नज़र का इशारा
एक इशारा एक नज़र||
बना लिया है दिल ने घर||
याद तेरी अब आ गई||
दिल को भी तड़फ़ा गई||
पड़ा हुआ था हिज्र में||
गया समै इस फ़िक्र में||
इश्क तशब्बुर छा रहा||
गीत कोई अब गा रहा||
बैठी शिमट शबाब में||
लगती हूर हिजाब में||
इश्क बक़ार हिक़ायत में||
होइ ज़िहाद शिक़ायत में॥
अब तो एक फ़कीर हूँ||
इश्क़ ख़ुमार नज़ीरहूँ||
सहा बहुत अपमान है||
फिर भी दिल ऐहसान है||
देखे तुझको होइ बशर||
पूरी करनी कर क़शर||
सब कुछ पा लिया पाना प्यार बाकी है||
तशल्ली के लिए तेरा इज़हार बाकी है||
सजा नुमाइश मत कर ज़िंदगी में यार||
तू ही तो मेरे दिल का दिलदार शाकी है||
बन जायेगा अफ़साना दिल ख़ौफ़ कर||
इंसाफ़ को अल्लाह का दरवार बाकी है||
पा लिया मोरब्बत को जवानी के दौर में||
लुभाने को दिल अभी फ़नकार बाकी है||
शाज़ धड़कनों का बजता ख़ुमार के लिए||
मेहफ़िल में तेरी अभी झनकार बाकी है||
निकलते देखा दायरों से माशूम को मैंने||
महल में आने को तेरी दरकार बाकी है||
जी भर गया दुनियाँ की करतूत से मेरा||
तशब्बुर में आने को किरदार बाकी है||
भरी हुई है तिजारत जख़्मों से दिल की||
मरहम के लिए उसका ऐतवार बाकी है||
ज़िन्दा रहकर भी रैहलत हूँ बे ख़ुदी में||
ग़ुज़रने को हद से अभी तक़रार बाकी है||
बन गया है ख़बीश तू यौवन की हवश में||
मेहरूम होने को अभी इनकार बाकी है||
पार किया शरहदों को मुकाम के लिए||
मालूम हुआ वो बेरहम बदकार शाकी है||
जबसे जुदा तू हुआ है सनम||
तेरा हुआ हूँ मैं तेरी कसम||
1,इमरोज़ उल्फ़त ये होती बक़ार||
यादों का तेरी लगाए मज़ार||
कहने को कुछ और बाकी नहीं
बढ़ता है दिल का ये मेरा भरम||
तेरा हुआ हूँ मैं तेरी कसम||
2,तफ़सील जीवन की ग़मग़ीन है||
चढ़ती ख़ुमारी की दुरबीन है||
पाने की रहमत अता रब करे
मरके भी सौ बार लेंगे जनम||
तेरा हुआ हूँ मैं तेरी कसम||
3,ज़ख़मों की किससे अदायत करुँ||
चाहूँ या तुझसे बग़ावत करुँ||
तू ही बतादे ये आकर मुझे
मेरी मोहब्बत पे करले रहम||
तेरा हुआ हूँ मैं तेरी कसम||
4,कहले जो मुझसे मैं कुछ नाँ कहूँ||
शाक़िर हमेशाँ मैं तेरा रहूँ||
मज़रुह दिल में तेरा नाज़ हो
जीवन को तेरे लिए है मरम||
तेरा हुआ हूँ मैं तेरी कसम||
समाज में नाम करना है||
वो भी सरे आम करना है||
गौर मत कर किसी की रैहनुमाई का||
फिर भी सबके साथ रहना है||
आती है तौहमत ख़ुद पे कभी कभार||
गले से लगाकर हँसकर सहना है||
वो भी सरे आम करना है ||
दरिन्दों की डोरी मज़बूत है फिर भी||
तोड़कर उसको किनारा करना है||
चिराग रोशन हो सके फिर से अक्सर||
ऐसा कदम समाज में रखना है||
आगोश में लेना है दुष्मन को फिर भी||
सुधारने को समाज ऐसा करना है||
वो भी सरे आम करना है ||
निभानी पडे़ क़यादत ग़र निराश होकर||
हर कदम फिर भी सोचकर रखना है||
ज़िहाद से मनुज की कदमबोशी बेहतर||
शुकून के लिए ये ऐहतराम करना है||
वो भी सरे आम करना है ||
कमजोर दिल बुलन्द करके हौसले से||
लहरादे परचम जीवन में मरना है||
समाज में आदर्श बनना है||
ऐसा जीवन में करना है||
वो भी सरे आम करना है ||
जलदी आजैयो नजदीक देर मत कीयो
दिलजानी||2
तेरा मेरा हो इज़हार दिले मत लाना
हैरानी||2
बीत गईं हैं बरसों अब तो इन्हीं ख़यालों में||
भटकत हूँ बेज़ार तमन्ना लिए शवालों में||
अब तो जावेदा है प्रीत हिजर की तू है महारानी||
जलदी आजैयो नजदीक देर मत कीयो
दिलजानी||
तेरा मेरा हो इज़हार दिले मत लाना
हैरानी||
ग़मे कैफ़ियत ऐसी मेरी जबसे कर डारी||
छोड़ा मेरा साथ मुसीबत जीवन भर डारी||
जीऊँ पीके जामे शाद मोरब्बत अँखियों का पानी||
जलदी आजैयो नजदीक देर मत कीयो
दिलजनी||
तेरा मेरा हो इज़हार दिले मत लाना
हैरानी||
कटता जीवन कैसे तेरा हाल बता जाना||
करने को दीदार चाँद सा रुप दिखा जाना||
इसी आस को लिए बिलायश दिल में है ठानी||
जलदी आजैयो नजदीक देर मत कीयो
दिलजानी||
तेरा मेरा हो इज़हार दिले मत लाना
हैरानी||
कौन डगर को गये याद भी रह करके आए||
घड़ी जिगर बेताब ग़मों के बादल हैं छाए||
मेरी किशमत में तू नहीं फ़साना रहे नजर तानी||
जलदी आजैयो नज़दीक देर मत कीयो
दिलजानी||
तेरा मेरा हो इज़हार दिले मत लाना
हैरानी||
ये ख़याले इश्क़ हरदम याद आता है||
हिज्र में तेरे शुरीले गीत गाता है||
ऐतराफ़ उसका मैं दिन रात करता हूँ ||
जैसे कोई नजदीक दिलवर मीत आता है||
1,सपने सुहाने धूल में वो मिल गये लेकिन||
हो गया बरबाद भी हालात हैं मुमकिन||
ये हशरतें दिल की मुकम्मल हो गईं अब तो||
हर मोड़ पे किरदार मेरा जीत आता है||
हिज्र में तेरे शुरीले गीत गाता है||
2,दिल की तमन्ना थी हयाते पाऊँगा तुझको||
डोली बिठाके अपने घर में लाऊँगा तुझको||
अरमान दिल के धूल मैं कुछ कर नहीं सकता||
ख़ाना बदोशी हो गया दिल प्रीत लाता है||
हिज्र में तेरे शुरीले गीत गाता है||
3,गुजरे हुए हालात वापस आ नहीं सकते||
कोई घड़ी में हम तुझको पा नहीं सकते||
हजरते तख़ल्लुश हमने ख़ुद अपना बना लिया||
इश्के एजाज़ ज़ैहमतें दिल रीत लाता है||
हिज्र में तेरे शुरीले गीत गाता है||
4,हमको मोहब्बताें के जो भी काफ़िले मिले
चाहा था जिसको प्यार से वो कातिले मिले
पाना रफ़ीक इश्क पाक़ हमको मिल नहीं सका ||
उम्र भर का ग़म जहाँ में नीत लाता है||
हिज्र में तेरे शुरीले गीत गाता है||
हरदम तुझे हम चाहें हर जनम तुझे पायें||
ये रूख़े ख़मोशी क्या दिल ख़्वाब नजर आयें||
1,तुझे खो करके दिल में अब सब्र नहीं आता||
जायें तो कहाँ जायें निज कोई नहीं पाता||
मर मरके जीता हूँ कब प्राण निकल जायें||
ये रूख़े ख़मोशी क्या दिल ख़्वाब नजर आयें||
2,ये पाक़ रिफ़ाक़त भी कुछ काम नहीं आई||
अंजाम निकल आया जीवन भर तन्हाई||
अब बिना मुसाफ़िर के जावेदा दुख पायें||
ये रूख़े ख़मोशी क्या दिल ख़्वाब नजर आयें||
3,दिल धूल हुए अरमा अब कोई नँ सहारा है||
है मंजधार किश्ती मिलता नँ किनारा है||
अब कोई तो बतलादे किस ओर चले जायें||
ये रूख़े ख़मोशी क्या दिल ख़्वाब नजर आयें
4,जो ग़मे ख़ुशी मिलती वीरान ज़िंदग़ी में||
किया ग़वारा दिल तेरे नाम बंदग़ी में||
इरशाद अगर हो तो तेरी ओर चले आयें||
ये रूख़े ख़मोशी क्या दिल ख़्वाब नजर आयें||
मेरी बद नसीबी मुख़ातिब हुई है
आँसू ग़मों के मैं पी रहा हूँ!
रूषवा ज़माने ने मुझको किया है
मर मरके यारो मैं जी रहा हूँ!
1,इधर तेरी यादें दिल की ख़मोसी
सूना तसब्बुर तुझको पुकारे
तुझको पुकारे!
उधर तेरा जीवन नेमत से बीते
इधर तेरी यादें कर भी रहा हूँ!
रूषवा ज़माने ने मुझको किया है
मर मरके यारो मैं जी रहा हूँ!
2, झूठी मोहब्बत का ये असर है
गुमराह हम तो हो ही गये थे
हो ही गये थे!
रो रोके मैंने पल पल गुजारे
रातों को तारे गिनता रहा हूँ
रूषवा ज़माने ने मुझको किया है
मर मरके यारो मैं जी रहा हूँ!
3,हमें छोड़करके यूँ जा रहे हो
आना ओ शाकी मेरे आशियाने
मेरे आशियाने!
हुई आबरु है किसी और की वो
दिले हौसला भी नहीं ला रहा हूँ
रुषवा ज़माने ने मुझको किया है
मर मरके यारो मैं जी रहा हूँ!
4,मैंने ख़ुदा से तुमको है माँगा
मेरे हयाते नँ कलियाँ खिली हैं
नँ कलियाँ खिली हैं!
निराशा मेरे इन हाथों लगी थी
घुट घुटके जीवन मैं जी रहा हूँ!
रूषवा ज़माने ने मुझको किया है
मर मरके यारो मैं जी रहा हूँ!
सारी दुनियाँ छोड़कर तुझे ढूँड़ लूँ!
तू नँ मिल सके ग़र तेरी यादों को चूम लूँ!
दो दिन का मुसाफिर हूँ मैं तेरे आशियाने में!
इसी बात को लेकर पैमानों में खुशी से तो झूम लूँ!
तू नँ मिल सके ग़र तेरी यादों को चूम लूँ!
लश्क है दिल आँसुओं से मेरा टूटने में देरी नहीं!
यादों का बोझ लेकर खुशी से मैं तेरी ओर तो घूर लूँ!
तू नँ मिल सके ग़र तेरी यादों को चूम लूँ!
बेकसी बन गई ख़ल्क़त मारने लगी है मुझे!
उन्हीं यादों में जाकर तेरे दिल में एक बार तो झूम लूँ!
तू नँ मिल सके ग़र तेरी यादों को चूम लूँ!
खाना पीना हराम है खाने की इक्तिजा नहीं!
दर किनोर दिलवर के महल तक क़लक में तो घूम लूँ!
तू नँ मिल सके ग़र तेरी यादों को चूम लूँ!
जान जाए अगर भी तो ग़म नहीं है मुझको!
मेहज़ मैं तुझे एक बार इसी हिज्र में दिल से तो पूज लूँ!
तू नँ मिल सके ग़र तेरी यादों को चूम लूँ!
तेरे चेहरे को देखा है जब से सनम!
आ गया है नूर उल्फ़त का तेरी कसम!
हिल्कियाँ हिज्र में बँध गयीं हैं मेरी!
तेरी यादों में दिल के हैं गहरे ज़ख़म!
आ गया नूर उल्फ़त का तेरी कसम!
हशरतें हो गईं दिल मुकम्मल सभी!
तेरा दीदार काफ़ी है तेरी कसम!
आ गया नूर उल्फ़त का तेरी कसम!
प्यार का फ़ल्शफ़ा तेरे दिल में नहीं!
फूटते इसलिए हैं ये तेरे करम!
आ गया नूर उल्फ़त का तेरी कसम!
ग़ैर की चाह थी हमको बहका दिया!
मेरे दिल की मोहब्बत भी पहुँची चरम!
आ गया नूर उल्फ़त का तेरी कसम!
इख़्तिताम हो गईं हैं जिहादें सभी!
फिर मिलेंगे कुदिश में मिटाके भरम!
आ गया नूर उल्फ़त का तेरी कसम!

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