दिल का रिश्ता
1. दिल का रिश्ता जोड़ करके तो देख||
किसी के दिल में उतर करके तो देख||
कोई तुझे अपना बना ही लेगा||
किसी को तू अपना बना करके तो देख!!
दिल का रिश्ता जोड़ कर के तो देख||
2.तेरा नसीब भी तुझे मिल जायेगा||
कोई ग़ैर भी तेरा हो जायेगा||
मिलैं ग़म ग़र मोहब्बत में घवराना नहीं||
बिगड़ी तक़दीर को ग़ले लगा करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़ कर के तो देख||
3.करले तौबा निज ग़ुनाहों से||
देखले जगत को पिघलती निग़ाहों से||
बख़्श देगा ख़ुदा जग़ह ज़न्नत में तेरे लिए||
किसी को प्यार से ग़ले लगा करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़कर के तो देख||
4.तक़दीर भी ख़ुल जायेगी तेरी||
बिगड़ी भी बन जायेगी तेरी||
हैरत में दिल को लाना नहीं कभी यार||
दो बोल प्यार के किसी से बोल करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़ कर के तो देख||
5.हो गया रुशवाह तू ज़माने में||
नैया पड़ी है तेरी मज़धार के ख़जाने में|||
ख़ुल जायेगा अल्लाह का दर तेरे लिए||
अपनी ग़लतियों का ऐहसास करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़ कर के तो देख||
6,ऐहसान करले दूसरों पर बन्दे||
छोड़कर जगत के तू सभी धन्दे||
सुनेगा मख़्लूक़ एक दिन तेरी फ़रियाद||
आँखों से ग़म उसके लिए बहा करके तो देख||
दिल से रिश्ता जोड़ करके तो देख ||
7, तक़दीर को झुककर सलाम कर||
उसके नाम का रात दिन कलाम कर||
यही तेरे मक़ाम का इन्तिहाँन होगा शबाब को||
ऐसा ऐहतराम आज़मा करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़ करके तो देख||
8,ख़ुद को समझ तू हो कर भी नहीं है||
दो दिन का मुरीद है यहाँ कल कहीं है||
माँगले अल्लाह के मुस्तफ़ीद जीवन साथी को||
ऐसी इब्तिदा अक़्शर तू करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़ करके तो देख||
9,करके वादा हम से गया है हुज़ूर||
मेरे हयाते वो अब ज़ियादा है दूर||
नफ़रत की तब्रिश में जीते हैं मरते यार हम||
एक नज़र मेरी तरफ़ करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़ करके तो देख||
10,तेरा ख़याल दिल में रह रहके आता||
ताक़ता हूँ चहुँओर मंज़िल नहीं पाता||
मैं बदनसीब हूँ जानेमन ग़िला किससे करूँ||
मेरी बदनसीबी पर तरस करके तो देख||
दिल का रिश्ता जोड़ करके तो देख||
दे दे जीवन भर का साथ यही बस दिल का कहना है!
रुष्वा तेरी ख़ातिर हुए हरिक़ अब ग़म को सहना है!
लाली होठों पर है लगी माँग सिन्दूर दमकता है!
आई तेरे बदन बहार हिजाबे रूप चमकता है!
बजती पायल की झन्क़ार ग़ुलाबी साड़ी गहना है!
रुश्वा तेरी ख़ातिर हुए हरिक़ अब ग़म को सहना है!
होकर दुनियाँ से हम ख़फ़ा याद में तेरी रहते हैं!
नज़रों लेके तेरा अक़्श इश्क में मातम सहते हैं!
ख़ाना पीना है बेकार इश्क़ जज़्बातों मरना है!
रुश्वा तेरी ख़ातिर हुए हरिक़ अब ग़म को सहना है!
पीकर तेरे ग़म का जाम यार गलियों में फ़िरते है!
दिल से हो करके बे ख़वर इश्क़ की माला जपते हैं!
फ़ीके तीख़े हैं अरमान फ़क़ीरी लिवास पहना है!
रुश्वा तेरी ख़ातिर हुए हरिक़ अब ग़म को सहना है!
बढ़ता इश्क़े है अब रोज यार दिलदार मेरे दिल में!
कैसे जिएँ अकेले हुए पड़ा है जीवन मुश्किल में!
होकर दुनियाँ से मेहरूम मयष्सर मकाम करना है!
रुश्वा तेरी ख़ातिर हुए हरिक़ अब ग़म को सहना है!
चरचा कायम होइ जहान सीख दुनियाँ को मिलती है!
जाए सूख सजर जब डाल कली नायाब निकलती है!
होगी फिर से जीवन लहर अवामे ग़म को सहना है!
रुश्वा तेरी ख़ातिर हुए हरिक़ अब ग़म को सहना है!
तेरी ख़ातिर दिलवर जिये मरेंगे ख़ातिर ही दिलवर!
अब के जन्म दूसरा होइ मिलेंगे तुझ से ही दिलवर!
दुनियाँ करेगी हमको याद कदम अब ऐसा रखना है!
रुश्वा तेरी ख़ातिर हुए हरिक़ अब ग़म को सहना है!
दिल में दिलवर यादें हैं!
बे नज़ीर फ़रियादें हैं!
आती है वो ख़्वाबों में!
बैठी सिमट हिजाबों में!
सुर लै ताल जबाबों में!
ख़ुश्बू उड़े ग़ुलाबों में!
मेहशर है ऐहबाबों में!
छाया इश्क़ शबाबों में!
आती रोज़ बहार है!
रोशन भी ग़ुल्ज़ार है!
रुश्वा बेशक़ ख़ाक हूँ!
तुझ पर मैं मुश्ताक़ हूँ!
छुरियाँ चली हैं जब से दिल!
पाना इश्क़ हुआ मुश्क़िल!
जीता हूँ नाँ मरता हूँ!
यादों दिले शिसकता हूँ!
जीवन क़म्शिन हो गया!
सपना बनकर ख़ो गया!
करूँ इल्तिज़ा यार से!
मिलजा मुझको प्यार से!
नाँ परवाह ज़माने की!
तुझे इक़्तिजा पाने की!
ग़मे ज़िन्दग़ी जी रहा!
घुट घुट आँसू पी रहा!
बनके दुल्हन आजा तू!
मेरी प्यास बुझा जा तू!
ख़ोया ख़ोया रहता हूँ!
मातम दिल से सहता हूँ!
तेरा इश्क़ मरीज़ हूँ!
मानूँ तुझे अजीज़ हूँ!
हिज़रे क़ातिल रजनी है!
गई छोड़ कर सजनी है!
इश्क़ हिलोर जलाली है!
बजती दिले क़वाली है!
यादें जब से आती हैं!
आख़ें भी भर आती हैं!
जी भरके रो लेते हैं!
ख़्वाबों में ख़ो लेते हैं!
इश्क़ जिगर की प्यास है!
जीवन बहुत उदास है!
मेरी प्रेम कहानी तू!
दिल की हवश पुरानी तू!
मलिका हुश्न दिवानी तू!
शज़रे शाख़ सुहानी तू!
ज़ीनत चाँद सितारों में!
झलके नूर नजारों में!
तू ही सनम शिताब है!
इश्क़े बनी किताब है!
बँधी प्रेम की डोरी है!
सुन्दर सी इक छोरी है!
बातें मुझसे करती थी!
दिलो जान से मरती थी!
अपनी हद में रहती थी!
कहने से कुछ डरती थी!
प्यारी प्यारी बोली है!
वो मेरी हमजोली है!
दिखती ख़ूब सूरत है!
मंदिर की वो मूरत है!
सजी सेज है फूलों की!
तज दे आशा शूलों की!
मैं तेरा तू मेरी है!
काहे की अब देरी है!
आजा मुझको प्यार दे!
वस्ले रात गुज़ार दे!
मैं तुझ में खो जाऊँगा!
सदाँ तेरा हो जाऊँगा!
भरी इश्क़ की थाली हूँ!
तेरा जिगर सवाली हूँ!
हम्द ख़ुदा से करता हूँ!
तुझको दिल में रखता हूँ!
दिल से तेरा नाज़िर हूँ!
फ़िर भी तेरा शाक़िर हूँ!
ज़रा इनायत करदे तू!
तक़दीरे रँग भरदे तू!
पाक़ मोहब्बत जाम हूँ!
तू राधा मैं श्याम हूँ!
शीरीं दिले क़लाम है!
मेरा तुझे सलाम है!
दुआ यही है रब से दिल!
जायें आशिक़ बिछड़े मिल!
इश्क़ दीप जलते रहें!
फ़ूल महल ख़िलते रहें!
हुक्म इलाही इश्क़ है!
मानै दुनियाँ रिश्क़ है!
इक प्यार से प्यारा है
यादों में रहता हूँ!
दुनियाँ से तन्हाई
हर ग़म को सहता हूँ!
उल्फ़त में जीते हैं
बे चैन मेरी बाहें!
दिन रात हुए मुश्क़िल
हैं दर्द भरी आहें!
अब आजा तू मिलने
तेरे दिल में रहता हूँ!
दुनियाँ से तन्हाई
हर ग़म को सहता हूँ!
मुख़ मेरी तरफ से भी
अब सब ने मोड़ा है!
तुझसे ही जीवन का
ये नाता जोड़ा है!
इक तू ही मेहबूबा
मैं दिल से कहता हूँ!
दुनियाँ से तन्हाई
हर ग़म को सहता हूँ!
तेरे हाथों में मेहन्दी
जब सनम रची जाये!
तब याद मुझे करना
तेरी माँग भरी जाये!
ख़ुश रहे हमेशाँ तू
फ़रियादें करता हूँ!
दुनियाँ से तन्हाई
हर ग़म को सहता हूँ!
जब प्यार किया तुझसे
अब प्यार निभाना है!
दुनियाँ से हमको भी
आख़िर चले जाना है!
रह जायेंगी जग यादें
ये सबसे कहता हूँ!
दुनियाँ से तन्हाई
हर ग़म को सहता हूँ!
लम्हा लम्हा प्यार से!
मिलता हूँ मैं यार से!
क़ातिल नैंन चमकते हैं!
दिल में मेरे बसते हैं!
दिल की बात अधूरी है!
पाना इश्क़ जरूरी है!
आफ़ताब दिल हो जाता!
ग़म का आलम सो जाता!
फ़ूल चमन में खिलते हैं!
जब भी दो दिल मिलते हैं!
याद सनम की आ गई!
बेताबी तड़फा गई!
हिज्र सनम के जी रहा!
आँसू ग़म के पी रहा!
छोड़ दिया जब साथ है!
हाथ नहीं अब हाथ है!
दिल मेरा तब तोड़ दिया!
मुखड़ा मुझसे मोड़ लिया!
सुकूँ नहीं अब होश है!
मेरा दिल ख़ामोश है!
इश्क़ खुदाय इजाज़ है!
छुपा हुआ ये राज़ है!
आजा निकल हिजाब से!
बातें करूँ हिसाब से!
मेरी है तू मेहबूबा!
चाहत में कब से डूबा!
झूमर तेरे पेशानी!
है सपनों की तू रानी!
नथनीं नाँक दमकती है!
बिंदिया ख़ूब चमकती है!
रस है तेरी बातों में!
जगर मगर है रातों में!
चुरियाँ सजे कलाई में!
मेहशर तेरी सगाई में!
पहने साड़ी चमकीली!
लगती होगी सरमीली!
सुर्ख़ी होठ रची होगी!
मेहन्दी हाथ लगी होगी!
माँग भरी जब जायेगी!
याद मुझे तब आयेगी!
डोली को ले जायेगा!
ग़मे उम्र दे जायेगा!
याद किसी की मुझे आ गई है
प्यार पे मेरे जवानी छा गई है
मुज़रा हुआ है उल्फ़त में अब!2
सूरत किसी की मुझे भा गई है
राह निहारे उसकी दिन रैन हम!2
हशीना ख़्वाब में कोई आ गई है
हसरत है मुझे उसको पाने की!2
मेरे गाँव में रहकर गीत गा गई है
दिन बिताए उसके साथ हँसकर!2
देखके मेरी ओर चुटकी बजा गई है
खामोसी मुझे व्यापने लगी हैं अब!2
घायल कर दरो दीवार हिला गई है
हालात बेक़ाबू हो गए जिन्दगी के!2
कभी न मिले देकर ऐसा सिला गई है
कर रही है मौज आसियाने में वो!2
मौत का क़फ़न मेरे लिए उढ़ा गई है
दिल का रिश्ता जोड़ने लगा हूँ मैं!2
वो जोड़ने के बजाय बेचैनी बढ़ा गई है
पहनकर पोश नायाब तू जब दुल्हन बनी होगी!
मेहशर हो बारातियों का साजन ने माँग भरी होगी!
प्यार का दामन छूट जायेगा मैं जी नहीं पाऊँगा!
करते करते याद को तेरी एक दिन मर ही जाऊँगा!
छोड़ मत जाना किसी हाल में साथ दे देना मेरा!
होजा मेरी तू हमेश के लिए सलाम ले लेना मेरा!
अरमान करता था तेरा मैं जाग जागके रातों में!
समाई थी दिल में नूरे नज़र हरिक जज़्बातों में!
भूलके भी कभी तुझको भुला नहीं सकते हैं हम!
क़र्वेतश्नग़ी में नदीम कभी रुला नहीं सकते हैं हम!
निभानी होगी वो कसम जो उठाई थी आपने!
मेरे नाम की मेहन्दी हाथों में रचाई थी आपने!
असीर हूँ तेरे हुस्न का ग़नीमत को निभादे ज़रा!
इन्तिहान है आख़री क़दम इश्क़ में उठादे ज़रा!
मत देख तू ज़माने को मैं ज़माने की ओर देख लूँ!
मुस्कुरा के तू मेरी ओर देख मैं तेरी ओर देख लूँ!

Comments