कबीर महिमा


●●●●1.रामपाल गुरु देव मनाऊँ!        

 ●●●●चरणों में झुक शीस नवाऊँ?

           

        2.   छोड़ जगत का भोग विलासा!

             हरि की शरणें  करो निवासा ?


       3.    सार नाम सत् नाम जाप से !

              मिले रिहायत सभी पाप से ?


      4. नींची जाति मुहाफ़िज मेरा !

           जिसका है काशी मह  डेरा ?


       5.   अब तक मानुष थे अज्ञानीं!  

              महिमा हरि गुरु देव बखानीं ?


        6.   मारग सबको मुक्ति दिखाया !

             ऊँचा जग परचम लहराया ?


        7.   प्रेम भाव का जतन कीजियो !

              अपयस अपना आप लीजियो?


        8.   छूट कलेश जगत से जाए !

              अन्त समय परमारथ पाए ?


        9.   कबिरा जग पाखंड हटाया!  

              एक राम फ़रमान सुनाया ?


       10. पूरणँ  ज्ञान जगत समझाया!   

            सार नाम  सत् नाम जताया ?


      11.   करैं बुराई मुश्लिम पन्डित !     

              ज्ञान कबीर किया है खन्डित ?


      12.   जो नर  नहीं  शरणँ में आए !      

              काल ब्रह्म के गाल समाए ?


      13.   एक नाम है जग से न्यारा  !   

             जिसकी कृपा सकल संसारा ?


      14.   हरि मेरा सतलोक निवाशी!      

            कणँ-कणँ में है फ़जल प्रकाशी ?


      15.   तज सतलोक ज़मीं पर आए !     

              दो अक्षर का ज्ञान कराए ?


      16.   दिखलाया है मुक्ती मारग!      

             वही ज्ञान का पूरणँ सागर ?


      17.   और नँ  कोई हितू हमारा!     

              रामपाल गुरुदेव सहारा ?


     18.   आओ शरणें सुक्ख घनेरा!      

             होइ रुहानीं मिटै अँधेरा?


●●19.आत्म समर्पण गुरु के होजा!

●●●●उसकी तू भक्ती में खोजा?


●●20.जड़ से पात् ज्ञान समझाए!

●●●● पूरणँ राह निजात दिखाए?

 कबीर मुक्ति राह

1. मुक्ति की राह दिखाने वाले 

   मुनासिब ज्ञान बताने वाले

   काल के जाल छुड़ाने वाले 

    जुलाहे कबिरा हैं मतवाले ?


2. प्रेम का जाम पिलाने वाले 

   भक्ति तक़नीक बताने वाले !

   सलामत सबको रखने वाले 

   जुलाहे कबिरा हैं मतवाले ?


3. जाति का भाव मिटाने वाले 

    एकता उनमें लाने वाले !

   शांति भरपूर जताने वाले 

   जुलाहे कबिरा हैं मतवाले ?


4. सभी के संकट हरने वाले

     भगत फ़रियादें सुनने वाले !

    इबादत सहज बताने वाले  

     जुलाहे कबिरा हैं मतवाले ?


5. सभी का भाग्य बदलने वाले 

    नई उम्मीद जगाने वाले !

    किरणँ आशा की बनने वाले 

     जुलाहे कबिरा हैं मतवाले ?


6. उजागर मन को करने वाले 

    भक्ति रस रग में भरने वाले !

    जगत सत् नाम गहाने वाले 

    जुलाहे कबिरा हैं मतवाले ?


7- ज़िवह प्रतिबंध लगाने वाले 

    अहिंसा को अपनाने वाले !

  सदाँ मानवता रखने वाले 

   जुलाहे कबिरा हैं मतवाले ?


8- प्रेम के दीप जलाने वाले 

   घ्रणा को दूर भगाने वाले !

   एक मत स्थिर करने वाले 

  जुलाहे कबिरा हैं मतवाले?

सत् गुरु की भक्ति

राम कबीर जपो रे साजन! 

होगा घर में सितार वादन!


तेरा दिल ग़र होवै जोगी!

जगत वाशना रहै निरोगी!


नाशक पाप एक परमेश्वर!

दुर्गा ईश नहीं हैं ईश्वर!


कर्मों लेख नुमाइश खंडन!

मातम भंजन नहीं निरंजन!


व्याकुल है ये रूह हमारी!

भटक रही है दुनियाँ दारी!


बिन बालम के जीव दुखारी! 

दुनियाँ सुख से नहीं सुखारी!


फ़ूल बजाए सूल मिले हैं!

इसीलिए सब धूल मिले हैं!


राम कबीरा कृपा निधाना!

कोई नँ उनके और समाना!


पूरणँ  सुख के वो हैं सागर!

एक बूँद में भर दें गागर!


महिमा उनकी बड़ी निराली!

होइ हरी सूखी हो डाली!


छोड़ सभी काले तख़्मीना!

बाजी जीत तान कर सीना!


किस्मत लेख कबीर मिटावै!

दुख की एवज सुख उपजावै!


पूर्णं गुरू तफ़्तीश कीजिए! 

झुक चरणों से दुआ लीजिए! 


किस्मत कष्ट वही हर लेता!

पूरणँ सुख पल भर में देता!


राह निजात उसी का खेला!

पल भर में छुटवाए मेला!


जिन पर तू मोहित है बन्दे!

यही काल के सब हैं फन्दे!


बीच कबीर अगर है दिल के!

काम बनेंगे हों मुश्क़िल के!


जगर मगर हो घर में तेरे!

छुट जायेंगे पाप घनेरे!


गुरु महिमा गुणँ गान कीजिए!

हर पल मन से साथ दीजिए! 


सत् गुरु चरणों होइ बसेरा!

मुक्ती मारग मिले घनेरा!


जीवन सफ़र जगत में आना!

पिन्जर छोड़ हंस को जाना!


काल जीव है धार क़यामत! 

दारम दारा होइ हयामत!


ज्योति निरंजन काल कसाई!

खिला पिला कर करै सहाई! 


आवै नम्बर नार उड़ाई! 

ऐसा नींच बड़ा अन्याई!


रामपाल गुरु देव हमारे!

जिनकी महिमा जगत बखारे!


सत् गुरु बंदे भक्ति कीजियो!

पूर्णं मयस्सर मुक्ति कीजियो! 


और सभी आदर के काबिल! 

सत् गुरु से मिल जाए साहिल!


कहीं कहीं पर हैं जो जाहिल!

ज्ञान बताइ कीजियो क़ाहिल!


और नहीं दुनियाँ में भाया!

सत् गुरु दिल के बीच समाया!


गुरु तक़नीक मयस्सर करले!

भव सागर से पार उतरले!


बेशक़ हरि का करले गायन!

गुरु बिन मुक्ति नहीं है साधन!


चाहे तीरथ करो ज़ियारत!

सत् गुरु बिन बेक़ार इबादत! 


सन्तों की तू संगति कीजे!

राम नाम के रस को पीजे!


पूर्णं भक्ति सत् गुरु से पावै!

अपना जीवन सफल बनावै!


पूर्णं गुरू से ख़ूब रीझले!

दो अक्षर का ज्ञान सीखले!


बन्धन काल चिराग बुझाले! 

 वैद्य गुरू उपचार कराले!


पूरणँ सत् गुरु रामपाल हैं!

और गुरू सब काल जाल हैं!


सत् गुरु से ही सब कुछ होवै! 

मिलै नहीं जीवन भर रोवै!


जब तक सत् गुरु भक्ति नहीं है!

पूर्णं मयस्सर मुक्ति नहीं है!


गुरु को बड़ा राम से मानै! 

महिमा गुणँ गोपाल बख़ानै!

कबीर का आन

लेहतारा तालाव कमल पर!

आये हरि सत् लोक उतर कर!


नीरू नीमाँ निज घर लाए!

सुत का नाम कबीर धराए!


नर नारी सब देखन आए!

होंइ अचम्भित मन हरषाए!


किसी शेय का  ग्रास नँ कीया!

क्वारी गाय दूध को पीया!


दुनियाँ मेरे नहीं काम की!

लगी लगन है राम नाम की!


रामा नन्द गुरू  अपनाए!

कबिरा उनके शिष्य कहाए!


मात पिता सँग कपड़ा बुनते!

खुद ही गुज़र आपनी चुनते!


एक झोपड़ी में वो रहते!

साधारण भोजन को करते!


निज जीवन में पढ़े नहीं थे!

संघर्षों से डरे नहीं थे!


ख़ुद पहचान गहाई जग में!

खुशियाँ भक्तों रग ही रग में!


आडम्बर से नहीं भक्ति हो!

मूरति पूजा नहीं मुक्ति हो!


सार नाम सत् नाम भजो रे!

भक्ति उपाए राम कहो रे!


तीन देव का भेद बताया!

सही राह सबको ठहराया!


चौंसठ लाख शिष्य अपनाए!

तब वो बंदी छोड़ कहाए!

कबीर गुरू चाहत

1. गुरु बनाने चल पड़े 
कबिरा 
  घर को छोड़ !
    रामानंद समीप में
 किया नमन 
    कर जोड़ ?

2. मुझे बनालो शिष्य
 तुम मनकी 
   है अरदास !
   हो ग़म की ग़र
 आंधियाँ 
   रहूँ आपके साथ?

  3 .नींची जाति कबीर तू 
कभी नहीं 
   ये होइ!
  रस्ता अपनी नाँपले 
वचन कह 
   दिया तोइ  ? 

4. रात महूरत के समै 
गुरु किया
    स्नान!
   आये कबिरा सीढ़ियों
 लेटे 
    गुरु की आन ?
 
5. आये  गुरु  स्नान से
 आगे कदम 
बढ़ाइ!
    चरणँ लगा 
सिर में किसी  
    दिल हैरत,में आइ?
    
6. कहो दास तुम कौन हो 
कहा 
    तुम्हारा नाम!
    कौन मुसीबत में पड़े  
हमसे 
    क्या है काम?  


कबीर का गुरु से!
1. मुझे कहा जो दास तुम 
बन जाओ 
    गुरुदेव !
    जावेदा सँग में रहूँ 
करूँ तुम्हारी 
    सेव ?

संगति साधु कबीर!
2. साधु संग कबिरा रहैं 
गुरु दक्षिणाँ
    पाइ !
     जीवन सुख में बीतता
जहाँ,फ़िकर
मिट जाइ?

गुरु शिष्य में गुफ़्तगू!
3. होइ रही थी गुफ़्तगू
रामानंद 
    कबीर !
    गुरु शिष्य के बीच में 
प्रेम बहुत 
     ग़म्भीर ?

कबीर का गुरु से!   
4. सब लोकों का न्यायधीश 
जिसका 
     नाम कबीर!
    बैठ तुम्हारे पास में 
करता जो 
    तक़रीर?

गुरु का कबीर से!
5. बिना सबूत नँ  मानता
 क्यूँ भरमाता 
    मोइ !
     निकल यहाँ से भाग जा 
कपटी मानूँ 
     तोइ ?

कबीर गुरु का
अंश ले जाना!
6. प्रभू अंस को ले गए
 रामानँद 
    मरहूम !
    स्वर्ग नर्क दिखला दिया
 दुख सुख की 
    अति धूम ?

गुरु का जीवित होना!
 7. लाये हैं हरि अंश को
 करत  शरीर 
     प्रवेश!
    रामानँद जीवित हुए
 परिचित हो 
    हरि देश  ?

कबीर से गुरू माँफी
8. पैरों में गुरु गिर पड़े
 करना मुझको 
    माँफ !
    मेरे गुरु जी तुम हुए
 कहूँ आपसे 
    साफ ?

गुरू कबीर के शिष्य!
9.  गुरु जी मेरे आप हो 
दे दूँगा
     सत् लोक
     हँसी खुशी का बालपन
 होइ न 
    कोई शोक?

कबीर से दीक्षा गुरू जी!
10. दीक्षा दी हरि ने तभी 
सार नाम्
       सत् नाम्!
       इसी मंत्र के जाप से 
पाओगे
       निज धाम  ?


1. गुरु की 
ज़िम्मेदारियाँ
 कबिरा 
     रहे निभाइ !
    शिष्य बहुत 
अपनालिए रहे 
    तक़नीक सिखाइ?  

2.  जाति पाँति के 
भाव को मन से 
 देओ बिसार!
   एक मानकर जानियो 
होगा अति 
    उपकार ?

3. कोई कहे कि 
राम है कोई 
    कहे ख़ुदाय !
    उसके नाम 
अनेक हैं फिर 
   कैसी है हाय ?

4. राम ख़ुदा के
 नाम पर मती
    करो तक़रार !
    जाना सबको एक 
दिन धर्मराय  
    के द्वार ?

5. पेड़ हवा आकाश में  
धरती पर 
    विख्यात !
   कणँ-कणँ उसका
 वासरा मन में 
   लहर समात ?

6. संगति पाओ सत् गुरू
 सत् गुरु 
    है भगवान !
   कृपा  अगर जो 
हो गई होवै
   देव समान ? 

7. अबतक जो कुछ 
भी हुआ करै 
    गुरु निष्पाप !
    सुक्ख हमेश
 हयात हो मिट जाये 
    संताप ?

8. जायेगा तू मुक्ति घर 
    नहीं बुढ़ापा  आइ  !
   रहमत रब की हो 
सदाँ अजर 
   अमर हो जाइ ?

9.कबिरा लखि रश्के 
करैं रहते 
   जो अभिमान !
   पढ़े लिखे निज 
कारने करैं
    बहुत अपमान ?

10. कड़े सितम उनपर 
किए कुछ नाँ
      आया हाथ !
       बार-बार जीवन
 बचा राम कृपा 
      के साथ ?

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