैर को मेरी तेरी बात!


ख़ामोश फ़िज़ाओं में रवानी आ रही है
गुज़रे पलों की कहानी आ रही है
मशरूफ़ रहता हूँ इसी बात को लेकर
इश्क़ के यौवन में जवानी आ रही है!

दिल के लहू से तेरा नाम लिखा था 
हर काम छोड़ सरे आम लिखा था
की नहीं ख़लिश किसी बात की हमने
इश्क़ में तेरी इनायत जाम लिखा था!

बदन को मलीन करके तू क्यूँ बैठी है
अपने आप में सिमट कर तू क्यूँ बैठी है
आया हूँ मैं तेरे पास ग़नीमत निभाने को
मुखड़ा मोड़ कर मुझ से तू क्यूँ बैठी है!

मैं तुझे याद करता हूँ
रब से फ़रियाद करता हूँ
ज़िन्दग़ी में आये तू मेरी
ज़माने से ज़िहाद करता हूँ!

तू उदाश क्यूँ होती है
 ग़म का बीज क्यूँ बोती है
मैं तेरे साथ हूँ ज़िन्दग़ी भर
इस तरह से तू क्यूँ रोती है!

मुझको मेरे ग़म की सजा दे दे
धड़कनों की धड़कती शदा दे दे
बिछड़के तुझसे मलीन हो गई हूँ मैं
आकर मेरे क़रीब आशिकी हवा दे दे!

जीवन में ख़टाश आ गई!
उसको देखा मिठाश आ गई!
जी चाहता है उसे छूने को!
धड़क़नों में हवाश आ गई!

नफ़रत का घूँट पी लिया हमने
जीवन भी अपना जी लिया हमने
तुरवत में फ़िर मिलेंगे आपसे सनम
होठों को हमेश के लिए सी लिया हमने!

मोहब्बत का क़ाफ़िला लिए चलता हूँ
दो घूँट जाम के पिए चलता हूँ
ऐहसान है उनका मुझ पर अभी
सौग़ात उनकी उन्हें दिए चलता हूँ!

बरबाद जब से हो गये हैं
अपने आप में रो गये हैं
पी कर ज़हर तेरे नाम का
अब जीवन भर सो गये हैं!

तेरी नज़र ने जादू कर दिया
मुझे बे क़ाबू कर दिया
बे ख़ुद सा रह गया मैं तभी
सौग़ात में आँशू कर दिया!

मिलने के अरमान अधूरे हैं
इश्क़ है सब काम अधूरे हैं
तक़दीर का मारा हूँ लावारिश
इसलिए ग़ुमनाम अधूरे हैं!

किसी चीज के बहाने आया हूँ
इसलिए तेरे सामने आया हूँ
क़ुबूल करले मुझे जानेमन 
तेरे हाथ को माँगने आया हूँ!

तेरे बहाने चाँद को देखता हूँ
उसमें तेरी तस्वीर को देखता हूँ
ख़्वाब के पहलू में आकर सनम
अपनी ही तक़दीर को देखता हूँ!

तेरी याद में खो गया हूँ मैं
पत्थर का बुत हो गया हूँ मैं
तू जगायेगी मुझे जगा नहीं पायेगी
लैहद में नँ जाने कब का सो गया हूँ मैं!

रूठ कर परवाना चला गया
ग़मों से हमको मिला गया
हाले दिल सुनाने को बाकी रहा
जुदाई का जाम जी भर  पिला गया!

वो बात ही क्या जिसमें  वफ़ाई नँ हो
वो प्यार ही क्या जसमें रुष्वाई नँ हो
आता है तवायफ़ का दौर ज़िन्दग़ी में
वो तड़फ़ ही क्या जिसमें तन्हाई नँ हो!

प्यार निभाना है हमको
तुझे अपना बनाना है हमको
जियें तो जियें कैसे जियें हम
कसमें खा कर वादा निभाना है हमको!

नाता वफ़ाओं से जोड़ा है
मूँ तेरी तरफ़ से नहीं मोड़ा है
ज़माना बन्दिश बेशक़ लगाए 
फ़िर भी तेरा साथ नहीं छोड़ा है!

इश्क़ में दुश्वार बनता है ज़माना
बदनाम करने का ढूँढता है बहाना
शरीफ़ों को मिस्मार करता है मुक़ाम से
बन जाता है दुनियाँ में उन्हीं का फ़साना!

हदों से गुज़रना चाहता हूँ
तेरे दिल में उतरना चाहता हूँ
बनके आजा तू रहनुमा एक बार 
तेरी बाहों में उलझना चाहता हूँ!

दूर रहकर भी तेरे पास हूँ मैं
लग जा ग़ले से तेरी आश हूँ मैं
भटक रहा हूँ मैं ग़लियों में कब से
तुझ से मिलने के लिए उदाश हूँ मैं!

हस्मत मेरी जहान में तेरे दम से है
मुस्कान भी लवों पे तेरे दम से है
पा लिया है तुझको क़हर के मंजर में
जो कुछ भी है आज वो तेरे दम से है!

दर्दे ग़म की दवा दे दे
मुझे सुबह की हवा दे दे
मैं ठीक हो जाऊँ जानेमन 
बस इतनी सी दुआ दे दे!

तुम्हें दिल ने सलाम कर दिया
दुनियाँ ने हमें बदनाम कर दया
आँशू अभी तक जज़्ब हैं मेरी आँखों में
अपना ख़याल आपने सुबहो शाम कर दिया!

अश्क़ों के दरम्यान में मन्जधार के घेरे हैं
इश्क़ ख़ुदा की शेय है आते जाते फेरे हैं
दुनियाँ के दस्तूर में निभती रहे ग़नीमत भी
ग़म जो देकर चले गए जाते जाते मेरे हैं!

Comments

Popular posts from this blog

गुरू भगवान

ग़म-ए-आशिक़ी

राम तिलावत