हुस्नो शबावे हिजर
1. हुस्नो शबावे हुआ है हिजर
घायल नँ जाने है कब से जिगर
तौफ़ीक दिल की तो ख़ो ही दिया
तेरा ज़ुबा पर है कब से ज़िकर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
2. तेरे ग़मों में तो रो ही दिया
चेहरे को अश्कों से धो ही दिया
फ़साना मोहब्बत बन ही गया
पहँची हैं यादें भी जब से शहर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
3.अपने इरादों से गिर ही गये
तेरी मोहब्बत में मर ही गए
जीने नँ दिल को तमन्ना रही
दिखता ज़माने के रुख़ पे हशर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
4.तोड़ा है दिल को जो मेरे सनम
देनी है मुझको को जो दे दे कसम
पहलू में तेरे हमेशा रहूँ
पूरी जो करनी है करले कसर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
5.चाहत में तेरी पिघलता गया
ख़्वाबों की दुनियाँ में ढलता गया
नज़रों में आया है अपना लहू
सुकूँ नाँ लहद में बरसे क़हर
हुस्नो शबावे है हिजर||
6.सूनी पड़ी थी दुनियाँ मेरी
तेरी तरफ़ थी नजरिया मेरी
मेरी तरफ़ नाँ रुख़ भी किया
तू ही तो दिख़ता नज़रें जिधर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
7.यादों को तेरी ही अपना लिया
हद से जियादा भरोसा किया
मैंने सहे जो बेहतर सितम
ज्यादा ग़ुमाँ है नँ दिल में फ़िकर
हुस्नो शबाबावे हुआ है हिजर||
8.दिल को नहीं था कहीं भी सुकूँ
इसी दायरे में बना है जुनूँ
तनहाई के घूँट पीता रहा
तेरी ही उल्फ़त में था बे ख़बर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
9.तूफ़ान जीवन में आते रहे
फ़रिश्ते भी हमको सताते रहे
नाँ कामयाबी तो हाँसिल हुई
करता था फ़िर भी इश्क़े सफ़र
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
10.मिलने नहीं तू आया ग़ले
दिल में मोहब्बत के थे सिल्सिले
यौवन में तेरे यूँ बे ख़ुद हुआ
तरसी हैं अखियाँ शामे फ़जर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
11.वीरान राहें दिखता नँ तू
घर में नँ था बाहर नँ तू
अश्कों की माला ही पहने रहे
आने का तेरे यूँ करते सबर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
12.ज़ख़्मे बफ़ाओं को सहते रहे
मोहब्बत के आँसू बहते रहे
जीवन का उनको मुकद्दर समझ
फ़िरते थे गलियों में दर से बदर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
13.होठों पै सुर्खी संदल बदन
मुश्की बहारें खिलता चमन
मुझ पर नँ कोई भरोसा रहा
तोड़ा है नाता ओ बे ख़बर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर||
14.यादों के जुगुनूँ बरसने लगे
तन्हाई में हम तरसने लगे
ख़ुद से ग़िला भी करता रहा
उस पर नहीं है कोई असर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर ||
15.तुझको चुना था हमने सनम
तोड़ी है तूने दिल की कसम
शदियों जिये तू यही है दुआ
तुझको लगे नाँ किसी की नजर
हस्नो शबावे हुआ है हिजर ||
16,यादों को हर पल फ़रमा रहे
ख़ल्क़त से हम तो टकरा रहे
हाँसिल शिक़स्तें हमको हुईं
रहकर अकेले मिटी नाँ फ़िक़र
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर!
17,धाया सनम तू तन्हा है छोड़
हमसे मोहब्बत लीनी है तोड़
हिज़रों में जीते हैं तनहा रहे
आँसू हैं चश्मों नँ कोई क़दर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर!
18,झूठी हैं कसमें हैं वादे तेरे
झूठे सभी हैं इरादे तेरे
तुझ भरोसा हमने किया
करते प्रतीक्षा बैठे शजर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर!
19,आँखों से निदिया है मेरी उड़ी
ख़्वाबों में आई थी कोई कुड़ी
अरमान दिल में आया तभी
दिल में समाए बनके लहर
हुस्नो सबावे हुआ है हिजर!
20,दिल की दुआ है ख़ुदा से यही
करना मुक़म्मल तमन्ना यही
दीदार काफ़ी है उसका मुझे
इतनी तू मुझ पे करदे मेहर
हुस्नो शबावे हुआ है हिजर!
तेरी इनायत!
इधर तेरी यादें उधर है शिक़ायत!
बेक़स रहा हूँ तेरी इनायत!
अश्कों की माला गले में पड़ी है!
मेरी किसी से मोहब्बत लड़ी है!
जिगर आईना ये बिन तेरे सूना!
हर आहें दिल में तेरी क़िनायत!
बेक़स रहा हूँ तेरी इनायत!
उसकी तड़फ़ अब खुदा हो गई है!
मेरी प्रेमिका मुझसे जुदा हो गई है!
मेरी ज़िन्दगी अब वीरान दिखती!
दुनियाँ से अब तो नहीं है रिफ़ाक़त!
बेक़स रहा हूँ तेरी इनायत!
हिजर में हुआ हूँ तरे ग़म का रोगी!
दर दर भटकता बनकरके जोगी!
आतिश का दरिया उमड़ने लगा है!
खाली पड़ी है मेरी तिजारत!
बेक़स रहा हूँ तेरी इनायत!
रो रोके हो गईं बे चैन आखें!
क़फ़श हो गया हूँ तेरी सलाखें
तस्वीह करता तेरा नाम लेकर!
हँसती है मुझ पे सारी सियासत!
बेक़स रहा हूँ तेरी इनायत!
बे ख़ुद होना!
Writer
Gopalsingh
Mo,6398 347 628
जब तुमने जो बे ख़ुद किया!
ग़म आँशू का हमने पिया!2
मुझको तजकर कहाँ रम गये!
दिल के दीपक सभी बुझ गये!
ज़ख़्मों ने हमको मरहम दिया!
ग़म आँशू का हमने पिया!2
हमने गलियों ज़ियारत करी!
नहीं सुख से तिजारत भरी!
ऐसी हालत में सब ग़म लिया!
ग़म आँशू का हमने पिया!2
अब नहीं कर मुझ पे जफ़ा!
करदे दो पल तू दिल से वफ़ा!
मेरा तड़फ़े है हर दम जिया!
ग़म आँशू का हमने पिया!2
तेरे आने से जाये तपन!
तुझको अक्सर है मेरा नमन!
ख़ुद मत कर तू बरहम जिया!
ग़म आँशू का हमने पिया!2
उदासी के बादल छा गए हैं
किलकारियों के गीत गा गए हैं
मेरी दुनियाँ वीरान हो गई है अब
रात की रानी के फ़ूल भी मुरझा गए हैं!
बीते हुए लम्हात भी आ गए हैं लौटकर
ख़यालों में
सताते हैं मुझको हरपल उलझा हुआ हूँ
सवालों में
नाराज़ग़ी नहीं है ग़वारा किसी मोड़ पे
कभी
बे वश हूँ मैं उसके लिए हालात भी क़तरा
गए हैं
उलझी है ज़िन्दग़ी अब तक ज़माने के
फ़सादों में
बेताव रहता हूँ हर वक़्त मैं दिलवर के
इरादों में
दिल का ग़ुलशन आतिश में जल गया है
अब तो
आ करके फ़रिश्ते तुरवत को मेरी सुलझा
गए है!
कहेंगे तुमको बादेशबा हम तड़फ़ती इन
निग़ाहों से
निकलेगी दिल की चुभन सिसक़ती इन
आहों से
इश्क़ भी इन्तिहाँन पर पहुँचेगा ख़ुदा की
फ़ज़्ल से
दो जिस्म एक जान दुनियाँ में दाश्ताँ दरशा
गए हैं!
यादों के तराने भी अब ज़वेदा ग़ुज़ते रहेंगे
ज़हान में
बातें करेंगे आप से कभी दो चार मिलके
शम्सान में
ख़ाक़ भी करेगी इशारा उड़के मोहब्बत का
तुम्हें
मरके भी हम शौक़ से इश्क़े तब्रिश फ़रमा
गए हैं!
1,
दिलवर मेरा दूर है जाऊँ कैसे पास,
ख़ुदा मुझे बतलाइदे है तुझसे अरदास,
2,
गलियों में भटकत फिरूँ लेकर उसका नाम,
फ़ितरत ऐसी हो गई छूट गये सब काम,
3,
मुझे दिलाशा दे गया चला गया वो छोड़
राह तकूँ दिन रैन मैं टूट गई है डोर,
4,
बिछुड़न भी ऐसा हुआ जीवन भर का शोक,
सजा इश्क़ की दे चले अश्क़ धार नहीं रोक,
5,
खाना दिल नहीं भावता सहे बहुत अपमान,
ख़ल्क़त ने रूशवा किया कहत ज़लील बयान,
6,
मेरे सँग तुमने किया सब है मुझको याद,
एक बार बस आयके सुनलो तुम फ़रियाद,
7,
अपना तुम्हें बनायके जीवन भर दूँ साथ,
कसम उठाके मैं कहूँ सिर पे तेरे हाथ,
8,
सोचत सोचत ऐ सनम सोच भयो दिन रात,
मंज़िल हाँसिल नाँ हुई रह गई मन में बात,
9,
लख़कर राह पुकारता कहाँ गया तू यार,
दिल की आश मिटाइजा करके थोड़ा प्यार,
10,
प्यार प्यार आग़ाज़ हो बढ़ै प्यार असरार,
शीतल मन हो प्यार से करै प्यार उपकार,
11,
ताबीरे तश्लीम की हुआ दिले तश्कीन,
दिलवर भी मदहोश हो थोड़ा सा ग़मग़ीन,
12,
तड़फ़ाओ मत ऐ सनम जीवन पे बन आइ,
प्यासा हूँ दीदार का रही मौत टकराइ,
13,
उस दिन मेरे चित्त को लिए चला चितचोर,
तन्हा मुझको छोड़के देखत मैं चहुँ ओर,
14,
बहे अश्क़ हैं इश्क़ में मेहबूबे सरकार,
उजड़ हयाते रह गया दुनियाँ है दुश्वार,
15,
लिए नुमाइश चल पड़ा आयेगा मेहबूब,
लिपट ग़ले से मैं मिलूूँ होइ मोहब्बत ख़ूब,
16,
दिल की दिल में रह गई पास नहीं वो आइ,
तन्हा जीवन बीतता गया शोक अति छाइ,
17,
रुख़े ख़मोशी छा गई देखा जबसे यार,
ग़ैर अमानत हो गया कर नहीं पाया प्यार,
18,
जहाँ भी हो दिलदार तुम रखना मुझको याद,
भूल नँ जाना एक पल है तुमसे फ़रियाद,
19,
दुआ यही धनवान हो बेशक़ मैं दरवेश,
उम्र लगे तुझको मेरी हाफ़िज़ ख़ुदा हमेश,
20,
तेरा मेरा इश्क़ ये करेै ख़ुदा स्वीकार,
जन्म दूसरा फ़िर मिलै होइ तेरा दीदार,
21,
उतर चुका दिल में कोई बढ़ै मोहब्बत रोज,
फिरूँ भटकता रात दिन मुझको उसकी खोज,
22,
बेक़स हूँ उसके बिना अपना दिखै नँ कोइ,
बढ़ती हैं नाँकामियाँ अँखियाँ ग़म में रोइ,
23,
इश्क़ बदस्तू बन गया रोक नँ कोई पाइ,
टूट जाय दीवार ग़र यादग़ार बन जाइ,
24,
गहा इजाज़त वस्ल की दिखलादे पहचान,
आ करके आग़ोश में मिटा देय अरमान,
25,
करो इनायत ऐ ख़ुदा मिलने की अरदास,
बुझे प्यास दीदार से मिट जायेगी आस,
26,
सिमट हिजाबों महज़बीं लगती है तू हूर,
दिलक़श है चेहरा तेरा दिलक़श है ये नूर,
27,
राह निहारे मैं रहा दिलवर की तफ़्तीश,
दिल से प्यारा वो लगे मान लिया था ईश,
28,
जगत मुन्सितर मैं हुआ इश्क़े वफ़ा शदीद,
मरहम दर्दे लाज़मी होवैगी जब जीद,
29,
छाई है दिल बेवशी शाक़ी रुख़्शत होइ,
टूट पड़ी हैं ग़र्दिशें हिज़्र जी रहा रोइ,
30
किसी हुस्न पे मर मिटे हो बैठे मजबूर,
घर के रहे नँ ग़ैर के ख़ामोशी भरपूर,
31,
होवै दिल मन्सूब जब हो शाक़ी दीदार,
मन्ज़िल हाँसिल होइगी टूटै जग दीवार,
32
अरमानों की सेज़ पे बैठा हूँ सिर मार,
लगी आतिशे हिज्र में है शाक़ी दरक़ार,
33,
मक़ाँ मयस्सर लाज़मी चाहत हो तरमीम,
शीरीं ज़ुबाँ स्वभाव हो अता करे तशलीम,
34,
काम जगत के सब करो हो करके मुख़्तार,
इश्क़ किसी से नाँ करो बला बुरी है यार,
35,
मंज़िल वो ही पा सकै दिले मुक़द्दिश होइ,
महारत हाँसिल होइगी बेशक़ लग्ज़िश होइ,
36,
तेरा मेरा साथ था पड़ गई साथ दरार,
दुल्हन किसी हो गई निभा दिया क़िरदार,
37,
दिले मुख़्तसर प्यार ये गहा दिया हज़रात,
किया ग़वारा बे ख़ुदी हो गई सँग में घात,
38,
नींद उड़ गई नैंन से होइ जिग़र बेज़ार,
झाँकत दर दर मैं फ़िरूँ हो सबहीं बेक़ार,
39,
हिज़रे आतिश मैं जलूँ पढ़के तेरा क़लाम,
चेहरा है दिल बीच में तुझको मेरा सलाम,
40,
दिले मुख़्तलिफ़ हो गया मेरे मन का मीत,
यादों का मेला लगा गाता ग़म का गीत,
41,
जीवन है इस हाल में मौसम ग़मे सताइ,
ज़ावेदा हालात हैं मुस्तफ़ीद नहीं पाइ,
42,
यादों का लश्क़र लिए फ़िरता हूँ बाजार,
लोगों ने पाग़ल कहा बना लिया आधार,
43,
इश्क़ रिवायत पे टिका ये है सोच समाज,
रेहमत इश्क़ रहीम की सज़दा इश्क़ नमाज,
44,
सितम जहाँ ने ढा दिए नहीं शरीक़े धीर,
दे कर मुझे शिक़स्त को बन बैठा बे पीर,
45,
सबसे गहरा इश्क़ है और शेय नहीं होइ,
इश्क़ रज़ा रहमान की ग़मे मुख़्तलिफ़ होइ,
46,
शाक़िर हो इश्के किया पैग़म्बर ले नाम,
ऐतवार मसरूफ़ था पीकर उल्फ़त जाम,
47,
इश्क़ शेय आतिर शमाँ चरचा होय जहान,
सहै क़वायत जो अगर वो ही बड़ा महान,
48,
शातिर है तू बे वफ़ा ऊँची है परवाज़,
पत्थर जैसा दिल तेरा छुपा हुआ है राज़,
49,
मुन्फ़रीद ये इश्क़ है और मेरी जज़बात,
धड़क़न का मैं साज़ हूँ दिल भी ऐहतेयात,
50,
दिल्लग़ी दिल की लगी रुख़ से होइ ज़हीर,
बह जाता जज़्बात में हो मन्ज़िल तश्ख़ीर,
51,
चेहरा है मेहताब सा बिंदिया शम्से नूर,
पेशानी झूमर तेरा फ़लक़ लगे है हूर,
52,
कोई है शादिक़ सनम दिल में उतर चुका,
वादे कसमें झूठ सब मुझसे मुक़र चुका,
53,
रूह मेरी तड़फ़े सनम है मुझ से तू दूर,
आ करके आग़ोश में होइ इश्क़ भरपूर,
54,
बिंदिया शम्स ज़हीर हो गेशू हैं लहराइ,
शंगे मर मर तू बनी सुरख़ी होठ सुहाइ,
55,
दिले इश्क़ मैंने किया दे नहीं पाया साथ,
पड़ी माज़िरत बे ख़ुदी छूट हाथ से हाथ,
56,
ताज महल है दिल मेरा इश्क़ बनी मीनार,
ज़बाँ मसल्सल रहे जहाँ टूटे नहीं दीवार,
57,
लहराया परचम तभी वफ़ा फ़ैज़ फ़िर्दोश,
ख़ुश्बू उड़े जहान में आवै दिल सन्तोश,
58,
तुझे मुबारक़ बन्दग़ी मेरी लाख़ दुआ,
जिये हजारों साल तू मेरे शाहे ख़ुबा,
59,
दिलोजान से मर मिटे ओ शाक़ी बदक़ार,
निकला है तू बे वफ़ा हमको नहीं दरक़ार,
60,
इश्क़ सज़ा मरहूम है करना मत हज़रात,
टूटे दिल मेहरूम हो अपनाना मत घात,

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