बिसरी हुई यादें
बिसरी हुई यादें सताती हैं हमको||
राहें वो गलियाँ बुलाती हैं हमको||
कैसे नँ जाएँ उन पुरानी यादों में||
शीतल फ़िज़ाएँ झुलाती हैं हमको||
1,वो मोहब्बत का कारवाँ अधूरा रह गया||
हशर आहें बनके डुबाती हैं हमको||
2,रख करके दिल में तुझे जी रहा शातिर||
दुश्वार हैं शिष्कियाँ सुलाती हैं हमको||
3,आईना ए दिल भी कब्रिस्तान बन गया||
फ़ितूरे नाँशाद यादें घुमाती हैं हमको||
4,इश्क की शलाखें मुन्सितर हैं जिस्म से||
हिजर की आतिश में जलाती हैं हमको||
5,दर्दे दिल की दवा भी कहीं नहीं मिलती||
ऐहसास ये आहें कराती हैं हमको||
1,रहा अधूरा साथ है||
हाथ नहीं अब हाथ है||
2,और नहीं है कोई गिला||
चलता रहे यूँ सिल्सिला||
3,तू ही तो निज बरक़त है||
चाहत दिल की हशरत है||
4,तेरा सनम असीर हूँ||
दिल का महज़ फ़कीर हूँ||
5,ग़ुज़रे दिन हैं मुश्किल से||
बीत रही तड़फ़न दिल से||
6,गई कली मुरझाई है||
मिली इश्क रूशवाई है||
7,बेशक जग बदनाम हूँ||
इश्क भरी पहचान हूँ||
8,गया छूट अब हाथ है||
याद तेरी निज साथ है||
नूरे नजर निहार अजब सी हलचल है छाई||
हो बैठे मजबूर रिफ़ाक़त रँग में रँग लाई ||
मोहब्बत बढ़न लगी उस से||2
देखे बिन नहीं सब्र घटा ग़म छाइ रही रूख़ से||
दस्त नज़राना ले कर के||2
आवै दिल में ख़ुशी इश्क परवाना दे करके||
जुदाई ग़म सिर पे छावै||2
किया सामना शख़्त मुशीवत जावै इक आवै||
सतावै याद तुम्हारी है||2
पड़ै नँ इक पल चैन शाँस थम रही हमारी है||
कहाँ तुम चले गए शाकी||2
आजाओ अब जल्द दरश को शासें हैं बाकी||
चाँद सा रूप दिखा जाओ||2
दिल का जो अरमान अधूरा उसे मिटा जाओ||
पड़ी है जान मेरी मुश्किल||2
नहीं जहाँ में कोइ दीखता तू ही तू है दिल||
इश्क शमसीर दिले चलती||2
तेरे बिन अब रैन यार भी बिरहाकुल कटती||
नजर का जाम पिला देना||2
मन के मेरे मीत मुझे दिल से नँ भुला देना||
बिछुड़ना सहा नहीं जाए||2
भड़के आतिश इश्क यार अब रहा नहीं जाए||
ख़याले दिले सनम रखना||2
मुख़ड़ा मोड़ नजर से अपनी ओझल मत करना||
मुसाफ़िर दिले ख़वर लीयो||2
तुरबत मेरी आइ ख़ुशी में कर से छू लीयो||
पड़ी है मंजधार नैया||2
तेरे बिन ओ दिलवर कोई पार नँ लगवैया||
तक़दीर मुझसे जुदा हो गई||
मेरे लिए वो ख़ुदा हो गई ||
1,आने की कोई जो कहके गया||
जीवन में विष घोल करके गया||
जाने कली फिर कहाँ खो गई||
मेरे लिए वो ख़ुदा हो गई||
2,ये डोरी मोहब्बत की टूटी सनम||
टूटा है दिल का ये मेरा भरम||
वो मुरादे मोहब्बत कहाँ सो गई||
मेरे लिए वो ख़ुदा हो गई||
3,दिल भी हमारा तेरे नाम था||
मोहब्बत में तेरी मेरा काम था||
माँफ़ करना मुझे ये ख़ता हो गई||
मेरे लिए वो ख़ुदा हो गई||
4,दिल में शरीके नँ हमको किया||
बदला नँ जाने है किसका लिया||
फ़ितरत की तौहमत जहाँ हो गई||
मेरे लिए वो ख़ुदा हो गई|।
मेरी किस्मत में अँशुओं झड़ी!
आँख जबसे है तुझसे लड़ी!
तू शामिल मोहब्बत मेरी (2)
तेरे बिन उम्र सूनी पड़ी!
आँख जबसे है तुझसे लड़ी!
तेरी चाहत में पागल हुए!
हर दम यूँ ही खोते रहे!
कुछ खाया तो खाया मगर!
बिन खाए ही सोते रहे!
देर बिल्कुल नहीं अब करो (2)
मेरी किश्ती भँवर पड़ी!
आँख जबसे है मुझसे लड़ी!
याद मेरी नँ बिल्कुल तुम्हें!
मुखड़ा क्यों मोड़ा है!
बदला है कब का लिया!
तन्हा कर छोड़ा है!
राह तककरके हम तो थके(2)
भर पाई मुशीबत कड़ी!
आँख जबसे है तुझसे लड़ी!
दिन सूने गुजरने लगे!
दिल रहता था तेरा ख़याल!
तेरी यादों का घेरा करीब!
शिफ़्त पैहरा था दिल में मलाल!
तब सोया था मेरा नसीब (2)
हाथ बाँधे शिक़श्ते खड़ी!
आँख जबसे है तुझसे लड़ी!
हो तेरी यादों का पहरा दिल पे हुआ!2
मेरे यार आ भी जा दिलदार आ भी जा!
रट रटके तेरा नाम मुसाफ़िर
सब्र जिगर में फ़रमाया!
अब और नहीं है बीच तसब्बुर
तू ही दिल को है भाया!
हो इक तिरछी नजर बे ख़ुद मैं हुआ!2
मेरे यार आ भी जा दिलदार आ भी जा!
जब ज़ुल्फ़ तेरे रूख़शारों लटकीं
हमको जिन्होंने तरसाया!
बंधन दुनियाँ तोड़ दिले जब
तुझ पर ही ये दिल आया!
हो तेरा जादू उस दिन मिलके हुआ!2
मेरे यार आ भी जा दिलदार आ भी जा!
ग़ैर नहीं है तुम बिन दिलवर
मेरे पहलू आ जाओ!
कोई गिला नहीं तुमसे होगा
मेरे दिल पे छा जाओ!
हो तेरी बातें असर जो मुझ पे हुआ!2
मेरे यार आ भी जा दिलदार आ भी जा!
रो रो करके याद में हमने
सारी उम्र गुजारी है!
महज़ दिले निज करके तेरी
ही तस्वीर उतारी है!
हो तेरे हुस्न का शाक़िर जज़्बे हुआ!2
मेरे यार आ भी जा दिलदार आ भी जा!
हुस्न की क़ैद में जबसे आया हूँ!
सुनाने को तेरे लिए ग़जल लाया हूँ!
तू मेरे पास था तब सब अच्छा था!
बुरा इन्सान भी मेरे लिए सच्चा था!
तमन्नाएँ दिल की फ़रेब हो गई हैं!
काली जुल्फें भी सफ़ेद हो गई हैं!
तुझसे जुदा हो गया मेरी गलती है!
दिन व दिन अब चाहत बदलती है!
लगी ठेस जलाल मेरे इज़हार पर!
चढ़ा नहीं है परवान तेरे प्यार पर!
शिक़स्त मत खा मन्ज़िल मिलेगी!
रख इश्क़ में कदम कली खिलेगी!
मंजिल मयस्सर अब यकीन नहीं है!
करूँ तो क्या करूँ तश्कीन नहीं है!
बैठा हूँ तेरी उम्मीद लेकर के राह में!
जज़्बात निकलते हैं मेरी इस आह में!
होने लगा है असर तेरे ऐतवार का!
बाकी है इंतजार इश्के इज़हार का!

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