पूर्णं परमेश्वर कबीर जी
पूर्ण परमेश्वर कबीर जी
1. चरणँ कमल की
बंदना करता हूँ
हर बार !
मेरे प्रभू कबीर हैं
जिन पर
मैं बलिहार?
2. नींची जाति
कबीर के बंदे
रहो हमेश!
क्षर अक्षर आदर करो
ब्रहम्मा
विष्णु महेश?
3. कर वाबस्ता ओम् तत्
बनता है सत् नाम्!
सार नाम् सत् शब्द का
है अल्लाह मकाम?
मगन मोहब्बत हो गई
मान लिया
निज बालम ?
5. निज हयात रब की
पनाँह में जियो !
प्रेम का पियाला भी
जी भरके पियो
मिट जायेगी प्यास
उम्र भर की
मरने के बाद सफ़र
सत् लोक में कियो ?
6. वो ही पालन हार है
वो ही
तारणँ हार !
उसी राम की भक्ति में
करले जीवन पार ?
7. पड़े काल की जेल में
जीवन मरना होइ !स्वाँस जपत सत् नाम को
भव से तरना होइ ?
8. ब्रहम्मा विष्णु
महेश ये पड़े
मौत जंजाल !
दुर्गा इनकी मात है
पिता
निरंजन काल ?
9. पाक इल्म सत् नाम है
सार नाम् है संग!
पाना पूरणँ मोक्ष हो इन्हें
लगालो अंग?
10.नर मत बन तू स्वार्थी
हित कर
सबके साथ !
जाए जग से
एक दिन
फ़ैलाकर के हाथ ?
11. बदल देय
तकदीर को
पूरणँ ब्रहम्म कबीर !
क्षर अक्षर
औकात क्या
पड़े मौत जंजीर ?
12. परमेश्वर इज़हार में
रहता है
सत् लोक
सच्चा इल्म सुनान को
आता है
नर लोक ?
13. करै इबादत क्या हुआ
किया नहीं है दान !
व्यर्थ इबादत दान बिन
रब का है अपमान ?
14. जीवन तेरा धन्य है
बंदे मती
गमाइ!
भक्ती कर सत् नाम की
परमारथ
को पाइ ?
15. साधू संगति प्रेम रस
पीयो
जी भरके !
जाओगे सत् लोक
में धरती
से तरके ?
16. गुरू मिलत हैं बहुत से
मुक्ती दायक
सत् गुरू !
सभी ज्ञानणी छोड़कर
कर दे नई
तक़नीक शुरू?
17. प्रेम ख़ज़ाना खोल
दे सबको
समझ समान !
हरदम रब का नाम
ले तज दे
निज अभिमान ?
18. पूर्णं गुरु तफ़्तीश
कर गलत
राह नहीं जाइ!
सुक्ख मिले
संसार में पूरणँ
मुक्ती पाइ ?
19. सुख दुख समझ
समान तू दुनियाँ
से डर नाहीं हो !
प्याला पी सत् नाम का
ईश्वर
तेरे माहीं हो ?
20. मैं मैं करना छोड़ दे
तू-तू-तू मन
लाइ !
तू तेरा हो जायेगा
मैं-मैं बाहर
जाइ ?
21. हरि महिमाँ
गुणगान से छूटैं
सभी कलेश!
मुक्ति मार्ग मिल जायेगा
जीवन
सुखी हमेश?
22. प्रेम पियाला राम का
पीयो रे
महबूब!
तेरी मरजी तू चुने
थोड़ा पी-
या खूब ?
23. सत् गुरु शरणेैं
लीजियो छोड़
जगत दरक़ार!
सुखी रहे संसार में
होंइ पाप
सब छार ?
24.आये थे सत् लोक
से कासी
में डेरा !
समझ न पाये शख़्स
जो उलझ
काल के फेरा?
25. बंदे तू क्या सोचता
राम नाम को
जपले!
सपनाँ जग है रैन का
भव सागर से
तरले ?
26. ओ मन पापी
हरि को भूला !
दुनियाँ के
झंझट में फूला
नश्वर हैं ये
जहाँ वस्तुएँ
जिनको तू
दिलशाद कुबूला ?
27. संसार का बोझ
हट गया दिल से !
मिलने का अरमान
है तुमसे
जीना मुहाल हो रहा
काल की जेल में
तुम्हीं मिलने को
आ जाओ हम से?
28. दिल से दिल का
मोल कर
तन का बिल्कुल नाँहि !
दिल से दिल
मिल जायेंगे
खुशी होइगी माँहि ?
29 . दिल से दिलेर होकर
मुहाफ़िज़ बनना
कबीर का कर्म था !
किसी भी जाति में भेद भाव-
न करना
मानवता उनका धर्म था?
30.तत्व ज्ञान बिन बाबरे
लख चौरासी जाइ!
मुक्ती पूरणँ मिलै नहीं
दुक्ख अगारी आइ?
31.माया है तिर गुण मई
लोक नेस्तनाबूद!
चक्कर इसके नाँ पड़ो
हरि का है मख़्सूद?
32.सुख की निदिया सोइले
करके रब को याद!
भोर उठे मन ऊजरा
है ऐसी बुनियाद?
33.लगा लिया मन नींद से
गया राम को भूल!
जीवन ड्रामा डोल हो
उपजे घर में सूल?
34.समद सफ़ीना डूबती
करदे गुरुवर पार!
तेरा ही इक आशरा
और नँ शिरजन हार?
35. यही वक्त सत् भक्ति का
मूरख
मती लजाइ !
करले सत् गुरु रामपाल
अवसर
यही कमाइ?
1.नायक सब
ब्रह्मांड का
कबिरा परमेश्वर !
किए दान
इक्कीस क्षर
सात संख ईश्वर ?
2. निज कारज
मसरूफ़ हैं
ब्रहम्मा विष्णु महेश !
पिदर काल इरसाद को
करते
पूर्णं हमेश ?
3.ईंटें पड़ीं पत्थर पड़े
हँस हँसके
सह गये !
खुद तो चले गये लेकिन
सच्चाई सूक्षम
वेद में दे गये ?
4. प्रेम पियाला परम
अक्षर कबीर
ने हँस हँसकर पिया !
सत्य मजहब पर
अडिग रहकर
जीवन दिल
खोलकर जिया ?
5. कबीर को न जानकर
जन मनमानी
चला गये !
मरने के बाद सबके
सब काल के
जाल में समा गये ?
6. नफरत को तुड़वा दिया
मोहब्बत से
जुड़वा दिया !
करके शिष्यों पर इनायत को
काल बंधन से
छुड़वा दिया ?
7. गुरु बड़ा है राम से
गुरु मूरति उर लाइ !
गुरु मंत्र का जापकर
गुरु ही पार लगाइ ?
8. भक्ति कमाई कीजियो
मतना करियो बैर !
कुछ भी कहे जहान ये
रखियो दिल में खैर ?
9. जाने की उम्मीद कर
अजर अमर सत् लोक
सदाँ न रहना जगत में
फिर काहे का शोक ?
10. चमड़ी निज अभिमान
है मिल जाएगी धूल !
भक्ती बिन बेकार की
है ये तेरी भूल ?
11. क़ुदरत का संसार है
सुखी नहीं है कोइ !
वही सुखी संसार में
पूर्णं प्रभू का होइ ?
12. सच्चा रब अपनाइ ले
क्यों लाता है सुस्ती रे !
सुक्ख मिले भरपूर भी
होवै तेरी मुक्ती रे ?
13. सार नाम सत् नाम हैं
मुक्ती के आधार !
तिनकी करले बंदगी
हो जायेगा पार ?
14. मानवता अनमोल धन
करो काम निष्काम !
गुरु मंत्र जपते रहो पाओगे
निज धाम ?
15. परदेशी दिल हो गया
परदेशी के पास !
फ़ीका जग लगने लगा
जीऊँ तेरी आस ?
16. दिल का रिश्ता राम से
ओ मन
पापी जोड़ !
माँटी महल जहान है
सारे
बंधन तोड़ ?
17. गुरु बताई राह पर प्राणी
चलो हमेश!
ख़िदमत दिल से
कीजियो लेय
नाम उपदेश ?
18. पूर्णं प्रभू की भक्ति कर
मत कर
वाद- विवाद !
मजहब गर संकट दिखै
कर तक़नीक जिहाद ?
19. पूर्णं प्रभू का मंत्र जप दुनियाँ
खेल बिसार !
पूरणँ होंगे काम सब जिनकी
है दरकार ?
20.पाक मोहब्बत राम से करले
ओ नादान !
सत् गुरु शरणँ जरूर ले राह
बहुत आसान?
21. मन का मैल छुटाय ले
प्रभू शरणँ
में जाइ !
परम हंस बन जाएगा
मुक्ती पूरणँ
पाइ?
22. हरि महिमाँ गुण गान कर
नहीं दिले
सकुचाइ !
हँसी करै संसार गर अपना
लेय बनाइ ?
23. हरि से जो मेहरूम है मुक्ती
कैसे पाइ !
जन्म-मरण के जाल में
रहकर के पछताइ ?
24. भजन करै हिंसा करै सफल
नहीं तू होइ !
दोजख में खुद जा रहा
स्वर्ग नसीब नँ होइ?
25. जाप करो सत् नाम का
क्षर अक्षर हो पार!
सार नाम् सॅंग में जपो
जाओगे हरि द्वार?
26. बहुत बन लिया स्वार्थी
बन जा अब तू नेक!
कोइ किसी का नहीं यहाँ
मालिक सबका एक?
27. मजहब मान समान तू
निज हठ को दे त्याग!
अपने को पहचान कर
ले भक्ती में भाग ?
28. झंझट जगत बिसार के
सत् गुरु कर तफ़तीश!
जिनकी रहमत से तुझे
मिल जाए जगदीश ?
29. जब तक तन में सॉंस
है तेरा जगत बसेरा!
अंत समै कुछ भी नहीं
हो मरघट में डेरा?
30.मेरा तेरा क्यों करै
कोइ किसी का नाँहि!
भूल भुलैया स्वप्न है
देख रूह निज माँहि?
31.दिले शाद भक्ती करो
गुरू लगन में खोइ!
रहे सलामत ज़िन्दगी
फ़जल इलाही होइ?
32.गुरु की शरणें आयके
कीयो मती गुमान!
मन से शिक्षा लीजियो
यही तेरी पहचान?
33.स्वप्न सुहाने रैन के
सबके सब हैं धूल!
करके मन दरवेश तू
पूरणँ ब्रह्म कुबूल?
34.राम दरश पाकर दिले
होइ निहायत शाद!
सदमा कोई नँ आ सके
पूरी होइ मुराद?
35.रामपाल हैं सत् गुरू
क्या इसमें संदेह !
सत् गुरु जो मानै नहीं
धरै देह पे देह ?

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